Friday, September 11, 2026

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दो दिनों बाद भी नहीं मिला फॉल में डूबा छात्र:पटना से आई NDRF की टीम, सुबह से रेक्स्यू अभियान जारी; नहाने के दौरान हुआ था हादसा


कोडरमा जिले के तिलैया थाना क्षेत्र में स्थित वृंदाहा झरने में बुधवार को एक छात्र डूब गया था। बिहार के जहानाबाद से अपने शिक्षक के साथ शैक्षणिक भ्रमण पर आया सागर नाम का यह छात्र नहाते समय पानी में डूबा था। इस घटना को अब दो दिन बीत चुके हैं, लेकिन सागर का अब तक कोई सुराग नहीं मिला है। सागर के लापता होने से उसके परिवार में काफी उदासी छाई छाई है। हालांकि, जिला प्रशासन ने पटना से NDRF की टीम को गुरुवार देर शाम बुला लिया। शुक्रवार सुबह से रेस्क्यू शुरू कर दिया गया है। देर शाम घटनास्थल का जायजा लिया इससे पहले NDRF की टीम देर शाम तिलैया के वृंदाहा पहुंची और घटनास्थल का जायजा लिया। NDRF के अधिकारियों ने बताया कि पानी का बहाव तेज होने और अंधेरा होने की वजह से सागर को ढूंढने का काम शुक्रवार को शुरू किया गया। जैसे-जैसे सागर के मिलने में देरी हो रही है, उसके परिवार का धैर्य टूटता जा रहा है। अपने दो बेटों में से बड़े बेटे सागर को खोने के गम में मां के आंसू नहीं रुक रहे हैं। पिता भी लगातार इस उम्मीद में हैं कि शायद उनका सागर सही-सलामत वापस आ जाए। पिता ने घूमने जाने से कर दिया था मना सागर के पिता राजेश दास ने बताया कि 8 सितंबर को जब सागर ने उनसे घूमने जाने को कहा तो उन्होंने मना कर दिया था। लेकिन सागर की लगातार जिद के बाद उन्होंने कोचिंग संचालक राजेश केशरी से बात की। शिक्षक राजेश केशरी ने बताया कि कोचिंग के सभी बच्चे इस ट्रिप पर जा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि वे गया के आसपास के इलाकों में घूमकर देर शाम तक लौट आएंगे। शिक्षक ने बच्चों की पूरी सुरक्षा का भरोसा भी दिलाया था। शिक्षक द्वारा दिए गए भरोसे पर राजेश दास अपने पुत्र सागर को कोचिंग संचालक के साथ भेजने को तैयार हुए थे। इधर, बुधवार को दोपहर करीब 12:30 बजे उन्हें शिक्षक ने फोन कर बताया कि सागर कहीं लापता हो गया है। इसके बाद वे अपने परिवार के साथ गया पहुंचे और शिक्षक से बात की। जिसपर शिक्षक ने उन्हें बताया कि वे तो कोडरमा पहुंच चुके हैं। सागर एक मेधावी छात्र था: पिता
बताते चलें कि सागर के पिता राजेश दास जहानाबाद (बिहार) में टोटो चलाकर अपने परिवार का भरण पोषण करते हैं। उन्होंने बताया कि सागर एक मेधावी छात्र था। उन्हें अपने पुत्र से बहुत सारी उम्मीदें थीं। उन्हें यह हमेशा लगता था कि सागर की वजह से आने वाले भविष्य में उनके दिन बहुरेंगे। लेकिन सागर का यूं असमय चले जाने की पीड़ा को वे जीवन भर नहीं भुला पाएंगे।

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