Wednesday, September 16, 2026

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नालंदा में 45 स्कूलों के बेंच-डेस्क की फिर होगी जांच:हरनौत में 779 और नूरसराय में 526 की आपूर्ति का दावा; 7 दिन में रिपोर्ट मांगी गई


नालंदा जिले के सरकारी स्कूलों में बच्चों के बैठने के लिए खरीदे गए बेंच-डेस्क की आपूर्ति को लेकर मिल रही शिकायतों के बीच उप विकास आयुक्त (डीडीसी) सारा अशरफ ने जांच के आदेश दिए हैं। नूरसराय और हरनौत प्रखंड के स्कूलों में आपूर्ति किए गए बेंच-डेस्क की स्थिति की जांच के लिए वरीय अधिकारी की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय टीम गठित की गई है। टीम को सात दिनों के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट जिला शिक्षा कार्यालय को सौंपने का निर्देश दिया गया है। हरनौत के 22 और नूरसराय के 23 स्कूल जांच के दायरे में जारी आदेश के मुताबिक, आपूर्ति एजेंसी शाही ट्रेडर्स ने हरनौत प्रखंड के 22 स्कूलों में 779 और नूरसराय प्रखंड के 23 स्कूलों में 526 बेंच-डेस्क की आपूर्ति करने का दावा किया है। अब टीम दोनों प्रखंडों के कुल 45 स्कूलों में जाकर इन दावों का स्थल पर सत्यापन करेगी। जांच के दौरान स्कूलों में मौजूद बेंच-डेस्क की संख्या का मिलान आपूर्ति के रिकॉर्ड से किया जाएगा। इसके साथ ही बेंच-डेस्क में इस्तेमाल की गई सामग्री और उनकी गुणवत्ता की भी जांच होगी। ई-शिक्षाकोष के रिकॉर्ड से भी होगा मिलान मामले में ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर दर्ज आंकड़ों को लेकर भी सवाल उठे हैं। विभागीय सूत्रों के अनुसार, कुछ स्कूलों में पोर्टल पर बेंच-डेस्क की पूरी आपूर्ति दर्ज है, जबकि स्कूल में सामान उपलब्ध नहीं होने की शिकायत है। ऐसे में जांच टीम पोर्टल पर दर्ज आंकड़ों और स्कूल में मौजूद बेंच-डेस्क का मिलान करेगी। शिकायतों के अनुसार, कुछ जगह बच्चों को बेंच-डेस्क नहीं मिलने के कारण नीचे बैठकर पढ़ाई करनी पड़ रही है, जबकि ऑनलाइन रिकॉर्ड में आपूर्ति पूरी दिखाई गई है। टीम इस अंतर की भी जांच करेगी। विधानसभा में भी उठ चुका है मामला बेंच-डेस्क की खरीद और आपूर्ति का मामला पहले भी विधानसभा में उठ चुका है। अस्थावां विधायक डॉ. जितेंद्र कुमार ने इस मुद्दे को विधानसभा में उठाया था। इसके बाद मुख्यमंत्री कार्यालय के निर्देश पर तत्कालीन जिलाधिकारी शशांक शुभंकर ने छह सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच टीम गठित की थी। पिछली जांच में अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल पूर्व में तत्कालीन डीडीसी श्रीकांत कुंडलिक खांडेकर की जांच का भी इस मामले में उल्लेख किया गया था। उस जांच में तत्कालीन जिला शिक्षा पदाधिकारी और डीपीओ की भूमिका को लेकर सवाल उठे थे। एक लिपिक के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई भी की गई थी। वहीं, उस समय आपूर्ति एजेंसी से राशि की वसूली कर मामले को समाप्त करने की कोशिश किए जाने के आरोप भी सामने आए थे। अब नूरसराय और हरनौत के 45 स्कूलों में नए सिरे से जांच के आदेश के बाद आपूर्ति की वास्तविक स्थिति, गुणवत्ता और रिकॉर्ड में दर्ज आंकड़ों का मिलान किया जाएगा।

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