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रांची में 78 फीसदी पहुंची बच्चों की उपस्थिति:डीएसई हुए सम्मानित, नवाचार को सराहना… बच्चों को स्कूल लाने की ‘सीटी’ ने दिलाया राष्ट्रीय सम्मान


सरकारी स्कूलों में ड्रॉपआउट रोकने और विद्यार्थियों की उपस्थिति बढ़ाने के लिए शुरू किए गए ‘सीटी बजाओ, उपस्थिति बढ़ाओ’ अभियान के लिए रांची के जिला शिक्षा अधीक्षक बादल राज को राष्ट्रीय सम्मान मिला। सिमडेगा जिले में वर्ष 2023 में शुरू किए गए ‘सीटी बजाओ, उपस्थिति बढ़ाओ’ अभियान का असर स्कूलों में दिखा। अभियान शुरू होने से पहले जिले के सरकारी स्कूलों में छात्रों की औसत उपस्थिति 48 प्रतिशत थी, जो बढ़कर 76 प्रतिशत तक पहुंच गई। इस सफलता के बाद वर्ष 2024 में अभियान को रांची जिले में भी लागू किया गया। यहां अभियान शुरू होने से पहले विद्यार्थियों की उपस्थिति 60 प्रतिशत थी, जो अब बढ़कर 78 प्रतिशत हो चुकी है। सकारात्मक परिणाम के बाद इसे पूरे झारखंड में लागू किया गया। सीटी बजते ही जुटते हैं बच्चे, साथ जाते हैं स्कूल
सिटी बजाओ उपस्थिति बढ़ाओ अभियान की शुरुआत साल 2023 में डीआईईटी सिमडेगा द्वारा ग्रामीण क्षेत्र के एक स्कूल में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में की गई थी। छात्रों को सीटी वितरित की गई। स्कूल जाते समय, स्कूल का मॉनिटर सीटी बजाकर उसी स्कूल के छात्रों को इकट्ठा करता है और फिर वे सभी एक साथ स्कूल जाते हैं। न्यूनतम संसाधनों के साथ शुरू की गई यह पहल काफी लोकप्रिय हुई और इसे अन्य स्थानों पर भी अपनाया गया। ‘रांची स्पीक’ पहल से छात्रों में अभिव्यक्ति की क्षमता बढ़ी
स्कूलों में ‘रांची स्पीक’ पहल भी शुरू की गई है। जिसका विचार जिला शिक्षा अधीक्षक को स्कूलों के निरीक्षण के दौरान आया। उन्होंने देखा कि स्कूलों में छात्र घबराए हुए और अंतर्मुखी थे और उनमें अभिव्यक्ति की क्षमता बहुत कम या न के बराबर थी। छात्रों को उनके स्तर के अनुसार एक विषय दिया गया और उन्हें उस पर तैयारी करनी थी और फिर अपने विचार किसी अन्य भाषा में व्यक्त करने थे। इस पहल से छात्रों में बोलने को लेकर आत्मविश्वास बढ़ा है। नई दिल्ली में नवाचार के लिए सम्मानित किया गया गुरुवार को नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय शैक्षिक योजना एवं प्रशासन संस्थान (एनआईईपीए) में वर्ष 2023-24 एवं 2024-25 में नवाचार के तहत उन्हें सम्मानित किया गया। चांसलर प्रो. रमा शंकर दुबे, पूर्व एनसीईआरटी निदेशक प्रो. जेएस राजपूत और वाइस चांसलर प्रो. शशिकला वंजारी ने उन्हें पुरस्कार दिया। अभियान की शुरुआत सिमडेगा में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में हुई थी। बाद में इसे पूरे झारखंड में लागू किया गया।

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