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छात्र आंदोलन खत्म होते ही जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षा प्रणाली में सुधार की कवायद ढीली हो गई। रिफॉर्म के लिए कमेटी की घोषणा तो हुई, पर 21 दिन बाद भी कमेटी का गठन नहीं हुआ। बस एक आदेश जारी हुआ कि जेपीएससी-जेएसएससी में परीक्षा रिफॉर्म पर वृहद अध्ययन के लिए उत्पाद विभाग के प्रधान सचिव अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में कमेटी गठित बनेगी। इसमें अन्य अधिकारी सदस्य के रूप में शामिल होंगे, लेकिन सदस्यों की अब तक नियुक्ति ही नहीं हुई। गौरतलब है कि 18 अगस्त को कार्मिक विभाग ने रिफॉर्म के लिए अधिसूचना जारी की थी। कहा गया था कि जेपीएससी-जेएसएससी परीक्षा में रिफॉर्म के लिए प्रतिष्ठित संस्थानों के निदेशक और सदस्यों को भी शामिल किया जाएगा। अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में बनने वाली कमेटी का मुख्य उद्देश्य जेपीएससी-जेएसएसी की भर्ती परीक्षाओं में 2014 से अब तक हुई अनियमितताओं की व्यापक समीक्षा करना और भर्ती व्यवस्था में सुधार सुझाना है। कमेटी को दो माह में सरकार को रिपोर्ट सौंपनी है। इसमें कमेटी को भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता बढ़ाने के उपाय सुझाने के साथ साथ भविष्य में पेपर लीक रोकने के लिए सुधार का सुझाव भी देना है। गाइडलाइन और नई सेवा शर्त के लिए कमेटी बनी, लेकिन अब तक एक भी बैठक नहीं हुई जेपीएससी-जेएसएससी में अधिकारियों-कर्मचारियों की तैनाती के लिए एक गाइडलाइन और नई सेवा शर्त बनाने को लेकर विकास आयुक्त की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति गठित की गई। 25 अगस्त को गठित समिति को अनुशंसा रिपोर्ट देनी है। अनुशंसा के अनुरूप जेपीएससी-जेएसएससी में तैनाती होगी। अधिसूचना में कहा गया है कि आयोगों की संवैधानिक व वैधानिक स्वायत्तता को अक्षुण्ण रखते हुए वहां पदस्थापित अधिकारियों व कमर्चारियों की सेवा शर्त एवं नियुक्ति प्रक्रिया तय होगी। पर दो सप्ताह बीत जाने के बाद भी कमेटी ने बैठक नहीं की है। संवाद पोर्टल पर 8500 सुझाव मिले, आगे कुछ नहीं हुआ छात्र आंदोलन के बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने छात्रहित में एक बड़ा कदम उठाया था। मुख्यमंत्री ने संवाद पोर्टल लॉन्च किया था। कहा था कि इस पोर्टल पर छात्र अपनी समस्या और सुझाव रख सकते हैं। परीक्षा सुधारों से संबंधित छात्रों की बात-छात्रों के साथ अभियान के तहत इस पोर्टल पर अगस्त के तीसरे सप्ताह तक 8500 से अधिक सुझाव मिले। इनमें ओएमआर आधारित परीक्षाएं, निश्चित परीक्षा कैलेंडर, स्कोर कार्ड और पारदर्शिता बढ़ाने जैसे बिंदु हैं। लेकिन इस पर आगे की कार्रवाई नहीं हुई। इधर, एक महीने से जेपीएससी निष्क्रिय, न अध्यक्ष और न ही सदस्य की नियुक्ति हुई जेपीएससी में सीआईडी की छापेमारी के बाद तत्कालीन अध्यक्ष एल ख्यांगते ने 22 जुलाई को इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद 9 अगस्त को तीनों सदस्यों ने भी इस्तीफा दे दिया। तब से इन पदों पर नियुक्ति नहीं हुई है। कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग ने इस संबंध में प्रस्ताव बनाकर कैबिनेट को भेज दिया है। 17 अगस्त को भेजे गए प्रस्ताव में अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति पर बल तो दिया गया है, पर कोई नाम नहीं सुझाया गया है। लेकिन इस पर भी अब तक कोई फैसला नहीं हुआ है।
जेपीएससी-जेएसएससी परीक्षा में सुधार की कवायद ढीली:प्रणाली में सुधार के लिए 18 अगस्त को कमेटी बनाने की अधिसूचना जारी हुई थी
