रांची10 घंटे पहले
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झारखंड हाईकोर्ट ने दुष्कर्म के प्रयास के करीब 27 साल पुराने मामले में आरोपी की दोष सिद्धि बरकरार रखते हुए सजा में बड़ी राहत दी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि रात में महिला के घर में घुसना, उसे पकड़ना, कपड़े उठाना या उसके साथ अशोभनीय हरकत करना गंभीर अपराध है, लेकिन हर ऐसी हरकत को स्वत: दुष्कर्म का प्रयास नहीं माना जा सकता।
दुष्कर्म के प्रयास का अपराध तभी बनता है, जब आरोपी की ओर से ऐसा प्रत्यक्ष और निर्णायक कृत्य किया गया हो, जो दुष्कर्म को अंजाम देने की दिशा में स्पष्ट रूप से आगे बढ़ रहा हो।
जस्टिस प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की अदालत ने घाटशिला से जुड़े कमलेंदु महतो उर्फ खोका की आपराधिक अपील पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। अदालत ने मामले में आईपीसी की धारा 354 के तहत अपराध माना और आरोपी को पहले सुनाई गई 4 साल की सजा के बजाय 8 महीने की सजा को पर्याप्त माना।

कोर्ट ने आरोपी की 4 साल की सजा को 8 महीने कर दिया।
आरोपी को भागते देखा, घटना किसी ने नहीं देखी
हाईकोर्ट ने मामले में पेश किए गए गवाहों के बयानों का भी बारीकी से विश्लेषण किया। पीड़िता के भाई ने अदालत को बताया कि उसे घटना की जानकारी अपनी बहन से मिली थी। वह घटना का प्रत्यक्षदर्शी नहीं था।
वहीं पड़ोसी प्रफुल्लो कुमार सिंह, परी सिंह, बुधी सिंह, अनंतो सिंह समेत अन्य गवाहों ने पीड़िता की आवाज और शोर सुनने तथा आरोपी को उसके घर से भागते देखने की बात कही।
किसी भी अन्य गवाह ने घटना को अपनी आंखों से नहीं देखा था। अदालत ने इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए माना कि आरोपी ने महिला की लज्जा भंग करने के इरादे से उस पर हमला किया था। इसलिए उसके खिलाफ आईपीसी की धारा 354 के तहत अपराध बनता है। हालांकि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर दुष्कर्म के प्रयास की धारा को उसी रूप में कायम रखना उचित नहीं माना गया।

कोर्ट ने कहा कि महिला के घर में घुसना रेप की कोशिश नहीं माना जा सकता।
आधी रात को घर में घुसा था आरोपी, शोर मचाने पर भागा
मामला 27 दिसंबर 1999 की आधी रात का है। पीड़िता अपने घर में सो रही थी, जबकि उसकी मां बगल के कमरे में थीं। घर में उस समय कोई पुरुष सदस्य मौजूद नहीं था। रात करीब 12 बजे पीड़िता ने जबरन दरवाजा खोले जाने की आवाज सुनी। इसके बाद आरोपी कमलेंदु महतो उर्फ खोका कमरे में घुस आया और उसके साथ छेड़छाड़ करने लगा।
पीड़िता के अनुसार, आरोपी उसके शरीर पर चढ़ गया और उसकी साड़ी उठाकर दुष्कर्म करने का प्रयास किया। महिला ने शोर मचाया और आरोपी को अपने शरीर से हटाया। आवाज सुनकर उसकी मां कमरे में पहुंचीं, जिसके बाद आरोपी वहां से भाग गया।
शोर सुनकर पड़ोसी भी मौके पर पहुंचे। पीड़िता ने उन्हें घटना की जानकारी दी। बाद में उसका भाई घर लौटा और 31 दिसंबर 1999 को पुलिस को लिखित शिकायत दी गई। इसके आधार पर चाकुलिया थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई।
ट्रायल कोर्ट ने दी थी 4 साल की सजा
मामले की सुनवाई घाटशिला के अतिरिक्त सत्र न्यायालय में हुई। ट्रायल कोर्ट ने 25 जुलाई 2006 को आरोपी कमलेंदु महतो को आईपीसी की धारा 376/511 के तहत दोषी ठहराया था। इसके बाद 28 जुलाई 2006 को चार वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई। इस फैसले के खिलाफ आरोपी ने हाईकोर्ट में आपराधिक अपील दाखिल की।
हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान घटना की परिस्थितियों और गवाहों के बयानों का परीक्षण किया। अदालत ने माना कि आरोपी का महिला के घर में रात के समय घुसना और उसकी लज्जा भंग करने के इरादे से हमला करना गंभीर अपराध है।
हालांकि दुष्कर्म के प्रयास के लिए आवश्यक प्रत्यक्ष और निर्णायक कृत्य के मानक पूरे नहीं होते। इसी आधार पर अदालत ने दोषसिद्धि को धारा 354 के अपराध तक सीमित किया और 8 माह की सजा को मामले के लिए पर्याप्त माना।
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