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पैगम्बर-ए-इस्लाम हजरत मोहम्मद की यौमे पैदाइश जश्ने ईद मिलादुन्नबी के पाक मौके पर प्रखंड चीरी, कुड़ू, सुंदरू, ननतिलों सहित अन्य जगहों में जुलूसे मोहम्मदी बड़े ही जोशो-खरोश, अकीदत व एहतराम के साथ निकाला गया। हाथों में इस्लामी परचम, दिलों में इश्के रसूल लिए सैकड़ों की तादाद में नौजवान, बुजुर्ग और बच्चे जुलूस में शामिल हुए। जुलूस पूरी तरह अनुशासित, सौहार्दपूर्ण और शांतिपूर्ण तरीके से निकाला गया, जो आपसी भाईचारे की मिसाल पेश कर रहा था। जुलूस के दौरान पुलिस प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह चाक चौबंद थी। ब्लॉक चौक से जुलूस प्रारंभ होकर नीचे स्टैंड गया। वहीं चीरी से निकला मुख्य जुलूसे मोहम्मदी चीरी नवाटोली, चीरी बरवाटोली और चीरी आजाद बस्ती होते हुए पूरे इलाके का भ्रमण किया। जुलूस के दौरान सरकार की आमद-मरहबा, हुजूर की आमद-मरहबा, आका की आमद-मरहबा के दिलफरेब नारों से फिजा गूंजती रही। उलेमा-ए-किराम हाफिज अब्दुल रहमान साहब, हाफिज मोजिबुल्लाह साहब, हाफिज दानिस राजा खान साहब ने हजरत मोहम्मद की सीरत-ए-पाक पर रोशनी डालते हुए शानदार तकरीर पेश की और नातख्वानों ने नात-ए-शरीफ पढ़ कर महफ़िल को रूहानी बना दिया।
