![]()
भागलपुर के विक्रमशिला पुल पर बने अस्थायी बेली ब्रिज को 28 अगस्त से हटा दिया जाएगा। इसके बाद 29 अगस्त से स्थायी मरम्मत शुरू किया जाएगा। बिहार सरकार के फैसले पर बिहपुर विधानसभा क्षेत्र की पूर्व प्रत्याशी और विकासशील इंसान पार्टी की नेता अर्पणा कुमारी ने सवाल उठाए हैं। शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर उन्होंने कहा कि बेली ब्रिज हटने के बाद भागलपुर समेत पूर्वी बिहार और सीमांचल के बीच सड़क संपर्क एक बार फिर प्रभावित होगा। इसका सीधा असर रोजाना आवागमन करने वाले लोगों, व्यापारियों, नौकरीपेशा लोगों और मालवाहक वाहनों पर पड़ेगा। अपर्णा बोलीं- दुर्गापूजा, दिवाली और छठ में कारोबार पर असर पड़ेगा अर्पणा कुमारी ने कहा कि गंगा का जलस्तर बढ़ा हुआ है और आने वाले दिनों में बारिश का दौर भी जारी रह सकता है। ऐसे समय में विक्रमशिला सेतु को पूरी तरह बंद करने से लोगों की परेशानी बढ़ सकती है। उन्होंने कहा कि आगे दुर्गापूजा और छठ जैसे बड़े पर्व हैं। पर्व के दौरान दूसरे जिलों से भागलपुर और भागलपुर से सीमांचल की ओर बड़ी संख्या में लोगों का आवागमन होता है। ऐसे में सड़क संपर्क बाधित होने का असर आम लोगों के साथ-साथ कारोबार पर भी पड़ेगा। ‘बेली ब्रिज को बनाने, उसे हटाने में कितनी राशि खर्च हुई, सरकार जानकारी दे’ अपर्णा ने सवाल उठाया कि बिहार सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि बेली ब्रिज निर्माण और उसे हटाने में कुल कितनी राशि खर्च हुई और कितने दिनों तक इसका उपयोग किया गया। हालांकि उपलब्ध सरकारी दस्तावेजों में विक्रमशिला सेतु पर बेली ब्रिज, नए सस्पेंडेड स्लैब और पूरे सेतु की मरम्मत-पुनर्स्थापन के लिए कुल 126.25 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति दर्ज है, इसलिए बेली ब्रिज की अलग लागत के रूप में 28 करोड़ रुपये के दावे की पुष्टि जरूरी है। अर्पणा कुमारी ने कहा कि बेली ब्रिज हटने के बाद लोगों को वैकल्पिक मार्गों और जल परिवहन पर निर्भर होना पड़ सकता है। गंगा के बढ़े जलस्तर के बीच नाव या स्टीमर से आवागमन में सुरक्षा सबसे बड़ी चुनौती होगी। उन्होंने सरकार से मांग की कि बेली ब्रिज हटाने से पहले वैकल्पिक यातायात व्यवस्था, डायवर्जन, नाव-स्टीमर परिचालन और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएं। उन्होंने ये भी कहा कि मुख्यमंत्री ने मई में विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त हिस्से को तीन महीने के अंदर पुनर्स्थापित करने और इसी अवधि में पूरे पुल की मरम्मत कराने का निर्देश दिया था। साथ ही लोगों के लिए तत्काल वैकल्पिक यातायात व्यवस्था और स्टीमर परिचालन में सुरक्षा मानकों पर निगरानी के निर्देश दिए गए थे।
अब जानिए विक्रमशिला ब्रिज के एक हिस्से के टूटने के बाद कब क्या हुआ? 3 मई 2026 : रात करीब 12:50 बजे विक्रमशिला सेतु के पिलर संख्या 133 के पास करीब 34 मीटर का स्लैब टूटकर गंगा में गिर गया। प्रशासन ने तत्काल पुल पर वाहनों का परिचालन रोक दिया। समय रहते यातायात रोक दिए जाने से बड़ा हादसा टल गया। 4-5 मई 2026: पुल बंद होने के बाद भागलपुर का नवगछिया, कोसी और सीमांचल क्षेत्र से सड़क संपर्क प्रभावित हो गया। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 5 मई को क्षतिग्रस्त हिस्से का हवाई सर्वेक्षण किया और तीन महीने के भीतर पुनर्स्थापन तथा पूरे पुल की मरम्मत का निर्देश दिया। मई का पहला-दूसरा सप्ताह: पुल बंद रहने के कारण यात्रियों को वैकल्पिक मार्गों का सहारा लेना पड़ा। प्रशासन ने जल परिवहन और अन्य रास्तों से संपर्क बहाल करने की कोशिश शुरू की। मुख्यमंत्री ने बाद में पुल पर आवागमन सामान्य होने तक आम लोगों के लिए नाव सेवा निशुल्क रखने की बात भी कही। मई के अंत तक: सीमा सड़क संगठन यानी बीआरओ की टीम ने क्षतिग्रस्त हिस्से पर बेली ब्रिज तैयार करने का काम तेज किया। 29 मई तक तीसरा बेली ब्रिज भी तैयार होने की जानकारी सामने आई और छोटे वाहनों के परिचालन की तैयारी पूरी कर ली गई। 7 जून: चार अस्थायी बेली ब्रिज तैयार होने के बाद विक्रमशिला सेतु पर सीमित रूप से छोटे वाहनों का परिचालन शुरू किया गया। वाहनों के परिचालन के लिए वन-वे व्यवस्था रखी गई और भारी वाहनों पर रोक जारी रही। जून-जुलाई: बेली ब्रिज के सहारे सीमित आवागमन जारी रहा। इसी दौरान पूरे विक्रमशिला सेतु की तकनीकी जांच और स्थायी पुनर्स्थापन की तैयारी की गई। बाद में स्थायी मरम्मत के लिए एजेंसी का चयन किया गया। 28 अगस्त: तय कार्यक्रम के अनुसार स्थायी पुनर्स्थापन कार्य शुरू किया जाना है। इसके पहले चारों अस्थायी बेली ब्रिज हटाए जाएंगे और विक्रमशिला सेतु पर सभी वाहनों का परिचालन बंद रहेगा। करीब 98 करोड़ रुपये की स्थायी मरम्मत परियोजना के तहत क्षतिग्रस्त हिस्से में नया स्लैब समेत अन्य तकनीकी कार्य किए जाने हैं। सरकार ने 30 नवंबर 2026 तक पुल को सभी वाहनों के लिए फिर से खोलने का लक्ष्य रखा है।
