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दरभंगा के कुशेश्वरस्थान पूर्वी प्रखंड में कोसी का जलस्तर बढ़ गया है। प्रखंड की 9 पंचायतों में से 3 पंचायतें बाढ़ से घिरी हैं। नदी किनारे बसे गांवों और घरों तक बाढ़ का पानी पहुंचने लगा है। खेतों में पानी भरने से मकई और धान की फसलें बर्बाद हो गई है। स्थिति यह है कि पशुओं के लिए हरा चारा जुटाने को लोगों को 20 से 25 किलोमीटर दूर तक जाना पड़ रहा है। वहां से ट्रैक्टर से हरा चारा लाकर मवेशियों को खिलाया जा रहा है। लोग अपने मवेशियों को सुरक्षित रखने के लिए ऊंचे स्थानों की तलाश कर रहे हैं। कई परिवारों ने बांध और अन्य ऊंचे स्थानों पर अस्थायी तौर पर डेरा डालना शुरू कर दिया है। संभावित खतरे को देखते हुए ग्रामीण अपनी नावों की मरम्मत कराने और उन्हें सुरक्षित रखने में जुटे हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर आवागमन और लोगों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने में इसका इस्तेमाल किया जा सके। घरों में घुसा पानी, बच्चों के भोजन की चिंता
बाढ़ पीड़ित चंद्रकला देवी ने बताया कि घरों में पानी घुस गया है। बच्चों के खाने तक की परेशानी हो गई है। खेतों में बाढ़ का पानी आने से मकई और धान की फसल बर्बाद हो गई है। पानी लगातार बढ़ रहा है। घर में ही पानी घुस गया है। परिवार को कहां रखें, यह समझ में नहीं आ रहा है। चंद्रकला देवी ने बताया कि हमलोग ऊंचे स्थान की तलाश में हैं और बांध पर सहारा लिया है। सरकार से रहने और खाने की व्यवस्था कराने की मांग की। उनका कहना था कि अब तक प्रशासन की ओर से ऐसी व्यवस्था नहीं की गई है। बच्चों की स्थिति खराब है और परिवार के सामने भोजन का संकट खड़ा हो गया है। छह महीने तक पानी से जूझते हैं नदी किनारे के लोग
स्थानीय निवासी संजय राय ने बताया कि नेपाल से कोसी और करेह नदी में काफी पानी आया है, जिसके कारण खेतों में लगी फसल पूरी तरह डूब गई है। नदी किनारे बसे गांवों और घरों तक बाढ़ का पानी पहुंच गया है। नदी से दूर बसे कुछ गांव फिलहाल सुरक्षित हैं। उन्होंने बताया कि नदी में करीब एक महीने पहले से पानी है, लेकिन पिछले करीब 10 दिनों से जलस्तर लगातार बढ़ रहा है।
संजय राय ने बताया कि क्षेत्र में बड़ी संख्या में लोगों के पास मवेशी हैं। मवेशियों के पालन के लिए दूर-दराज के इलाकों से घास काटकर लानी पड़ रही है। भूसा भी खरीदकर खिलाना पड़ रहा है। इससे पशुपालकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। कुशेश्वरस्थान पूर्वी का इलाका दरभंगा जिले के सबसे निचले क्षेत्रों में है। कोसी नदी का पानी यहां हर साल बड़ी समस्या पैदा करता है। ग्रामीणों का कहना है कि साल के करीब छह महीने तक उन्हें किसी न किसी रूप में पानी की समस्या झेलनी पड़ती है। तीन पंचायतें बाढ़ प्रभावित, 10 सरकारी नाव उपलब्ध
कुशेश्वरस्थान पूर्वी के प्रखंड विकास पदाधिकारी प्रभा शंकर मिश्रा ने बताया कि प्रखंड में कुल नौ पंचायतें हैं, जिनमें फिलहाल तीन पंचायतें बाढ़ से प्रभावित हुई हैं। प्रशासन की ओर से यातायात के लिए नावों की व्यवस्था की गई है। अब तक सरकारी स्तर पर 10 नाव उपलब्ध कराई गई हैं।
बाढ़ प्रभावित इलाकों में मवेशियों को ऊंचे और सुरक्षित स्थानों पर ले जाने के लिए कहा गया है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों, मुखिया और वार्ड सदस्यों से लगातार संपर्क बनाए रखा जा रहा है। किसी भी स्थान पर स्थिति गंभीर होने पर तत्काल प्रखंड प्रशासन की ओर से आवश्यक कदम उठाया जाएगा।
आपदा भवन और ऊंचे प्लेटफॉर्म तैयार
बीडीओ ने बताया कि लोगों को जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट करने के लिए ऊंचे प्लेटफॉर्म और आपदा भवन की व्यवस्था तैयार रखी गई है। इन स्थानों की स्थिति ठीक है। यदि पानी और बढ़ता है या लोगों को घरों से बाहर निकालने की आवश्यकता पड़ती है तो उन्हें सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जाएगा।
उन्होंने बताया कि अंचलाधिकारी लगातार क्षेत्र का निरीक्षण और स्थिति की निगरानी कर रहे हैं। मवेशियों के लिए चारे की व्यवस्था भी अंचलाधिकारी के स्तर से की जा रही है। प्रशासन की नजर बाढ़ प्रभावित इलाकों पर बनी हुई है।
बीडीओ प्रभा शंकर मिश्रा ने बताया कि फिलहाल स्थिति भयावह नहीं है। इसी कारण अभी सामुदायिक स्तर पर लोगों को शिफ्ट करने या कम्युनिटी किचन शुरू करने की जरूरत नहीं पड़ी है। हालांकि प्रशासन ने इसकी तैयारी कर रखी है। यदि पानी इसी तरह बढ़ता रहा और लोगों को घरों से बाहर निकालना पड़ा तो तत्काल कम्युनिटी किचन शुरू किया जाएगा।
लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है कुशेश्वरस्थान पूर्वी के अंचलाधिकारी राकेश रोशन भारती ने बताया कि फिलहाल प्रखंड की तीन पंचायतें बाढ़ के दायरे में हैं। प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और संबंधित अधिकारी क्षेत्र की मॉनिटरिंग कर रहे हैं।
सीओ ने बताया कि प्रशासन संभावित स्थिति को देखते हुए पूरी तरह अलर्ट है। आवश्यकता पड़ने पर प्रभावित लोगों के लिए सामुदायिक रसोई की व्यवस्था की जाएगी। फिलहाल स्थिति ऐसी नहीं है कि बड़े स्तर पर कम्युनिटी किचन शुरू करने की जरूरत पड़े।
कुशेश्वरस्थान पूर्वी की 9 में 3 पंचायतें बाढ़ से घिरी:25 किमी दूर से मवेशियों के लिए ला रहे चारा, ऊंचे ठिकाने की तलाश में पीड़ित
