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झारखंड में छात्र आंदोलन का आज यानी शनिवार को 22वां दिन है। छात्र आज सुबह 11 बजे तिरंगा यात्रा निकालेंगे। आंदोलनरत छात्रों का दावा है कि तिरंगा यात्रा में राज्यभर से करीब पांच हजार स्टूडेंट्स शामिल होंगे। तिरंगा यात्रा जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम से कचहरी चौक, न्यूक्लियस मॉल (लालपुर), फिरायालाल चौक से वापस स्टेडियम पहुंचेगी। बताते चलें पांच छात्र अब भी भूख हड़ताल कर रहे हैं। उनकी नियमित मेडिकल जांच भी हो रही है। वहीं, शुक्रवार की शाम आंदोलनकारी छात्रों ने जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम से अल्बर्ट एक्का चौक तक मार्च किया। इस दौरान छात्रों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। अल्बर्ट एक्का चौक पर छात्रों ने मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू, डॉ. इरफान अंसारी, शिल्पी नेहा तिर्की, दीपिका पांडेय सिंह और JSSC के सचिव सुधीर गुप्ता का पुतला फूंका। छात्रों से मिले एसडीएम और एडीएम इससे पहले रांची सदर एसडीएम कुमार रजत और एडीएम धनंजय कुमार जयपाल सिंह स्टेडियम पहुंचे और आंदोलनरत छात्रों से बातचीत की। एडीएम धनंजय कुमार ने कहा कि हमलोग छात्रों का हालचाल लेने के लिए आते रहते हैं। हमलोगों ने छात्रों से पूछा कोई दिक्कत तो नहीं है। इस पर छात्रों ने कहा- सब ठीक है। भूख हड़ताल कर रहे छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने अस्पताल से वीडियो जारी कर कहा- “आंदोलन की दिशा को भटकाने की कोशिशें की जा रही हैं। इस आंदोलन की वजह से आज एक जांच समिति बनाई गई है। सरकार भी हमारी बातों को सकारात्मक रूप से सुन रही है, लेकिन पूरा न्याय अभी बाकी है। हालात चाहे जैसे भी हों, आंदोलन को बचाए रखें और एकजुट रहें।” वहीं, छात्र नेता रवींद्र पासवान ने कहा कि सोशल मीडिया के जरिए हमने मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की का एक बयान देखा। उन्होंने कहा कि सरकार के साथ बातचीत के लिए हमारे प्रतिनिधिमंडल में शामिल कोई भी व्यक्ति छात्र नहीं था। मैं इस बयान का पुरजोर खंडन करता हूं और पूरी जिम्मेदारी के साथ कहता हूं कि जो भी लोग गए थे, वे सभी छात्र थे। हमारे बयान को गलत तरीके से पेश किया जा रहा: मंत्री इधर, झारखंड सरकार की मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा, “JPSC-JSSC रिफॉर्म फोरम की तरफ से हमारे बारे में एक बयान जारी किया गया। मुझे लगता है कि रवींद्र पासवान ने हमारे बयान को ठीक से नहीं समझा। हमने सोशल मीडिया पर भी देखा है कि हमारे बयान को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। 12 तारीख को जब हम सदर अस्पताल में भूख हड़ताल कर रहे बीमार लोगों से मिलने गए, तो वहां बातचीत में उन्होंने जो कुछ भी कहा, हमने उसे मीडिया के सामने रखा। मैं एक बार फिर दोहराती हूं कि 12 तारीख को मीडिया को दिए गए मेरे बयान में यह साफ था कि सरकार के प्रतिनिधिमंडल से मिलने गए छात्र-छात्राओं के दल में भूख हड़ताल करने वाला एक भी छात्र शामिल नहीं था। हमारी चिंता यही है कि अगर भूख हड़ताल पर बैठे छात्र उस दल का हिस्सा होते, तो सरकार कम से कम उनसे बातचीत करती और उनका अनशन तुड़वाती, जिससे उनकी सेहत में सुधार होता। लेकिन उन्हें उस दल में शामिल नहीं किया गया। कम से कम सरकार को भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों से बातचीत करने का मौका तो मिलता। इस बयान को इस तरह पेश किया गया है जैसे हमने कहा हो कि ‘दल में कोई छात्र नहीं था।’ मैं इसका खंडन करती हूं।” एक छात्र ने अनशन तोड़ा, AISA का पंडाल हटा वहीं, 10 दिन से भूख हड़ताल पर बैठे महेंद्र प्रसाद मंडल ने गुरुवार को विधायक जयराम महतो के समझाने पर अनशन तोड़ दी है। बाकी 5 छात्रों की भूख हड़ताल जारी है। आइसा का पंडाल स्टेडियम के बाहर से हटा लिया गया है। आइसा के सदस्य विजय कुमार ने कहा कि 10 अगस्त को विधानसभा घेराव को लेकर बड़ी संख्या में बाहर से आने वाले लोगों को ठहराने की व्यवस्था के लिए यह पंडाल बनाया गया था। दूसरी ओर, प्रदर्शनकारियों ने 10 अगस्त को विधानसभा घेराव किया था। इसके बाद 500 प्रदर्शनकारियों पर FIR दर्ज की गई। फिजिक्स वाला के संस्थापक अलख पांडेय ने गुरुवार की रात जेपीएसएसी-जेएसएससी रिफॉर्म मंच कर भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों से मुलाकात की। उन्होंने आंदोलनरत छात्रों का हालचाल जाना और उनकी मांगों को सुनते हुए अपना नैतिक समर्थन जताया। उन्होंने कहा- “यहां बहुत से छात्र बहुत परेशान हैं। कई छात्र भूख हड़ताल पर बैठे हैं और कुछ की तबीयत बिगड़ने के कारण उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा है। इन परीक्षाओं में गड़बड़ी के आरोप लगे हैं, लेकिन सरकार पर्याप्त कार्रवाई नहीं कर रही है। कुछ परिवार और लोग ऐसे हैं जो प्रश्न-पत्र लीक करते हैं और उन्हें बांटते हैं। परीक्षा के बाद अब ऐसा लगने लगा है कि हम नतीजों का इंतजार नहीं कर रहे हैं, हम बस इस खबर का इंतजार कर रहे हैं कि पेपर किसने लीक किया और किसका चयन हुआ। सरकार ने JPSC परीक्षा में कार्रवाई की है, जो एक स्वागत योग्य कदम है और मैं इसके लिए उन्हें धन्यवाद देना चाहता हूं। लेकिन उन्हें JSSC मामले में भी ठोस कार्रवाई करने की ज़रूरत है। 1,900 सीटों में से, कथित तौर पर लगभग 400 सीटें एक ही परिवार या ऐसे व्यक्ति द्वारा हथिया ली गई हैं जो सीटें बेचने में शामिल है। छात्र CID जांच से संतुष्ट नहीं हैं। उनकी मांग है कि निष्पक्ष CBI जांच हो ताकि इसमें शामिल लोगों की पहचान हो सके और उन्हें सज़ा मिल सके…”
