Monday, August 3, 2026

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गैंगस्टर सुजीत सिन्हा एनकाउंटर; दो दशक का आतंक खत्म:पलामू में मामूली विवाद में की थी पहली हत्या, उम्र से दोगुना केस हैं उसपर दर्ज


पलामू में रविवार देर रात जैसे ही कुख्यात गैंगस्टर सुजीत सिन्हा के पुलिस मुठभेड़ में मारे जाने की खबर फैली, पूरे जिले में सनसनी फैल गई। करीब 20 साल तक अपराध की दुनिया में सक्रिय रहे 42 वर्षीय सुजीत का नाम लोगों के लिए खौफ का दूसरा नाम बन चुका था। उसकी उम्र से भी दोगुने केस उसके खिलाफ दर्ज थे। जिनमें हत्या, रंगदारी, बमबाजी और टेंडर विवाद जैसे संगीन अपराध शामिल थे। अकेले पलामू में ही उस पर 40 से ज्यादा मामले दर्ज थे। हर बड़ी वारदात के बाद पुलिस की गाड़ियां उसके घर के बाहर नजर आती थीं और यही कारण था कि धीरे-धीरे उसका परिवार भी उससे दूर होता चला गया। कभी जिस घर में वह रहता था, वही घर पुलिस की छापेमारी का केंद्र बन गया और अंततः उसके अपने ही लोग उससे किनारा कर गए। अपराध की जिंदगी ने मां, भाई और बहन से किया दूर पलामू जिले के हुसैनाबाद थाना क्षेत्र के पथरा गांव का रहने वाला सुजीत बाद में मेदिनीनगर के श्रीराम पथ इलाके में बस गया था, लेकिन उसका बढ़ता अपराध परिवार पर भारी पड़ने लगा। लगातार छापेमारी और पूछताछ से परेशान होकर उसकी मां, भाई और बहन ने मेदिनीनगर छोड़ दिया और रायपुर में जाकर रहने लगे। उसकी पत्नी रिया सिन्हा भी आपराधिक मामलों में जेल में बंद है। इस तरह सुजीत का निजी जीवन पूरी तरह बिखर गया था। वह अकेला पड़ता गया और अपराध ही उसकी पहचान बन गया। पुलिस रिकॉर्ड में उसका नाम एक ऐसे अपराधी के तौर पर दर्ज था, जिसने डर के जरिए अपना वर्चस्व कायम किया। इलाके के व्यवसायियों से लेकर जनप्रतिनिधियों तक को निशाना बनाया। 2005 की पहली हत्या से शुरू हुआ सफर सुजीत सिन्हा के अपराध की शुरुआत 2005 में हुई। उसने सेवा सदन इलाके में एक मामूली विवाद के बाद उसने रिक्शा चालक कृष्णा साव की सरेआम गोली मारकर हत्या कर दी थी। यह घटना उसके अपराधी बनने की पहली सीढ़ी साबित हुई। इसके बाद उसने रंगदारी का नेटवर्क खड़ा किया। दिनदहाड़े बमबाजी जैसी वारदातों को अंजाम देकर इलाके में दहशत फैला दी। साल 2007 में मेदिनीनगर के कांदु मुहल्ले में टेंडर विवाद के दौरान दो सगे भाइयों की हत्या ने उसे अपराध जगत में कुख्यात बना दिया। इस दोहरे हत्याकांड के बाद उसे आजीवन कारावास की सजा भी सुनाई गई, लेकिन उसके नेटवर्क का खात्मा नहीं हुआ। समय के साथ वह पलामू के सबसे खतरनाक गैंगस्टरों में गिना जाने लगा, जिसकी दहशत अब उसकी मौत के साथ खत्म हो गई।

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