![]()
जमशेदपुर के बर्मामाइंस थाना क्षेत्र में कंटेनर यार्ड गोलीकांड में गंभीर रूप से घायल आफताब आलम की तड़के कोलकाता के एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। उनकी मौत की खबर जैसे ही परिजनों और स्थानीय लोगों को मिली, इलाके में आक्रोश फैल गया। बड़ी संख्या में लोग बर्मामाइंस थाना पहुंच गए और पुलिस के खिलाफ नारेबाजी करते हुए घेराव कर दिया। लोगों का कहना था कि घटना के कई दिन बीत जाने के बावजूद आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हो पाई, जिससे आक्रोश और बढ़ गया। टायर जलाकर किया विरोध प्रदर्शन प्रदर्शन कर रहे लोगों ने इसके बाद मुख्य सड़क पर उतरकर थाना के समीप जाम लगा दिया। आक्रोशित भीड़ ने बीच सड़क पर टायर जलाकर विरोध जताया और दोषियों की जल्द गिरफ्तारी की मांग की। स्थिति को देखते हुए मौके पर अतिरिक्त पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारी पहुंचे। अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को समझाने का प्रयास किया और जल्द कार्रवाई का आश्वासन दिया। हालांकि, कुछ समय तक इलाके में तनावपूर्ण स्थिति बनी रही। आवागमन पूरी तरह प्रभावित रहा। 2 अगस्त की रात हुई थी ताबड़तोड़ फायरिंग बर्मामाइंस थाना प्रभारी सरजू आनंद ने बताया कि 2 अगस्त की रात आफताब आलम अपने साथियों के साथ कंटेनर यार्ड में बैठे थे। इसी दौरान बाइक पर सवार करीब छह हमलावर वहां पहुंचे और अचानक ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। इस हमले में आफताब को छह गोलियां लगी थीं, जिससे उनकी पीठ और पैर में गंभीर चोटें आई थीं। घटना के बाद उन्हें तत्काल टाटा मेन हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया, लेकिन हालत बिगड़ने पर बेहतर इलाज के लिए कोलकाता रेफर कर दिया गया था। 11 नामजद आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज आरोप है कि इस हमले के पीछे नशे के कारोबार से जुड़े लोगों का हाथ हो सकता है। बताया जा रहा है कि वारदात से एक दिन पहले आफताब नशा मुक्ति रैली में भी शामिल हुए थे। हालांकि, पुलिस ने अभी तक इस एंगल की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। सभी पहलुओं से जांच की जा रही है। इस मामले में पुलिस ने 11 नामजद आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है, जिनमें शहनवाज उर्फ भोंदू समेत अन्य शामिल हैं।

