![]()
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी स्थित SSB मुख्यालय रानीडांगा में सीमा सुरक्षा को लेकर केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। इस दौरान उन्होंने SSB की 19वीं वाहिनी मुख्यालय किशनगंज के ठाकुरगंज के आवासीय और गैर-आवासीय भवनों की परियोजनाओं का भी शिलान्यास किया। इस परियोजना पर 75 करोड़ 15 लाख रुपए खर्च किए जाएंगे। इसके अलावा 12वीं वाहिनी के लिए 65 करोड़ 65 लाख रुपए की आधारभूत संरचना परियोजना की भी शुरुआत की गई। एसएसबी मुख्यालय रानीडांगा में अपने संबोधन में गृहमंत्री ने कहा, जब तक सीमाएं सुरक्षित नहीं होंगी, तब तक न तो पश्चिम बंगाल और न ही भारत सुरक्षित रह सकता है। गृह मंत्री ने सीमा पर तैनात जवानों की भूमिका को देश की सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए कहा, सरकार सुरक्षा बलों और उनके परिवारों की सुविधाओं को लगातार बेहतर कर रही है। शाह ने कहा कि सिलीगुड़ी कॉरिडोर 8 राज्यों और 3 देशों से जुड़ा है। इसकी सुरक्षा सीधे देश की सुरक्षा से जुड़ी हुई है। मोदी सरकार इसे त्रिकोणीय सुरक्षा ग्रिड के जरिए अभेद्य बनाने की दिशा में काम कर रही है। ‘सीमा सुरक्षित नहीं तो बंगाल भी सुरक्षित नहीं’ गृह मंत्री ने कहा कि भारत की सुरक्षा का पहला आधार उसकी सीमाओं की सुरक्षा है। सीमा पर तैनात जवान न केवल बाहरी खतरों से देश की रक्षा करते हैं, बल्कि घुसपैठ, तस्करी और अन्य अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल की भौगोलिक स्थिति इसे राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण बनाती है। राज्य की सीमाएं कई संवेदनशील क्षेत्रों से जुड़ी हैं। ऐसे में सीमा सुरक्षा को मजबूत करना सिर्फ सुरक्षा बलों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे देश की प्राथमिकता है। शाह ने कहा कि ‘जब तक देश की सीमाएं सुरक्षित नहीं होंगी, तब तक न पश्चिम बंगाल सुरक्षित रह सकता है और न भारत।’ ठाकुरगंज की 19वीं वाहिनी को मिलेंगी नई सुविधाएं रानीडांगा में हुए कार्यक्रम का एक बड़ा हिस्सा SSB की आधारभूत संरचना को मजबूत करने से जुड़ा रहा। ठाकुरगंज स्थित 19वीं वाहिनी के लिए बनने वाले आवासीय और गैर-आवासीय भवनों से जवानों और उनके परिवारों को बेहतर सुविधाएं मिलने की उम्मीद है। गृह मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार का प्रयास है कि सीमा पर तैनात जवानों को मॉडर्न वर्किंग एनवायरनमेंट मिले। इसके साथ ही उनके परिवारों के लिए आवास, कार्यालय और दूसरी जरूरी सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कठिन और संवेदनशील इलाकों में ड्यूटी करने वाले जवानों का मनोबल तभी मजबूत रहेगा, जब उन्हें बेहतर सुविधाएं और सुरक्षित वातावरण मिलेगा। घुसपैठ रोकने पर सबसे ज्यादा जोर अमित शाह ने पश्चिम बंगाल में अवैध घुसपैठ को लेकर भी सख्त रुख दिखाया। उन्होंने कहा कि राज्य की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अवैध घुसपैठ पर प्रभावी रोक जरूरी है। इसके लिए सीमा सुरक्षा बलों और SSB को आधुनिक संसाधनों से लैस करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि सीमा सुरक्षा को मजबूत किए बिना देश की आंतरिक सुरक्षा को मजबूत नहीं किया जा सकता। सीमा से जुड़ी चुनौतियों का मुकाबला करने के लिए सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय और आधुनिक आधारभूत ढांचे की जरूरत है। गृह मंत्री ने पश्चिम बंगाल में BSF और SSB को 1,129 एकड़ जमीन उपलब्ध कराए जाने का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह फैसला सीमा सुरक्षा की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। ‘BSF और SSB किसी पार्टी की नहीं, देश की संस्थाएं’ अपने संबोधन में अमित शाह ने सुरक्षा बलों को राजनीति से अलग रखने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि