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उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू के करीब 21 महीने के कार्यकाल में विश्वविद्यालयों के पुराने कानूनी ढांचे को बदलकर झारखंड राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम 2026 लागू हुआ। यह अधिनियम पुराने विश्वविद्यालय कानूनों को एकीकृत करने के साथ नए शिक्षण-प्रधान और शोध-प्रधान विश्वविद्यालयों की स्थापना का रास्ता भी खोलता है। उन्होंने झारखंड को पर्यटन हब बनाने के लिए कई योजनाएं आगे बढ़ाईं। नगर विकास के लिए भी गिरिडीह जलापूर्ति योजना, जमशेदपुर में आईएसबीटी समेत राज्य में कई बड़ी योजनाएं धरातल पर उतारी। शिक्षा: विवि की कुलपति नियुक्ति में सबसे बड़ा बदलाव किया, सीएम की भूमिका बढ़ी विश्वविद्यालय एक्ट-2026 में कुलपति की नियुक्ति की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण बदलाव किया गया। अब कुलपति का चयन केवल पारंपरिक तरीके से नहीं होगा। कुलाधिपति यानी राज्यपाल और मुख्यमंत्री संयुक्त रूप से चयन करेंगे। इसके लिए एक खोज समिति बनेगी, जिसकी अध्यक्षता कुलाधिपति द्वारा नामित शिक्षाविद् करेंगे। एकीकृत नया कानूनी ढांचा सोनू के कार्यकाल में सबसे बड़ा संस्थागत परिवर्तन झारखंड राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम-2026 रहा। यह 28 अप्रैल 2026 को गजट में प्रकाशित हुआ। अधिनियम ने झारखंड राज्य विवि अधिनियम-2000 के साथ अलग-अलग समय में बने कुछ विश्वविद्यालय कानूनों को एकीकृत कानूनी ढांचे में लाने की कोशिश की। नए विवि अधिनियम-2026 में ये महत्वपूर्ण व्यवस्थाएं भी नियुक्ति प्रक्रिया समय पर पूरी करने पर जोर: संभावित रिक्ति से छह माह पहले नियुक्ति प्रक्रिया शुरू और रिक्ति की संभावित तिथि से एक माह पहले पूरी करने का प्रावधान। समय पर रिजल्ट प्रकाशन की जिम्मेदारी तय: परीक्षा, मूल्यांकन और समयबद्ध रिजल्ट प्रकाशन की जिम्मेदारी परीक्षा नियंत्रक को दी गई है।
डिजिटल व्यवस्था: सूचना प्रौद्योगिकी एवं डिजिटल लर्निंग बोर्ड के जरिए विवि के शैक्षणिक, वित्तीय और प्रशासनिक काम में तकनीक के इस्तेमाल पर जोर। पर्यटन: पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कई बड़ी परियोजनाओं की नींव रखी और गति दी माइनिंग टूरिज्म: पतरातू घाटी, उरीमारी माइंस और पलानी झरने को जोड़कर देश के पहले माइनिंग टूरिज्म सर्किट की पहल।
धार्मिक पर्यटन: बाबाधाम-वासुकीनाथ में सुविधाओं व सौंदर्यीकरण की योजनाओं को गति।
एडवेंचर टूरिज्म: रजरप्पा, पंचघाघ और नेतरहाट में ग्लास ब्रिज जैसी योजनाओं को आगे बढ़ाया। प्रकृति और रोजगार से जोड़ा इको-टूरिज्म: दलमा में 30 इको-कॉटेज और जंगल सफारी की शुरुआत।
टाइगर सफारी: राजगीर मॉडल पर पलामू टाइगर रिजर्व में टाइगर सफारी की योजना।
रोजगार: स्थानीय युवाओं के लिए गाइड, परिवहन व पर्यटन सेवाओं में स्वरोजगार की संभावनाएं तैयार करने पर जोर। झारखंड को टूरिज्म हब बनाने का विजन नेतरहाट उत्सव: रण उत्सव की तर्ज पर राष्ट्रीय स्तर पर नेतरहाट की ब्रांडिंग की योजना।
पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए ब्रांडिंग: कोलकाता रोड शो और डिजिटल प्रचार के जरिए पर्यटकों को आकर्षित करने की रणनीति।
विजन: धार्मिक, प्राकृतिक, वन्यजीव, साहसिक और माइनिंग टूरिज्म को जोड़कर झारखंड को टूरिज्म हब बनाने का लक्ष्य।
कर्नाटक मॉडल: कर्नाटक दौरे पर ‘जंगल लॉज एंड रिसॉर्ट्स’ मॉडल को पर्यटन परिसंपत्तियों के संचालन में जोड़ने की पहल की। नगर विकास: शहरों के विकास के लिए जलापूर्ति समेत कई योजनाओं पर रहा जोर शहरों की जलापूर्ति योजनाओं पर जोर: शहरी क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्था मजबूत करने के लिए नई जलापूर्ति योजनाओं को आगे बढ़ाया। गिरिडीह में करीब 300 करोड़ रुपए की शहरी जलापूर्ति योजना को आगे बढ़ाने का काम भी उनके प्रमुख स्थानीय प्रयासों में रहा। जमशेदपुर में नया इंटर स्टेट बस टर्मिनल: डिमना, मानगो में करीब 145 करोड़ रुपए की लागत से इंटर स्टेट बस टर्मिनल (आईएसबीटी) की योजना को सैद्धांतिक मंजूरी दिलाई। कचरा प्रबंधन को टेक्नोलॉजी : घर-घर कचरा उठाव की निगरानी के लिए क्यूआर कोड और आरएफआईडी आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम लागू करने की दिशा में विभाग ने काम शुरू किया। नागरिक सुविधाओं के लिए फंड व सफाई पर भी फोकस सफाई व्यवस्था को जवाबदेह बनाने पर जोर: शहरी निकायों में ठोस कचरा प्रबंधन, स्वच्छता और डोर-टू-डोर कलेक्शन की निगरानी मजबूत करने पर जोर दिया। नगर निकायों की आय: प्रॉपर्टी/होल्डिंग टैक्स की वसूली बढ़ाने के लिए मोबाइल ऐप और अपडेटेड प्रॉपर्टी डेटा के इस्तेमाल पर जोर दिया गया। नागरिक सुविधाओं के लिए फंड: 2026-27 में राज्य के शहरी स्थानीय निकायों को नागरिक सुविधा मद में 154 करोड़ रु. का आवंटन किया गया।
उच्च शिक्षा बदलाव; सुदिव्य की अहम विरासत बना विवि एक्ट:मंत्री के रूप में सुदिव्य ने डिजिटल शिक्षा, रोजगारपरक पाठ्यक्रम कार्यों में अमिट छाप छोड़ी
