Sunday, August 2, 2026

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उसरी नदी बचाने सड़क पर उतरे हजारों ग्रामीण:गिरिडीह के बालमुकुंद स्पंज आयरन फैक्ट्री को पानी देने पर बवाल, दी आंदोलन की चेतावनी


गिरिडीह में रविवार को उसरी नदी से बालमुकुंद स्पंज आयरन फैक्ट्री को पाइपलाइन के माध्यम से पानी उपलब्ध कराने के प्रस्ताव के खिलाफ हजारों ग्रामीण सड़क पर उतर आए। पूर्वांचल क्षेत्र में कई किलोमीटर लंबी मानव श्रृंखला बनाकर लोगों ने जोरदार विरोध दर्ज कराया। यह मानव श्रृंखला गंगापुर उसरी फॉल मोड़ से शुरू होकर डांडीडीह, वनांचल कॉलेज, हरसिंगरायडीह होते हुए शहर के विभिन्न हिस्सों तक फैली रही। प्रदर्शन में बच्चे, युवा, महिलाएं, बुजुर्ग और दिव्यांग भी बड़ी संख्या में शामिल हुए। हाथों में बैनर और तख्तियां लिए लोगों ने एकजुट होकर सरकार से प्रस्ताव को तत्काल रद्द करने की मांग की। पूरे इलाके में घंटों तक विरोध का माहौल बना रहा और प्रशासन की नजर इस पर टिकी रही। आंदोलन से जुड़ी तस्वीरें देखें… जल संकट और पर्यावरण खतरे की आशंका आंदोलनकारियों का कहना है कि उसरी नदी पूरे क्षेत्र की जीवनरेखा है। इसी पर हजारों लोगों की आजीविका निर्भर करती है। नदी का पानी पेयजल, सिंचाई, पशुपालन सहित कई जरूरतों को पूरा करता है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि यदि निजी फैक्ट्री को बड़े पैमाने पर पानी दिया गया तो भविष्य में जलस्तर गिर सकता है। क्षेत्र में गंभीर जल संकट उत्पन्न हो सकता है। साथ ही फैक्ट्री से होने वाले संभावित प्रदूषण को लेकर भी लोगों ने चिंता जताई। उनका कहना है कि इससे पर्यावरण को नुकसान पहुंचेगा और स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल असर पड़ सकता है। ग्रामीणों ने साफ कहा कि उसरी नदी केवल पानी का स्रोत नहीं, बल्कि क्षेत्र की पहचान और जीवन का आधार है। आंदोलन तेज करने की चेतावनी इस विरोध प्रदर्शन में विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी हिस्सा लिया और एक स्वर में नदी को बचाने की मांग की। माले नेता राजेश सिन्हा, भाजपा नेता रंजीत राय, झामुमो नेता पूजा महतो, जेएलकेएम के नगेंद्र चंद्रवंशी और फॉरवर्ड ब्लॉक के राजेश यादव समेत कई नेताओं ने आंदोलनकारियों का समर्थन किया। सभी ने सरकार से प्रस्ताव वापस लेने की मांग करते हुए कहा कि जनभावनाओं की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। चरणबद्ध तरीके से धरना, प्रदर्शन और जनआंदोलन तेज किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार और प्रशासन की होगी। ग्रामीणों ने इसे आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की लड़ाई बताते हुए हर स्तर पर संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया।

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