BSF और SSB किसी राजनीतिक दल की संस्थाएं नहीं हैं, बल्कि देश की सुरक्षा के लिए काम करने वाले संगठन हैं। उन्होंने कहा कि सीमा सुरक्षा जैसे विषयों को राजनीतिक चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए। राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर सभी को एकजुट होकर काम करने की जरूरत है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में सीमा पार घुसपैठ, तस्करी और अवैध गतिविधियों को लेकर केंद्र और राज्य सरकार के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप होते रहे हैं। ‘चिकन नेक’ की सुरक्षा क्यों सबसे अहम? अमित शाह का यह दौरा सिर्फ SSB की परियोजनाओं तक सीमित नहीं है। सिलीगुड़ी कॉरिडोर यानी ‘चिकन नेक’ देश की रणनीतिक सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण क्षेत्र है। यह संकरा भू-भाग देश के पूर्वोत्तर राज्यों को शेष भारत से जोड़ता है। इसके एक तरफ नेपाल और दूसरी तरफ बांग्लादेश की सीमा नजदीक है। भूटान भी इस रणनीतिक क्षेत्र के आसपास स्थित है। यही वजह है कि इस इलाके में सीमा सुरक्षा, घुसपैठ, तस्करी और अवैध गतिविधियों पर निगरानी को राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़कर देखा जाता है। इस पूरे सुरक्षा नेटवर्क में बिहार का किशनगंज भी महत्वपूर्ण कड़ी है। किशनगंज की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि यहां से पश्चिम बंगाल, नेपाल और बांग्लादेश से जुड़े सीमा क्षेत्रों तक सुरक्षा तंत्र का असर पड़ता है। किशनगंज में भारत-नेपाल अधिकारियों की अहम बैठक इसी सुरक्षा कवायद के बीच किशनगंज के ठाकुरगंज स्थित SSB की 19वीं वाहिनी के कैंप में भारत और नेपाल के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच विशेष समन्वय समिति (BDCC) की बैठक भी हुई है। बैठक में सीमा पर होने वाली गतिविधियों, घुसपैठ, तस्करी और अवैध आवाजाही पर रोक लगाने के लिए दोनों देशों के बीच बेहतर तालमेल पर चर्चा हुई। ‘चिकन नेक’ की संवेदनशीलता को देखते हुए भारत-नेपाल सीमा पर सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय को भी अहम माना जा रहा है। ऐसे में अमित शाह का सिलीगुड़ी दौरा और ठाकुरगंज की SSB परियोजनाओं का शिलान्यास एक बड़े सुरक्षा नेटवर्क के विस्तार के तौर पर देखा जा रहा है। 80 साल की आजादी और ‘वंदे मातरम्’ का जिक्र अमित शाह ने अपने संबोधन में स्वतंत्रता के 80 वर्ष पूरे होने का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि लाल किले से पूर्ण रूप से ‘वंदे मातरम्’ का गान पूरे देश और दुनिया ने सुना। उन्होंने बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की इस रचना को स्वतंत्रता आंदोलन की भावना से जोड़ते हुए कहा कि ‘वंदे मातरम्’ ने आजादी के आंदोलन को नई दिशा देने और देशभक्ति की भावना मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। शाह के दौरे का संदेश- सीमा सुरक्षा अब सबसे ऊपर गृह मंत्री के सिलीगुड़ी दौरे में तीन बातें सबसे ज्यादा स्पष्ट हुईं- सीमा सुरक्षा, घुसपैठ पर रोक और सुरक्षा बलों का आधुनिकीकरण। SSB की नई परियोजनाओं के जरिए जवानों को बेहतर सुविधाएं देने की बात कही गई, वहीं 1,129 एकड़ जमीन उपलब्ध कराने का उल्लेख बताता है कि सीमा सुरक्षा के लिए आधारभूत ढांचे का विस्तार केंद्र की प्राथमिकताओं में है। दूसरी ओर, सिलीगुड़ी कॉरिडोर और किशनगंज जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में भारत-नेपाल समन्वय और सुरक्षा गतिविधियों को मजबूत किए जाने से साफ है कि पूर्वी भारत का यह पूरा इलाका अब सुरक्षा रणनीति के लिहाज से और अधिक महत्वपूर्ण होता जा रहा है। शाह के दौरे का सबसे बड़ा संदेश यही है- ‘चिकन नेक’ सुरक्षित तो पूर्वोत्तर का रास्ता सुरक्षित, और सीमा मजबूत तो देश की सुरक्षा मजबूत।
