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झारखंड में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली सरकार के कार्यकाल में चार मंत्रियों का निधन हो चुका है। इनमें हाजी हुसैन अंसारी, जगरनाथ महतो, रामदास सोरेन और अब सुदिव्य कुमार सोनू शामिल हैं। खास बात यह है कि इन चार में तीन मंत्री सीधे शिक्षा विभाग से जुड़े रहे। जगरनाथ महतो और रामदास सोरेन स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के मंत्री रहे, जबकि सुदिव्य कुमार सोनू के पास उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग था। यानी करीब साढ़े तीन साल के भीतर शिक्षा से जुड़े तीन मंत्रियों का निधन हुआ है। यह किसी कारण का दावा नहीं, बल्कि झारखंड की राजनीति में सामने आया एक असामान्य और दुखद संयोग है। सुदिव्य के निधन से झामुमो ने संगठन से लंबे समय तक जुड़े रहे एक जमीनी नेता को खो दिया है। उनके निधन से सरकार और पार्टी दोनों को बड़ा झटका लगा है। सुदिव्य के अंतिम दर्शन के लिए गिरिडीह में बड़ी संख्या में लोग जुट रहे हैं। हाजी हुसैन अंसारी : कोरोना ने छीना अनुभवी नेता, बेटे ने संभाली विरासत मधुपुर के विधायक हाजी हुसैन अंसारी हेमंत सोरेन सरकार में मंत्री थे। वर्ष 2020 में कोरोना संक्रमण के बाद उनका निधन हुआ। उनके निधन से मधुपुर विधानसभा सीट खाली हुई और उपचुनाव कराया गया। इसमें उनके बेटे हफीजुल हसन अंसारी ने जीत दर्ज की। इसके साथ ही हाजी हुसैन अंसारी की राजनीतिक विरासत उनके बेटे ने संभाली। उनके निधन के बाद पहली बार हेमंत सरकार के मंत्रिमंडल को अपने एक प्रमुख सदस्य को खोना पड़ा था। जगरनाथ महतो : बीमारी से लंबी लड़ाई, फेफड़े का प्रत्यारोपण भी हुआ डुमरी के विधायक जगरनाथ महतो सरकार में स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता मंत्री थे। कोरोना संक्रमण के बाद उनकी हालत गंभीर हुई और लंबे समय तक इलाज चला। इलाज के दौरान उनका फेफड़ा ट्रांसप्लांट भी किया गया, लेकिन स्वास्थ्य में स्थायी सुधार नहीं हो सका। 6 अप्रैल 2023 को चेन्नई में इलाज के दौरान उनका निधन हो गया। जगरनाथ महतो को झारखंड की राजनीति में जमीन से जुड़े और मजबूत जनाधार वाले नेता के रूप में जाना जाता था। उनके निधन के बाद डुमरी में उपचुनाव हुआ, जिसमें उनकी पत्नी बेबी देवी ने जीत हासिल की और विधानसभा पहुंचीं। रामदास सोरेन और सुदिव्य : शिक्षा विभाग से जुड़े दो और चेहरे घाटशिला के विधायक रामदास सोरेन भी हेमंत सरकार में स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता मंत्री थे। 15 अगस्त 2025 को उनका निधन हुआ। उनके निधन पर राज्य सरकार ने राजकीय शोक घोषित किया था। जगरनाथ महतो के बाद शिक्षा विभाग संभाल रहे एक और मंत्री का जाना सरकार के लिए बड़ा झटका था। इसके बाद सुदिव्य कुमार सोनू के निधन से यह सिलसिला फिर चर्चा में आ गया। सुदिव्य ने 1989 में झामुमो की सदस्यता लेकर संगठन में काम शुरू किया था। शुरुआती दौर में वह दीवार लेखन, पोस्टर लगाने और पार्टी का झंडा लेकर गांव-गांव संगठन खड़ा करने में जुटे रहे। 1992 में उन्हें गिरिडीह नगर कमेटी का संस्थापक अध्यक्ष बनाया गया। इसके बाद संगठन में अलग-अलग जिम्मेदारियां निभाते हुए वह गिरिडीह जिला अध्यक्ष बने। 2019 में गिरिडीह से विधायक बने और 2024 में लगातार दूसरी जीत दर्ज की। इसके बाद उन्हें हेमंत सरकार में उच्च एवं तकनीकी शिक्षा के साथ पर्यटन, कला एवं संस्कृति, खेलकूद एवं युवा कार्य और नगर विकास एवं आवास विभाग की जिम्मेदारी मिली।
हेमंत कैबिनेट के 4 मंत्रियों का सत्ता में रहते निधन:इनमें 2 स्कूली शिक्षा और 1 उच्च-तकनीकी शिक्षा मंत्री; साढ़े 3 साल में 3 मंत्रियों का निधन
