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सावन की अंतिम सोमवारी पर भारत-नेपाल सीमा से सटे सीतामढ़ी जिले के विभिन्न शिवालयों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। सुबह से ही मंदिरों में ‘हर-हर महादेव’ और ‘बोल बम’ के जयघोष गूंजते रहे। सावन के अंतिम सोमवार को भगवान शिव की पूजा-अर्चना का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। भारत-नेपाल सीमा पर स्थित बसबिट्टा बॉर्डर क्षेत्र में भी आस्था का सैलाब देखने को मिला। यहां के बाबा सुकेश्वर धाम मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे और भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक कर पूजा-अर्चना की। सुख-समृद्धि और मनोकामना पूर्ण होने की प्रार्थना मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला जारी रहा, क्योंकि सुकेश्वर नाथ मंदिर बसबिट्टा, मेजरगंज क्षेत्र का प्रमुख शिव स्थल माना जाता है। इसके अतिरिक्त, हलेश्वर नाथ मंदिर और अनाहरी धाम सहित जिले के अन्य शिवालयों में भी श्रद्धालुओं की भीड़ देखी गई। भक्तों ने भगवान शिव को बेलपत्र, फूल, दूध और जल अर्पित कर परिवार की सुख-समृद्धि और मनोकामना पूर्ण होने की प्रार्थना की। भीड़ प्रबंधन के लिए विशेष सतर्कता कई श्रद्धालु सुबह स्नान कर पूजा की सामग्री लेकर मंदिर पहुंचे। मंदिर परिसरों में भजन-कीर्तन और शिव स्तुति से माहौल भक्तिमय बना रहा। सीतामढ़ी जिले में सावन के दौरान हलेश्वर स्थान सहित विभिन्न शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं के पहुंचने की यह एक पुरानी परंपरा है। अंतिम सोमवारी को देखते हुए मंदिरों के आसपास सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के लिए विशेष सतर्कता बरती गई। श्रद्धालुओं ने शांतिपूर्ण तरीके से भगवान भोलेनाथ का दर्शन कर सावन की अंतिम सोमवारी का व्रत और पूजा संपन्न किया।
