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दरभंगा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में सोमवार को गंभीर मरीजों के इलाज के लिए चिकित्सा सुविधा शुरू हुई। सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में न्यूरोसर्जरी ऑपरेशन थिएटर (ओटी) और 20 बेड वाले इंटेंसिव केयर यूनिट (आईसीयू) का शुभारंभ किया गया। प्रमंडलीय आयुक्त सह रोगी कल्याण समिति के अध्यक्ष हिमांशु कुमार राय, जिलाधिकारी कौशल कुमार और सहायक समाहर्ता कल्पना रावत ने फीता काटकर आईसीयू का उद्घाटन किया।
आईसीयू के शुरू होने के साथ ही सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के न्यूरोसर्जरी विभाग में मरीजों के ऑपरेशन की सुविधा भी शुरू हो गई। उद्घाटन के दिन ही न्यूरोसर्जरी विभाग में पहला ऑपरेशन 50 वर्षीय लक्ष्मण शर्मा का किया गया। घनश्यामपुर थाना क्षेत्र के नवटोल गांव निवासी लक्ष्मण शर्मा के सिर के अगले हिस्से की हड्डी टूट गई थी। चोटिल हिस्से में खून भी जमा हो गया था। न्यूरोसर्जन डॉ. भुवन जी झा की देखरेख में चिकित्सकों की टीम ने ऑपरेशन कर जमा रक्त को निकाला और चोटिल हिस्से का उपचार किया। जरूरत के अनुसार सिर के अंदर टूटी हुई हड्डी को भी हटाया गया। आईसीयू शुरू होने से गंभीर मरीजों को मिलेगी बड़ी राहत
डीएमसीएच अधीक्षक डॉ. जगदीश चंद्र ने बताया कि सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में 20 बेड की आईसीयू सुविधा शुरू की गई है। इसका इस्तेमाल केवल न्यूरोसर्जरी के मरीजों के लिए नहीं, बल्कि सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के विभिन्न विभागों के गंभीर और क्रिटिकल मरीजों के लिए किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि कई बार ऑपरेशन के बाद मरीज की स्थिति गंभीर हो जाती है और उसे तत्काल आईसीयू की आवश्यकता पड़ती है। अब ऐसी स्थिति में मरीजों को बेहतर निगरानी और उपचार के लिए आईसीयू की सुविधा डीएमसीएच में ही मिल सकेगी। आईसीयू में सभी 20 बेड पर मॉनिटर और वेंटिलेटर की व्यवस्था की गई है।
पटना भेजने की जरूरत कम होगी
न्यूरोसर्जरी ओटी शुरू होने से सड़क दुर्घटना या अन्य कारणों से सिर में गंभीर चोट लगने वाले मरीजों के लिए डीएमसीएच में ही ऑपरेशन की सुविधा उपलब्ध हो गई है। डीएमसीएच में न्यूरोसर्जरी ओटी शुरू नहीं होने के कारण ऐसे कई मरीजों को गंभीर हालत में पटना या दूसरे बड़े शहरों में रेफर करना पड़ता था। डॉ. जगदीश चंद्र ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं में सिर में गंभीर चोट लगने के साथ अंदर रक्त जमा होने के मामले सामने आते रहते हैं। ऐसे मरीजों में समय पर ऑपरेशन होना बेहद महत्वपूर्ण होता है। अब डीएमसीएच में ही ऑपरेशन की सुविधा शुरू होने से मरीजों की जान बचाने में मदद मिलेगी। न्यूरोसर्जरी विभाग में तीन विशेषज्ञ चिकित्सक
अधीक्षक ने बताया कि न्यूरोसर्जरी विभाग में फिलहाल डॉ. भुवन जी झा, डॉ. देवेश आनंद और डॉ. राजीव कुमार रंजन विशेषज्ञ चिकित्सक के रूप में सेवाएं दे रहे हैं। वहीं ऑपरेशन के दौरान एनेस्थीसिया विभागाध्यक्ष डॉ. हरि दामोदर सिंह की देखरेख में एनेस्थीसिया टीम ने अपनी भूमिका निभाई।
पहली सर्जरी को लेकर ओटी में एक दिन पहले ही आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई थीं। ऑपरेशन थिएटर को स्टेरलाइज किया गया था। रविवार को सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल ओटी की सिस्टर इंचार्ज जयंती कुमारी और न्यूरोसर्जरी ओटी की सिस्टर इंचार्ज संगीता कुमारी की देखरेख में ओटी की तैयारियां पूरी की गईं। न्यूरोसर्जरी ओटी के लिए अलग से पांच नर्सिंग स्टाफ की ड्यूटी लगाई गई है।
