7 महीने बाद FII की एंट्री, ये कारण तय करेंगे कितना दिन रुकेंगे विदेशी निवेशक

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7 महीने बाद FII की एंट्री, ये कारण तय करेंगे कितना दिन रुकेंगे विदेशी निवेशक

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करीब सात महीने तक लगातार बिकवाली करने के बाद विदेशी निवेशकों ने आखिरकार भारतीय शेयर बाजार में वापसी के संकेत दिए हैं. इस बदलाव की सबसे बड़ी वजह भारत और अमेरिका के बीच हुआ नया व्यापार समझौता माना जा रहा है. इस डील के बाद न सिर्फ शेयर बाजार का माहौल सुधरा है, बल्कि रुपये को भी सहारा मिला है. हालांकि, सवाल अब यह है कि क्या यह वापसी स्थायी होगी या सिर्फ कुछ समय की राहत भर?

बीते सात महीनों में विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FII ने कैश सेगमेंट में करीब 2.25 लाख करोड़ रुपये के भारतीय शेयर बेच दिए थे. लगातार बिकवाली से बाजार पर दबाव बना रहा और निवेशकों की धारणा भी कमजोर हुई. लेकिन फरवरी की शुरुआत में तस्वीर थोड़ी बदली.

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की घोषणा के ठीक अगले दिन विदेशी निवेशकों ने जोरदार खरीदारी की और एक ही दिन में हजारों करोड़ रुपये बाजार में लगाए. इससे यह संकेत मिला कि फिलहाल वे भारत को लेकर दोबारा सकारात्मक सोच बना रहे हैं. हालांकि, इसके अगले दिन उनकी खरीदारी काफी सीमित रही, जिससे साफ हुआ कि वे अभी पूरी तरह आश्वस्त नहीं हुए हैं.

बिकवाली रुकना भी एक बड़ा संकेत

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही विदेशी निवेशकों की खरीदारी अभी बहुत तेज न हो, लेकिन सबसे अहम बात यह है कि उन्होंने भारी बिकवाली रोक दी है. यह अपने आप में एक बड़ा सकारात्मक संकेत है. विशेषज्ञों के अनुसार, विदेशी निवेशक फिलहाल सतर्कता के साथ आगे बढ़ रहे हैं.

भारत-अमेरिका डील से बाजार को राहत

भारत और अमेरिका के बीच हुए व्यापार समझौते ने बाजार पर मंडरा रहे टैरिफ और नीति से जुड़े डर को काफी हद तक कम कर दिया है. इससे निवेशकों को यह भरोसा मिला है कि फिलहाल भारत पर किसी बड़े ट्रेड झटके का खतरा नहीं है. इसके अलावा इस समझौते का एक बड़ा फायदा मुद्रा बाजार में भी देखने को मिला है. रुपये में स्थिरता आई है, जो विदेशी निवेशकों के लिए बेहद अहम होती है. आमतौर पर विदेशी निवेशक तभी लंबे समय तक टिकते हैं जब उन्हें मुद्रा में ज्यादा उतार-चढ़ाव का डर न हो.

कंपनियों की कमाई तय करेगी आगे का रास्ता

आने वाले समय में विदेशी निवेशकों की असली परीक्षा भारतीय कंपनियों की कमाई होगी. जानकारों का मानना है कि अगर कंपनियों के मुनाफे में मजबूती दिखती है, तो विदेशी निवेशक लंबे समय तक बाजार में बने रह सकते हैं. अनुमान है कि कमाई में सुधार की तस्वीर चौथी तिमाही से साफ होनी शुरू होगी और वित्त वर्ष 2027 तक यह और मजबूत हो सकती है. सरकार की मजबूत वित्तीय स्थिति, घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को मिल रहा समर्थन और बड़े स्तर पर सरकारी पूंजी खर्च भी बाजार के लिए सकारात्मक आधार तैयार कर रहे हैं.

रुपये की मजबूती विदेशी निवेश को दे सकती है रफ्तार

भारतीय रुपये की चाल भी विदेशी निवेश के फैसले में बड़ी भूमिका निभाती है. जब रुपया मजबूत होता है, तो डॉलर के मुकाबले विदेशी निवेशकों को बेहतर रिटर्न मिलता है. अगर आने वाले महीनों में रुपया और मजबूत होता है, तो यह विदेशी निवेश को और आकर्षित कर सकता है. खासकर तब, जब निर्यातक विदेशों में रखे अपने डॉलर भारत वापस लाने लगें. इससे एक सकारात्मक चक्र बन सकता है, जिससे बाजार को और मजबूती मिलेगी.

ट्रंप फैक्टर बना रहेगा सबसे बड़ा जोखिम

हालांकि, तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियां और उनका अचानक बदलता रुख अभी भी एक बड़ा जोखिम माना जा रहा है. अगर अमेरिका फिर से आक्रामक व्यापार नीति अपनाता है या किसी नए विवाद को जन्म देता है, तो विदेशी निवेशकों का भरोसा एक बार फिर डगमगा सकता है. यानी फिलहाल विदेशी निवेशकों की वापसी की शुरुआत तो हुई है, लेकिन उनका लंबे समय तक टिकना कमाई रुपये और वैश्विक राजनीति इन तीनों पर निर्भर करेगा.

यह भी पढ़ें- क्या बंद होने वाला है टैक्स भरने का पुराना वाला सिस्टम? सरकार ने कर दिया साफ

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