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“सेमेस्टर पास कराने की सेटिंग के लिए 10,500 रुपए लिए गए। चेयरमैन सर ने कहा कि पैसा दे दी हो न, फिर क्यों परेशान हो। कुछ भी लिखकर आ जाना, एग्जाम में पास हो जाओगी। सब मैनेज है। मैं इसी वहम में रह गई। परीक्षा में फेल हो गई, पैसा भी गया। अब पैरेंट्स पूछ रहे हैं कि रिजल्ट क्या आया? उन्हें क्या मुंह दिखाऊंगी?” यह बताते-बताते BSc नर्सिंग की छात्रा नेहा कुमारी परेशान हो गई। उसके चेहरे पर चिंता साफ दिखाई दे रही थी। दो पल रुककर वह कहती है- मैं गुरुदेव पारा मेडिकल कॉलेज की छात्रा हूं। कोर्स के लिए किसी से 7.5 लाख, तो किसी से 8 लाख रुपए लिए गए। हर सेमेस्टर में पास कराने के लिए सेटिंग के नाम पर सभी छात्रों से 10,500 रुपए लिए गए। हर बार कहा गया कि सेंटर मैनेज है। दो बार का एग्जाम मैनेज था, इसलिए रिजल्ट ठीक आया। इस बार मैनेज नहीं हो पाया, तो रिजल्ट गड़बड़ हो गया।” नेहा कुमारी अकेली नहीं हैं, जो BSc नर्सिंग की परीक्षा में फेल हुई हैं। ऐसे छात्रों की संख्या सैकड़ों में है। इन छात्रों ने 25 अगस्त को बिहार स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय और आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय परिसर में जमकर हंगामा किया। इस दौरान तोड़फोड़ भी हुई। छात्रों और पुलिस के बीच हुई झड़प में 8 से अधिक छात्र और 3 पुलिसकर्मी घायल हुए। पढ़िए ग्राउंड रिपोर्ट..। पहले जानिए रिजल्ट, 74% छात्र फेल हो गए बिहार यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंस (BUHS) की ओर से जारी B.Sc. नर्सिंग और B.Pharm के रिजल्ट को लेकर छात्रों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। बड़ी संख्या में छात्रों के फेल होने के बाद पटना समेत 5 जिलों में प्रदर्शन हुए हैं। छात्रों ने जमकर हंगामा और तोड़फोड़ की। पटना सदर SDPO-1 मनोज कुमार के अनुसार, हत्या के प्रयास, सरकारी काम में बाधा डालने और गैरकानूनी तरीके से मजमा लगाने के आरोप में 500 से अधिक अज्ञात छात्रों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। सेशन 2024-28 के प्रथम सेमेस्टर का पूरे बिहार का औसत रिजल्ट करीब 56% रहा। यानी 44% छात्र फेल हो गए। सरकारी कॉलेजों का रिजल्ट 70 से 80% रहा, जबकि कई निजी कॉलेजों में 80 से 90% छात्र फेल हुए। हालांकि, कुछ निजी कॉलेजों का रिजल्ट काफी बेहतर भी रहा है। सेशन 2023-27 के तीसरे सेमेस्टर का रिजल्ट और भी खराब रहा। पूरे बिहार में 26% छात्र पास हुए, 74% फेल हो गए। सरकारी कॉलेजों में करीब 50% छात्र पास हुए। निजी कॉलेजों के अधिकांश छात्र फेल हुए हैं। इससे छात्र आक्रोशित हैं। पांच जिलों में प्रदर्शन, पटना में आक्रोश बढ़ा खराब रिजल्ट के चलते अब तक समस्तीपुर, वैशाली, सीवान, पटना और पूर्णिया में छात्रों ने प्रदर्शन किया है। पटना के फतुहा, दानापुर, पालीगंज और बहादुरपुर में भी छात्र आक्रोश जता चुके हैं। छात्रों का आरोप है कि रिजल्ट में गड़बड़ी हुई है। 25 अगस्त को प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय के 25 से अधिक गमले, कांच का एंट्री गेट, टेबल और कुर्सियां तोड़ दीं। इसके अलावा, बिहार स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय में 10 से अधिक गमले, मुख्य लोहे का गेट और रिसेप्शन काउंटर को नुकसान पहुंचाया गया। इस हंगामे में 8 से अधिक छात्र और 3 पुलिसकर्मी चोटिल हुए। कुछ लोगों के सिर में भी चोट लगी है। छात्र कुलपति बिंदे कुमार को लेकर भी नाराजगी जता रहे हैं। उनका आरोप है कि कुलपति विश्वविद्यालय में नियमित रूप से उपलब्ध नहीं रहते और छात्रों की समस्याएं नहीं सुनते। बिंदे कुमार वर्तमान में IGIMS के निदेशक का पद भी संभाल रहे हैं। छात्रों की मांग है कि रिजल्ट की निष्पक्ष जांच कराई जाए और