Monday, August 10, 2026

Breaking
News

🕒

Latest
Updates

🔔

Stay
Informed

Top 5 This Week

Related Posts

आदिवासी समाज भारत की आत्मा, संस्कृति और अधिकारों की रक्षा जरूरी : डॉ. इरफान अंसारी


विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर रविवार को दुलाडीह नगर भवन में जिला स्तरीय झारखंड आदिवासी महोत्सव का आयोजन किया गया। इस दौरान अतिथियों ने भगवान बिरसा मुंडा, सिदो-कान्हू, चांद-भैरव, फूलो-झानो और दिशोम गुरु पद्म भूषण स्व. शिबू सोरेन के तैलचित्र पर श्रद्धासुमन अर्पित किए। कार्यक्रम में जिला प्रशासन के अधिकारी भी पारंपरिक आदिवासी परिधान में नजर आए। कार्यक्रम का शुभारंभ स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी, उपायुक्त आलोक कुमार, पुलिस अधीक्षक शम्भू कुमार सिंह, वन प्रमंडल पदाधिकारी राहुल कुमार, जिला परिषद अध्यक्ष दीपिका बेसरा, उप विकास आयुक्त असीम किस्पोट्टा और परियोजना निदेशक आईटीडीए जुगनू मिंज सहित अन्य अतिथियों ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस केवल उत्सव मनाने का अवसर नहीं, बल्कि आदिवासी समाज के इतिहास, पहचान, संस्कृति, भाषा, परंपरा और अधिकारों को याद करने का दिन है। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज केवल आंकड़ा नहीं, बल्कि भारत की आत्मा है। झारखंड की धरती ने भगवान बिरसा मुंडा और सिदो-कान्हू जैसे महान जननायकों को जन्म दिया, जिन्होंने जल, जंगल और जमीन के अधिकार के लिए संघर्ष किया।एसपी शम्भू कुमार सिंह ने कहा कि आदिवासी समाज की प्रकृति के साथ सामंजस्यपूर्ण जीवनशैली पूरे विश्व के लिए अनुकरणीय है। जल, जंगल और जमीन आदिवासी जीवन, संस्कृति और सभ्यता का अभिन्न हिस्सा हैं। कार्यक्रम में विभिन्न विद्यालयों के बच्चों और कलाकारों ने गीत, नृत्य और अन्य सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर जल, जंगल और जमीन के संरक्षण का संदेश दिया। कृषि, मत्स्य, समाज कल्याण और जेएसएलपीएस सहित विभिन्न विभागों ने आकर्षक स्टॉल लगाए। अतिथियों ने 05 सामुदायिक वन पट्टों का वितरण किया। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले कलाकारों और बेहतर स्टॉल लगाने वाले विभागों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।उपायुक्त आलोक कुमार ने कहा कि आदिवासी समाज की संस्कृति और परंपरा सभी के लिए प्रेरणादायक है। भगवान बिरसा मुंडा सहित महान जननायकों के संघर्ष से हमें साहस और अधिकारों के प्रति जागरूक रहने की सीख मिलती है। उन्होंने युवाओं से शिक्षा, तकनीक, कौशल प्रशिक्षण और रोजगार के अवसरों का लाभ उठाने के साथ अपनी संस्कृति और पहचान को संरक्षित रखने की अपील की। उन्होंने महिला सशक्तीकरण और ग्रामीण महिलाओं के पारंपरिक कौशल को आजीविका से जोड़ने पर भी जोर दिया। साथ ही जल, जंगल और जमीन तथा पर्यावरण संरक्षण के लिए सामूहिक संकल्प लेने का आह्वान किया।

Spread the love

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Popular Articles