भास्कर न्यूज | दुमका दुमका जिला के जामा विधानसभा की पूर्व विधायक सीता मुर्मू सोरेन ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर जेपीएससी-जेएसएससी सीजीएल परीक्षाओं में सुधार को लेकर आंदोलन कर रहे छात्रों पर दर्ज मुकदमे मानवीय आधार पर तत्काल वापस लेने की मांग की है। 4 सितंबर को लिखे इस पत्र में उन्होंने कहा है कि पारदर्शिता की मांग करने वाले निर्दोष परीक्षार्थियों पर आपराधिक मुकदमा चलाना अन्यायपूर्ण है। पत्र में सीता सोरेन ने लिखा कि जेपीएससी और जेएसएससी सीजीएल की परीक्षाओं में विसंगतियों, पेपर लीक की आशंकाओं और पारदर्शिता की कमी को लेकर राज्य के युवाओं में भारी आक्रोश और निराशा का माहौल बना था। उन्होंने कहा कि छात्रों ने अपने लोकतांत्रिक अधिकारों के तहत शांतिपूर्ण प्रदर्शन का सहारा लिया, जो कानून-व्यवस्था बिगाड़ने के लिए नहीं बल्कि रोजगार और सुरक्षित भविष्य की स्वाभाविक मांग थी। बावजूद इसके आंदोलन के दौरान कई होनहार छात्रों पर विभिन्न धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर दी गई। पूर्व विधायक ने पत्र में तीन प्रमुख बिंदुओं पर मुख्यमंत्री का ध्यान आकर्षित किया है जिसमें आपराधिक मुकदमा दर्ज होने से छात्रों का करियर बर्बाद होने की कगार पर है। भविष्य में सरकारी नौकरी के सत्यापन में इन्हें गंभीर बाधाओं का सामना करना पड़ेगा।मध्यम और गरीब परिवारों से आने वाले ये छात्र पहले से ही परीक्षा अनियमितता से जूझ रहे हैं। त्वरित और सकारात्मक निर्णय लें सीएम सीता सोरेन ने मुख्यमंत्री से विनम्र आग्रह करते हुए कहा कि आंदोलन के दौरान जिन परीक्षार्थियों और छात्र नेताओं पर मुकदमे दर्ज हुए हैं, उनकी समीक्षा कर संबंधित विभाग को इन्हें अविलंब वापस लेने का निर्देश दिया जाए। उन्होंने विश्वास जताया कि मुख्यमंत्री झारखंड के युवाओं के प्रति संवेदनशीलता दिखाते हुए इस पर त्वरित और सकारात्मक निर्णय लेंगे। गौरतलब है कि परीक्षाओं में अनियमितताओं को लेकर छात्रों का आंदोलन बीते कई हफ्तों से जारी है। सरकार पहले ही 14वीं जेएसएससी परीक्षा रद्द कर मामले की जांच सीआईडी को सौंप चुकी है, वहीं छात्र नेता अब भी सीबीआई जांच की मांग पर अड़े हैं।
