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राज्य सरकार गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सरकारी विद्यालयों की व्यवस्था में सुधार के बड़े-बड़े दावे कर रही है। हालांकि, समस्तीपुर शहर के बीच संचालित कुछ प्राथमिक विद्यालय इन दावों की जमीनी हकीकत को उजागर करते हैं। यहां कहीं दो कमरों में दो विद्यालय चल रहे हैं, तो कहीं बच्चों को सड़क किनारे झोपड़ीनुमा भवन में पढ़ने को मजबूर होना पड़ रहा है। एक कमरे में बैठते हैं 50 छात्र कई विद्यालयों में एक ही कमरे में लगभग 50 बच्चों के बैठने की व्यवस्था है, जहां कार्यालय का सामान भी रखा होता है। इसके अलावा, पीने के पानी, रसोईघर और पर्याप्त कमरों जैसी बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं। दो कमरों में चल रहा दो विद्यालय शहर के चीनी मिल परिसर में स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय चीनी मिल और प्राथमिक विद्यालय स्वीपर कॉलोनी की स्थिति शिक्षा व्यवस्था की बदहाली का स्पष्ट उदाहरण है। ये दोनों विद्यालय एक ही भवन में संचालित होते हैं, जिसमें केवल दो कमरे हैं। दो शिफ्ट में होता है संचालन सीमित जगह के कारण दोनों विद्यालयों को दो शिफ्ट में चलाया जा रहा है। प्राथमिक विद्यालय स्वीपर कॉलोनी में कक्षा एक से पांच तक के बच्चों की पढ़ाई सुबह सात बजे से दोपहर 12 बजे तक होती है। इसके बाद, दोपहर 12 बजे से शाम पांच बजे तक राजकीय प्राथमिक विद्यालय चीनी मिल की कक्षाएं संचालित होती हैं। बरामदे में बनता है मिड डे मील शिक्षकों के लिए भी इन सीमित संसाधनों में बच्चों को पढ़ाना एक बड़ी चुनौती है। बच्चों के लिए मध्याह्न भोजन (एमडीएम) की व्यवस्था किसी रसोईघर में नहीं, बल्कि बरामदे में करनी पड़ती है। पीने के पानी के नाम पर विद्यालय में केवल एक चापाकल है, जिससे पीला पानी निकलता है। ऐसे में बच्चों के स्वास्थ्य और स्वच्छता को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। जानकारी के बावजूद प्रशासन निष्क्रिय राजकीय प्राथमिक विद्यालय चीनी मिल के प्रधानाध्यापक अनिल कुमार ने बताया कि एक ही छत के नीचे दो विद्यालयों का दो शिफ्ट में संचालन होता है। इसकी जानकारी विभाग को दी जा चुकी है, लेकिन अब तक समस्या का समाधान नहीं हुआ है। उन्होंने यह भी बताया कि विद्यालय की स्थापना वर्ष 1955 में हुई थी। झोपड़ी में चल रहा राजकीय प्राथमिक विद्यालय शहर के बीएड कॉलेज रोड इलाके में भी शिक्षा व्यवस्था की इससे भी गंभीर तस्वीर सामने आती है, जहां सरकारी विद्यालय सड़क किनारे झोपड़ी में चल रहा है। यहां राजकीय प्राथमिक विद्यालय सड़क किनारे झोपड़ीनुमा संरचना में संचालित हो रहा है। पहली नजर में इसे देखकर किसी गरीब परिवार का अस्थायी आशियाना समझना आसान है, लेकिन इसी संरचना में सरकारी विद्यालय के बच्चे पढ़ते हैं। बारिश, गर्मी, धूप और मौसम की दूसरी चुनौतियों के बीच बच्चों की पढ़ाई संचालित हो रही है। जिस उम्र में बच्चों को सुरक्षित, स्वच्छ और अनुकूल शैक्षणिक वातावरण मिलना चाहिए, उस उम्र में उन्हें अस्थायी और असुरक्षित ढांचे में पढ़ना पड़ रहा है। विद्यालय के प्रधानाध्यापक विश्वजीत झा ने बताया कि विद्यालय की समस्या से शिक्षा विभाग को अवगत कराया गया है। विभाग को इसकी जानकारी है, लेकिन अब तक इसका समाधान नहीं हो सका है। एक कमरे में चलती है क्लास, वहीं पर ऑफिस शहर के कोइरी टोल स्थित राजकीय विद्यालय में भी भवन और कमरों की कमी बच्चों की पढ़ाई पर भारी पड़ रही