जिन छात्रों के परिणाम में गड़बड़ी हुई है, उनका दोबारा मूल्यांकन कराया जाए। अब जानिए क्या कहते हैं फेल होने वाले छात्र सेमेस्टर पास कराने के लिए 10,500 रुपए लिए – नेहा कुमारी गुरुदेव पारा मेडिकल कॉलेज की B.Sc. नर्सिंग थर्ड सेमेस्टर की छात्रा नेहा कुमारी ने बताया, “मैंने 2023 में एडमिशन लिया था। अभी तक सेशन कंप्लीट नहीं हुआ है। एडमिशन के वक्त कहा गया था कि 2027 तक मेरा कोर्स कंप्लीट हो जाएगा। अभी सिर्फ थर्ड और फोर्थ सेमेस्टर का एग्जाम हुआ है।” हमारे बैच के 95% छात्र फेल हुए हैं। कॉलेज का कोई एफिलिएशन नहीं है। स्टूडेंट्स के नाम पर धंधा चल रहा है। मेरा एडमिशन 8 लाख रुपए में हुआ। दूसरे कॉलेज में 6 लाख रुपए में एडमिशन करवाकर कमीशन के तौर पर 2 लाख रुपए ले लिए गए। अब बोल रहे हैं कि हल निकाला जाएगा। जब हम लोगों के रुपए लेने के बाद कुछ नहीं हो पाया, तो अब क्या होगा? दूसरे छात्रों ने कहा- एडमिशन के बाद पता चला हमारा कॉलेज दूसरा है – चंद्रकांत निराला 2023-27 बैच के B.Sc. नर्सिंग स्टूडेंट चंद्रकांत निराला ने बताया, “मेरे बैच में 120 स्टूडेंट्स हैं। बोनाफाइड सर्टिफिकेट आने पर पता चला कि मैं उस कॉलेज (गुरुदेव पारा मेडिकल कॉलेज) का छात्र नहीं हूं, जिसमें मैंने एडमिशन लिया था। मैं दूसरे कॉलेज का छात्र हूं। हम लोग यहां सिर्फ ट्यूशन के लिए हैं। एडमिशन के वक्त बताया गया था कि किस्तों में पैसे लिए जाएंगे। अब एक बार में ही रुपए जमा करने का दबाव डाला जा रहा है। इसके अलावा एग्जाम सेंटर मैनेज करने के नाम पर अलग से 10,500 रुपए लिए गए। परीक्षा पास कराने के नाम पर भी पैसे लिए गए। मैंने एग्जाम देने से पहले पूछा कि हम लोगों का क्या होगा? चेयरमैन ने बताया कि कुछ नहीं होगा, तुम लोग पास कर जाओगे। रिजल्ट आया तो सब फेल थे। हम लोगों की यूनिवर्सिटी भी लेट चल रही है। 2023-27 बैच है। अभी तक सिर्फ 4 सेमेस्टर के एग्जाम हुए हैं।” हमारा 120 स्टूडेंट्स का बैच है। सबका अलग-अलग कॉलेज से एडमिशन कराया गया है। किसी का फतुहा तो किसी का मुजफ्फरपुर आरबी डीएसआर कॉलेज, रामबिलास राय शरण राय कॉलेज, मां कांति कॉलेज फतुहा, बाबा राजा राम कॉलेज, दिया है। यह सिर्फ एक सेशन की बात नहीं है। सभी सेशन में यही हुआ है। जब मान्यता नहीं है तो फिर इस तरह के कॉलेज में एडमिशन क्यों लिया जा रहा है। भास्कर रिपोर्टर ने गुरुदेव पैरामेडिकल कॉलेज के अधिकारी से बात करने की कोशिश की, लेकिन फोन कॉल रिसीव नहीं किया गया। 2023 में BUHS को दी परीक्षा की जिम्मेदारी दरअसल, वर्ष 2023 में बिहार यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंस को स्वास्थ्य विज्ञान से जुड़े पाठ्यक्रमों की परीक्षा कराने और रिजल्ट जारी करने की जिम्मेदारी दी गई थी। इसके बाद से BUHS ही परीक्षाएं और परिणाम जारी कर रहा है। पिछले दो सेमेस्टर से पूरे बिहार का परीक्षा केंद्र बापू परीक्षा परिसर में बनाया गया है। बीते सप्ताह B.Sc नर्सिंग सत्र 2024-28 के प्रथम सेमेस्टर और B.फार्मा प्रथम सेमेस्टर का रिजल्ट 19 अगस्त को जारी किया गया। वहीं, B.Sc नर्सिंग सत्र 2023-27 के तीसरे सेमेस्टर का रिजल्ट 21 अगस्त को जारी किया गया। मेडिकल एसोसिएशन ऑफ बिहार ने की लाठीचार्ज की निंदा मेडिकल एसोसिएशन ऑफ बिहार के प्रदेश अध्यक्ष भारत भूषण ने लाठीचार्ज की निंदा करते हुए दोषी पदाधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा, “कई पाठ्यक्रमों के सत्र 6 महीने से लेकर 2 साल तक पीछे चल रहे हैं और परीक्षाओं के परिणाम लंबित हैं।” कितने लोगों पर हुई है FIR? वहीं, मंगलवार को हुए प्रदर्शन के बाद सदर SDPO-1 मनोज कुमार ने बताया, ‘हत्या के प्रयास, सरकारी काम में बाधा डालने और गैरकानूनी तरीके से मजमा लगाने के आरोप में 500 से अधिक अज्ञात स्टूडेंट्स के खिलाफ FIR दर्ज की गई है।’
