Sunday, August 23, 2026

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रांची के आंगनबाड़ी केंद्रों की हालत खराब:आंगनबाड़ी केंद्रों में सावन के नाम पर अंडा किया बंद, ​सिर्फ खिचड़ी-हलवा खा रहे बच्चे


रांची के शहरी क्षेत्रों में आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थिति खराब है। रांची सदर क्षेत्र में 350 आंगनबाड़ी केंद्र हैं, लेकिन अधिकतर आंगनबाड़ी केंद्र किराए पर चल रहे हैं। करीब 10 प्रतिशत केंद्रों की स्थिति जर्जर है। केंद्र के अंदर सीलन है तो कहीं छप्पर से पानी गिर रहा है। कई सेंटरों के आसपास कचरे का ढेर है तो कहीं मवेशी बांधे जा रहे हैं। सेंटर की स्थिति तो खराब है ही, लेकिन इससे भी अधिक खराब हालत यहां आने वाले बच्चों की है। कई सेंटर में बच्चों को दिए जा रहे पोषाहार के नाम पर खानापूर्ति की जा रही है। कुछ सेंटर में सावन बताकर बच्चों को अंडा नहीं दिया जा रहा है तो कुछ सेंटरों में सिर्फ दलिया खिलाकर बच्चों को घर भेज दिया जा रहा है। वहीं, कई सेंटर ऐसे हैं जहां सिर्फ खिचड़ी खिलाई जा रही है तो कहीं हलवा, ऐसे में हमारे नौनिहाल कैसे सेहतमंद होंगे। लोअर वर्द्धमान कंपाउंड : आंगनबाड़ी केंद्र में शुक्रवार को बच्चों को कागज के टुकड़ों पर सूजी का हलवा परोसा गया सुबह करीब 11.30 बजे केंद्र में 14 बच्चे मौजूद थे। पूछने पर बच्चों ने बताया कि उनकी पढ़ाई हो चुकी है और अब खाना खाने के बाद घर जाएंगे। कुछ देर बाद आंगनबाड़ी सेविका बिरन तिर्की ने बच्चों को खाना खाने के लिए बुलाया और उन्हें कागज के टुकड़ों पर सूजी का हलवा दिया। कुछ बच्चों ने वहीं हलवा खाया, जबकि कुछ उसे साथ लेकर घर चले गए। सेविका ने बताया कि उनकी तबीयत ठीक नहीं होने के कारण शुक्रवार को खिचड़ी नहीं बनाई जा सकी। इसलिए बच्चों के लिए सूजी का हलवा तैयार किया गया। कहा कि सावन होने के कारण बच्चों को अंडा नहीं दिया जा रहा है। पहाड़ी टोला : मीडिया को देखते ही मंगाया अंडा रांची के पहाड़ी टोला स्थित आंगनबाड़ी केंद्र में शनिवार दोपहर 12.15 बजे 15 बच्चे पढ़ाई करते मिले। केंद्र में मौजूद महिला ने बताया कि पढ़ाई खत्म होने के बाद बच्चों को खाना खिलाकर घर भेज दिया जाता है। इसके कुछ ही देर बाद बच्चों को थाली में खिचड़ी परोसी गई। जब पूछा गया कि खिचड़ी के साथ बच्चों को अन्य पौष्टिक सामग्री भी दी जाती है या नहीं, तो महिला ने बताया कि अंडा भी दिया जाता है और अभी मंगाया गया है। मीडियाकर्मी की मौजूदगी के बाद आनन-फानन में अंडा मंगाया गया। उसे जैसे-तैसे उबालकर बच्चों के बीच बांट दिया गया। कुछ बच्चों ने खिचड़ी खाई, जबकि कुछ अंडा अपने साथ लेकर घर चले गए। इसी दौरान केंद्र की सेविका शाहाना परवीन भी पहुंचीं। उन्होंने कहा कि बच्चों को अंडा नहीं देंगे तो वे