है। यहां कक्षा एक से पांच तक के बच्चों को पढ़ाया जाता है। एक ही कमरे में करीब 50 बच्चों को बैठाकर पढ़ाने की व्यवस्था है। इतना ही नहीं, इसी कमरे में कार्यालय से संबंधित सामान भी रखा हुआ है। विद्यालय की छत भी जर्जर बताई जा रही है। ऐसे माहौल में बच्चों के लिए पर्याप्त जगह, एकाग्रता और सुरक्षित वातावरण की कल्पना करना मुश्किल है। शिक्षक सीमित संसाधनों में अपनी जिम्मेदारी निभाने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन भवन और संसाधनों की कमी उनकी कोशिशों पर भारी पड़ती दिखाई दे रही है। हर चुनाव में बनता है मतदान केंद्र इन विद्यालयों की स्थिति का एक और विडंबनापूर्ण पहलू यह है कि चुनाव के दौरान हर वर्ष यहां मतदान केंद्र बनाए जाते हैं। मतदान के समय प्रशासनिक और चुनावी अधिकारियों का निरीक्षण भी होता है। शिक्षा विभाग के अधिकारी भी समय-समय पर विद्यालयों का निरीक्षण करते हैं। शिक्षकों की उपस्थिति, बच्चों की पढ़ाई और सरकारी योजनाओं के संचालन की स्थिति की रिपोर्ट तैयार की जाती है। इसके बावजूद भवन की कमी, जर्जर छत, पेयजल, रसोईघर और अन्य बुनियादी समस्याओं का समाधान नहीं होना कई सवाल खड़े करता है। सवाल यह है कि निरीक्षण के दौरान इन समस्याओं पर अधिकारियों की नजर क्यों नहीं जाती? यदि समस्याएं सामने आती हैं तो फिर कार्रवाई की प्रक्रिया कहां अटक जाती है? पत्राचार के बाद भी कार्रवाई का इंतजार विद्यालय प्रबंधन की ओर से समस्याओं को लेकर विभाग को कई बार पत्र लिखे जाने की बात कही गई है। चीनी मिल परिसर स्थित विद्यालय के प्रधानाध्यापक ने बताया कि कमरों की कमी सहित अन्य समस्याओं की जानकारी विभाग को दी गई है। वहीं, बीएड कॉलेज रोड स्थित विद्यालय के प्रभारी ने भी विभाग को पत्र देने और समस्या से अवगत कराने की बात कही है। इसके बावजूद अब तक कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया है। हमने विद्यालयों की समस्याओं को लेकर प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी रितेश कुमार से बात किया तो उन्होंने बताया कि चीनी मिल परिसर में संचालित विद्यालय एवं बीएड कॉलेज रोड में झोपड़ी में संचालित विद्यालय के पास जमीन नहीं है। इसीलिए विद्यालय की यह हालात बनी हुई है ।उन्होंने बताया है कि विभाग के द्वारा पहल की जा रही है जल्द ही तीनों विद्यालय के व्यवस्था को सुधार दिया जाएगा। विधायक बोलीं- गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सरकार का उद्देश्य मामले को लेकर स्थानीय विधायक अश्वमेध देवी ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना सरकार की प्राथमिकता है। विद्यालयों की स्थिति और निरीक्षण से जुड़े मामले में आवश्यक पहल किए जाने की बात उन्होंने कही। अब सवाल सिर्फ विद्यालय भवन का नहीं है। सवाल उन सैकड़ों बच्चों के भविष्य का है, जिनके हाथों में किताबें तो हैं, लेकिन पढ़ने के लिए पर्याप्त कमरे नहीं। शिक्षा का अधिकार तो मिला है, लेकिन सुरक्षित और सम्मानजनक शैक्षणिक वातावरण अब भी दूर है। सरकार योजनाओं और बजट के जरिए शिक्षा व्यवस्था में बदलाव के दावे करती रहे, लेकिन जब शहर के बीचो-बीच सरकारी प्राथमिक विद्यालयों की यह तस्वीर सामने आती है तो सवाल स्वाभाविक है। जब प्राथमिक शिक्षा की नींव ही कमजोर होगी, तो बेहतर भविष्य की मजबूत इमारत आखिर कैसे खड़ी होगी?
समस्तीपुर में राजकीय विद्यालयों की स्थिति बदहाल:दो कमरों में चल रहा दो विद्यालय, रसोई की व्यवस्था नहीं; बच्चे झोपड़ी में पढ़ने को मजबूर
