Monday, August 3, 2026

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गैंगस्टर सुजीत सिन्हा का एनकाउंटर मामला:प्रिंस खान के गिरोह की टूटी "रीढ़''‎, सुजीत की मां को भेजता था रंगदारी में वसूली ‎गई राशि


‎गैंगस्टर सुजीत‎‎ सिन्हा रविवार की ‎‎रात जामताड़ा में‎‎ एनकाउंटर में मारा ‎‎गया। यह उसके ‎‎गैंग के साथ-साथ‎‎ वासेपुर के भगोड़े ‎प्रिंस खान के गिरोह के लिए भी बड़ा‎ झटका है। दोनों गिरोहों का सिंडिकेट पिछले काफी समय से पूरे झारखंड‎में आतंक फैला रहा है। रांची पुलिस द्वारा सुजीत सिन्हा और प्रिंस खान गैंग से जुड़े अपराधियों/शूटरों को‎ गिरफ्तार किए जाने के बाद यह बात सामने आई थी। इसमें प्रिंस धनबाद और‎ रांची के व्यवसायियों, जमीन कारोबारियों व ठेकेदारों को धमकाकर रंगदारी ‎वसूलता था। सुजीत सिन्हा की मदद के बदले उसके परिवार को नियमित रूप से‎ वित्तीय सहायता पहुंचाता था। पूछताछ में गुर्गों ने स्वीकार किया था कि रंगदारी के ‎पैसे का एक बड़ा हिस्सा प्रिंस खान द्वारा सुजीत की मां के खाते में या स्थानीय ‎हवाला नेटवर्क के जरिए पहुंचाया जाता था। वहीं, सुजीत के रेकी और फायरिंग‎ करने वाले गुर्गे, जो घटना को अंजाम देते थे। उन्हें भी खर्च देता था। सुजीत ‎सिन्हा का केस (वकील की फीस) लड़ने, जेल के भीतर सुविधाएं जुटाने और‎ उसके परिवार के खर्च को चलाने के लिए प्रिंस खान सुजीत की मां तक यह‎ रकम भिजवाता था। सुजीत गैंग के शूटर प्रिंस खान के लिए काम करते रहें इसके‎लिए प्रिंस खान सुजीत के परिवार की आर्थिक देखभाल सुनिश्चित करता था।‎ दूसरे ‎जिलों में गैंग खड़ा करने के लिए ‎सुजीत सिंह से हाथ मिलाया था
प्रिंस दुबई‎ और फिर पाकिस्तान से डिजिटल ‎माध्यमों से खौफ पैदा कर रहा है, तो ‎सुजीत जेल में रहते हुए भी अपने ‎नेटवर्क से जरिए वारदातों को ‎अंजाम दिला रहा था। प्रिंस ने धनबाद ‎में नेटवर्क कमजोर होने पर दूसरे ‎जिलों में गैंग खड़ा करने के लिए ‎सुजीत सिंह से हाथ मिला लिया था।‎ उसके साथ मिलकर रांची, पलामू,‎ हजारीबाग, जमशेदपुर और ‎हजारीबाग में कारोबारियों को रंगदारी‎ के लिए धमका रहा था और फायरिंग‎ भी करा रहा था। झारखंड पुलिस‎और एटीएस की जांच में दोनों गिरोहों ‎के बीच गहरी साठ-गांठ और‎एक-दूसरे के संसाधनों के इस्तेमाल ‎का खुलासा हुआ था। कई बार‎ वारदातों की जिम्मेदारी लेने के लिए‎ दोनों गैंग अलग-अलग नामों का ‎सहारा लेते थे।‎ हवाला से मनी ट्रांसफर, हथियार खरीदने में भी इस्तेमाल‎
झारखंड में सुजीत सिन्हा गैंग के गुर्गों और स्थानीय हवाला ऑपरेटरों के ‎जरिए रंगदारी की रकम प्रिंस खान तक पहुंचाई जाती थी। प्रिंस उस पैसे का ‎एक हिस्सा विदेश में अपने सुरक्षित ठिकाने के लिए रखता था और बाकी ‎रुपए हथियार खरीदने, सुजीत गैंग के गुर्गों को पेमेंट करने के लिए दे देता ‎था। प्रिंस रंगदारी का पैसा सुजीत के रिश्तेदारों को भी भेजता था।‎ रांची, लातेहार, रामगढ़, पलामू , हजारीबाग में दोनों पर एक साथ केस‎
राज्य के आतंकवाद निरोधी दस्ते और जिला पुलिस‎की जांच के अनुसार, सुजीत और प्रिंस के खिलाफ‎ एक साथ कई मुकदमे दर्ज हैं। रांची के होटल में ‎फायरिंग मामले में दोनों के नाम एक साथ आए थे। दोनों गैंग के गुर्गें भी पकड़े गए थे। लातेहार के‎ ट्रांसपोर्टरों और क्रशर मालिकों के ठिकानों पर‎ सुजीत-प्रिंस के नाम वाले साझा पर्चे फेंककर रंगदारी ‎मांगने और रुपए नहीं देने पर गाड़ियों में आग लगाने ‎का केस दर्ज हुआ था। रामगढ़ और हजारीबाग में भी दोनों के गुर्गों रंगदारी के लिए वाहनों में आग लगा ‎दी थी। पलामू में भी दोनों के खिलाफ केस दर्ज हैं।‎ कोयलांचल शांति सेना और साझा नाम से धमकी‎
प्रिंस खान का मुख्य प्रभाव क्षेत्र धनबाद था, जबकि सुजीत गैंग रांची, पलामू‎और लातेहार में मजबूत था। प्रिंस ने सुजीत के गुर्गों की मदद से कोयलांचल ‎शांति सेना या साझा नाम से रांची और आसपास के बड़े व्यवसायियों, ‎ठेकेदारों तथा बिल्डरों को धमकाकर रंगदारी मांगना शुरू किया था। सुजीत‎ के गुर्गे सामने से व्यवसायियों को डराते थे और प्रिंस विदेश से इंटरनेट‎कॉलिंग/वर्चुअल नंबरों से धमकी भरे फोन कॉल या ऑडियो/वीडियो मैसेज ‎भेजकर दबाव बनाता था।‎

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