केंद्र आएंगे ही नहीं। हालांकि, वहां मौजूद बच्चों ने बताया कि उन्हें अंडा कभी-कभी ही मिलता है। मौसीबाड़ी : सीलन भरी दीवारों के बीच पढ़ रहे बच्चे रांची के जगन्नाथपुर मौसीबाड़ी स्थित आंगनबाड़ी केंद्र संख्या-2 में शनिवार को दोपहर करीब 11.30 बजे नौ बच्चे पढ़ाई करते मिले। यह केंद्र चट्टानों के ऊपर बना है। बच्चे जैसे-तैसे श्हां पहुंचते हैं। केंद्र में प्रवेश करते ही दीवारों की सीलन और नमी सांस नहीं लेने दे रही है। इसके बावजूद बच्चे इसी माहौल में बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं। बच्चों ने बताया कि केंद्र आने के दौरान पैरों में गंदगी लग जाती है। केंद्र की छत पर एस्बेस्टस शीट लगी है, जिससे गर्मी के दिनों में अंदर काफी गर्मी रहती है। मूलभूत सुविधाओं की कमी के बीच बच्चे रोज पढ़ने पहुंच रहे हैं। केंद्र की सहायिका अंजली ने बताया कि बच्चे नियमित रूप से आते हैं। उन्होंने माना कि केंद्र में कुछ दिक्कतें हैं, लेकिन इसी व्यवस्था में बच्चों को पढ़ाना पड़ता है। भोजन के बारे में पूछने पर उन्होंने बताया कि उस समय दलिया बन रहा था, जिसे बच्चों को दिया जाना था। अंडा भी दिया जाता है, लेकिन इसके लिए उन्हें अपनी जेब से पैसा लगाकर अंडे खरीदने पड़ते हैं। ऐसे समझिए कैसे हो रहा बच्चों की सेहत से खिलवाड़ यह रहा शुद्ध मात्राओं के साथ सही किया हुआ पाठ: अधिकतर आंगनबाड़ी केंद्र किराए पर चल रहे हैं। कम किराए की वजह से बढ़िया रूम नहीं मिलता है। इस वजह से जहां-तहां सेंटर खोलकर बच्चों को पढ़ाया जा रहा है। सरकार की ओर से हाउस रेंट का रिवाइज्ड रेट सहित पुराना किराए का पैसा भी 8 माह से नहीं दिया जा रहा है। आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों के पोषाहार के लिए भी पैसे नहीं दिए जा रहे हैं। ऑनलाइन पेमेंट सिस्टम में बदलाव होने की वजह से आठ माह से अधिकतर केंद्रों को पैसे नहीं मिले हैं। ऐसे में सेविकाओं द्वारा अपना पैसा लगाकर पोषाहार खिलाया जा रहा है। हालांकि, उन्हें भी केंद्र से मिलने वाला मानदेय नहीं मिल रहा है। पेमेंट की वजह से कुछ समस्या हुई थी, अब दिक्कत नहीं है आंगनबाड़ी केंद्रों में पेमेंट होने में दिक्कत हो रही थी, लेकिन अब यह समस्या दूर हो गई है। सभी केंद्रों में रोजाना बच्चों को अंडा दिया जाना है। पौष्टिक पोषाहार ही बच्चों को दिया जाता है, ताकि उनकी सेहत बनी रहे और वे रोजाना सेंटर तक पहुंचे। कहीं पौष्टिक आहार नहीं दिया जा रहा है तो ऐसे सेंटरों की जांच करके कार्रवाई करेंगे। जहां तक सेंटर में गड़बड़ी की बात है तो ऐसे कुछ ही सेंटर हैं जहां आधारभूत संरचना सही नहीं है। इसकी रिपोर्ट तैयार की गई है। जल्द ही सुधार होगा। -अर्चना एक्का, सीडीपीओ, सदर

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