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भास्कर न्यूज | राजनगर राजनगर प्रखंड मुख्यालय स्थित जिला परिषद के डाक बंगला में ठेकेदार के मजदूरों को ठहराने का मामला अब राजनीतिक रंग लेने लगा है। जिला परिषद द्वारा राजस्व अर्जन के नाम पर डाक बंगला को आठ हजार रुपये प्रतिमाह किराये पर दिए जाने के निर्णय पर झामुमो के केंद्रीय सदस्य विशु हेंब्रम ने कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि जिस भवन का निर्माण अतिथियों एवं सरकारी अधिकारियों के ठहरने के उद्देश्य से किया गया था, उसका मजदूरों के आवास के रूप में इस्तेमाल उसके मूल उद्देश्य के साथ खिलवाड़ है। विशु हेंब्रम ने कहा कि यदि जिला परिषद केवल अपनी परिसंपत्तियों से राजस्व अर्जित करना चाहती है तो डाक बंगला का नाम बदलकर “मजदूर क्वार्टर” कर देना चाहिए। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यदि हर सरकारी संपत्ति को किराये पर चढ़ाकर ही आय बढ़ानी है तो जिला परिषद अपने कार्यालय भवन को भी किराये पर दे दे। विशु हेंब्रम ने कहा कि लगभग 38 लाख रुपये से बना दो मंजिला डाक बंगला, जिसमें सात कमरे हैं। इतने बड़े भवन का बाजार किराया कम से कम 15 से 20 हजार रुपये प्रतिमाह होना चाहिए। इसे मात्र आठ हजार रुपये में दे दिया गया है। इससे पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं। प्रश्न केवल राजस्व अर्जन का नहीं है। यह सरकारी संपत्ति के मूल उद्देश्य और उसके उपयोग का भी है। अतिथियों के ठहरने के लिए बनाए गए डाक बंगला का उपयोग यदि मजदूरों के आवास के रूप में किया जाएगा तो भविष्य में सरकारी अधिकारियों एवं विशिष्ट अतिथियों के ठहरने की व्यवस्था प्रभावित होगी। ऐसे में जिला परिषद को अपने निर्णय पर पुनर्विचार करना चाहिए। डाक बंगला को उसके मूल उद्देश्य के अनुरूप संचालित करना चाहिए। हेंब्रम ने कहा कि यदि डाक बंगला को जल्द ही मजदूरों से खाली नहीं कराया गया, और उसे उसके मूल उद्देश्य के अनुरूप उपयोग में नहीं लाया गया, तो आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस मामले में वे उपायुक्त से मिलकर जांच एवं आवश्यक कार्रवाई की मांग करेंगे। इधर, उप विकास आयुक्त रीना हांसदा ने कहा है कि जिला परिषद की परिसंपत्तियों से राजस्व अर्जित करने के उद्देश्य से डाक बंगला का बंदोबस्त किया गया है। यदि डाक बंगला में किसी प्रकार की कानून-व्यवस्था या अन्य गंभीर समस्या उत्पन्न होती है तो जिला प्रशासन नियमानुसार कार्रवाई करेगा।


