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सहरसा में किशोर न्याय अधिनियम, 2015 के तहत जिला बाल संरक्षण इकाई ने एक कार्यक्रम आयोजित किया। यह कार्यक्रम ‘सुरक्षित स्थान’ में हुआ, जहां विधि विवादित किशोरों के पुनर्वास और मार्गदर्शन के लिए ‘नशा मुक्ति जागरूकता और संकल्प समारोह’ रखा गया था। इसमें कोशी प्रमंडल के डीआईजी डॉ. कुमार आशीष भी शामिल हुए। यह आयोजन किशोर न्याय परिषद, सहरसा और ‘नशामुक्त कोशी अभियान’ ने मिलकर किया। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने बताया कि संस्थान में ज्यादातर ऐसे किशोर हैं, जिन पर गंभीर अपराधों के आरोप हैं। विशेषज्ञों ने कहा कि नशा युवाओं और किशोरों को अपराध की दुनिया में धकेलता है। कई बार किशोर अपनी नशे की लत पूरी करने के लिए अपराध करते हैं। ऐसे में उन्हें इस समस्या से निकालना और सही रास्ता दिखाना समाज और प्रशासन की जिम्मेदारी है। कार्यक्रम में रह रहे किशोरों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। उन्होंने चित्रकला और निबंध प्रतियोगिता में अपनी कला दिखाई। चित्रों से उन्होंने नशे के बुरे असर और उससे बर्बाद होते परिवारों का दर्द दिखाया। निबंध के जरिए सभी किशोरों ने जीवन में कभी नशा न करने का पक्का संकल्प लिया। कार्यक्रम में किशोरों को भारत सरकार की ‘टेली-मानस’ सेवा के बारे में भी बताया गया। यह राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत चलती है। मानसिक स्वास्थ्य मदद के लिए टोल-फ्री नंबर 14416 और 1800-891-4416 जारी किए गए हैं। यह सेवा 24 घंटे मुफ्त मिलती है। विशेषज्ञों ने बताया कि नशा छोड़ने पर नींद न आना, बेचैनी, घबराहट और डिप्रेशन जैसी दिक्कतें होती हैं। इनके समाधान के लिए इस नंबर पर संपर्क कर सकते हैं। कॉल करने पर प्रशिक्षित काउंसलर और मनोचिकित्सक सही सलाह देते हैं। कॉल करने वाले की पहचान और जानकारी पूरी तरह गोपनीय रखी जाती है।
सहरसा में किशोरों ने नशा न करने का संकल्प लिया:डीआईजी डॉ. कुमार आशीष ने बच्चों को नशे से दूर रहने की सलाह दी