पांच विभागों में शुरू हो चुकी हैं सेवाएं
जिलाधिकारी कौशल कुमार ने बताया कि सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में कुल आठ विभागों में से फिलहाल पांच विभाग फंक्शनल हो चुके हैं। न्यूरोसर्जरी ओटी और आईसीयू की शुरुआत के बाद मरीजों को गंभीर स्थिति में उपचार की अतिरिक्त सुविधा मिलेगी। उन्होंने कहा कि शेष विभागों को भी जल्द शुरू कराने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।
डीएम ने कहा कि सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल बनाने का उद्देश्य दरभंगा और आसपास के जिलों के मरीजों को बेहतर और विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना है। अगले करीब एक महीने में बचे हुए विभागों को भी शुरू कराने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि मरीजों को इलाज के लिए दूसरे शहरों में जाने की आवश्यकता कम हो।
पैथलैब शुरू होने की भी तैयारी
डीएमसीएच अधीक्षक डॉ. जगदीश चंद्र ने बताया कि सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में पैथलैब शुरू करने की दिशा में भी काम चल रहा है। पैथलैब में कुछ तकनीकी खामियां हैं, जिन्हें दूर किया जा रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि करीब एक से डेढ़ महीने के अंदर पैथलैब को भी शुरू किया जा सकेगा।
पैथलैब शुरू होने के बाद हार्ट अटैक और दिल से जुड़ी गंभीर बीमारियों के मरीजों को इलाज के लिए बाहर रेफर करने की जरूरत कम होगी। वर्तमान में हार्ट के मरीजों की एंजियोप्लास्टी के दौरान स्टेंट लगाने जैसी सुविधाएं पूरी तरह शुरू नहीं हो सकी हैं। सीटीवीएस और नियोनेटोलॉजी में अभी चिकित्सकों की कमी
सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में सुविधाओं का विस्तार हो रहा है, लेकिन कुछ विभागों में अभी भी चिकित्सकों की कमी बनी हुई है। सीटीवीएस और नियोनेटोलॉजी विभाग में अब तक चिकित्सकों की नियुक्ति नहीं होने से इन विभागों की सेवाएं शुरू नहीं हो सकी हैं। गेस्ट्रोलॉजी विभाग में भी चिकित्सकों की कमी है और फिलहाल एक ही चिकित्सक उपलब्ध हैं। पीजी और सीनियर रेजिडेंट की ड्यूटी भी अभी नहीं लगाई गई है। 7 सितंबर 2024 को हुआ था सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल का उद्घाटन
गौरतलब है कि 210 बेड वाले डीएमसीएच सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल का उद्घाटन 7 सितंबर 2024 को किया गया था। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से विभिन्न विभागों में ओपीडी और मरीजों की भर्ती की सुविधा शुरू हुई। वर्तमान में कार्डियोलॉजी, न्यूरोलॉजी, न्यूरोसर्जरी, नेफ्रोलॉजी, बर्न एवं प्लास्टिक सर्जरी और गेस्ट्रोलॉजी समेत विभिन्न विभागों में मरीजों को सेवाएं दी जा रही हैं।
सोमवार को न्यूरोसर्जरी ओटी और 20 बेड के आईसीयू की शुरुआत को डीएमसीएच में गंभीर मरीजों के इलाज की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
कार्यक्रम में सिविल सर्जन डॉ. अरुण कुमार, डीएमसीएच प्राचार्य डॉ. यूसी झा, अधीक्षक डॉ. जगदीश चंद्र, उपाधीक्षक डॉ. अमित कुमार झा, सहायक समाहर्ता कल्पना रावत, डॉ. कमरुद्दीन, डॉ. संजय झा, डॉ. केके झा, डॉ. आसिफ शहनवाज, डॉ. हरि दामोदर सिंह समेत कई चिकित्सक, अधिकारी और स्वास्थ्यकर्मी मौजूद रहे।
20 बेड का ICU शुरू, न्यूरोसर्जरी ऑपरेशन की सुविधा:DMCH में पहले दिन 50 साल के मरीज का ऑपरेशन, सिर की हड्डी टूटी हुई थी
