Sunday, September 20, 2026

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युवाओं को डोकरा ब्रॉन्ज, बांस शिल्प और ईवी की ट्रेनिंग देगा जिला प्रशासन


भास्कर न्यूज | दुमका दुमका। जिले में अब कौशल विकास कार्यक्रम स्थानीय जरूरत और रोजगार की संभावनाओं को देखकर तैयार किए जाएंगे। उपायुक्त अभिजीत सिन्हा ने शनिवार को जिला कौशल विकास समिति की बैठक में कहा कि प्रशिक्षण सिर्फ औपचारिकता बनकर न रह जाए, बल्कि युवाओं को बाजार की मांग के अनुरूप तैयार किया जाए। उन्होंने डोकरा ब्रांज और एडवांस्ड बैम्बू प्रोडक्ट के लिए विशेष प्रशिक्षण कराने का निर्देश दिया। बैठक में उपायुक्त ने विभिन्न विभागों के पदाधिकारियों से उनके क्षेत्र में कौशल विकास की जरूरतों की जानकारी ली। सभी विभागों को ऐसे कार्यों और गतिविधियों को चिन्हित करने का निर्देश दिया गया, जहां स्किल सपोर्ट की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि विभागवार जरूरतों और सुझावों का संकलन कर समन्वित कार्ययोजना बनाई जाए, ताकि जिले में रोजगारपरक प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रभावी ढंग से चलाए जा सकें। डीसी ने जिले की पारंपरिक कला और स्थानीय उत्पादों को रोजगार से जोड़ने पर खास जोर दिया। उन्होंने कहा कि स्थानीय कारीगरों और युवाओं को आधुनिक डिजाइन, तकनीक, गुणवत्ता, उत्पाद विकास, पैकेजिंग और बाजार की मांग के अनुरूप प्रशिक्षित किया जाए। इससे स्थानीय हुनर को बेहतर बाजार मिलेगा और आय के अवसर बढ़ेंगे। बैठक में इलेक्ट्रिक वाहनों के बढ़ते उपयोग को देखते हुए ईवी सेक्टर में कौशल विकास की जरूरत पर भी चर्चा हुई। उपायुक्त ने निर्देश दिया कि ईवी वाहनों की तकनीकी समस्याओं के समाधान, रखरखाव और मरम्मत से जुड़े प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जाएं। उन्होंने कहा कि भविष्य में इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग और बढ़ेगा, ऐसे में युवाओं को इस उभरते क्षेत्र में रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ा जा सकता है। जिले में माइनिंग क्षेत्र की जरूरतों को देखते हुए भी कौशल विकास कार्यक्रम तैयार करने को कहा गया। उपायुक्त ने कहा कि क्षेत्र में उपलब्ध रोजगार की संभावनाओं और तकनीकी आवश्यकताओं के अनुरूप युवाओं को प्रशिक्षित किया जाए, ताकि स्थानीय स्तर पर ही कुशल मानव संसाधन उपलब्ध हो सके। आदिवासी युवाओं को लेकर उपायुक्त ने कहा कि उनकी मौजूदा क्षमता, रुचि और स्थानीय हुनर को ध्यान में रखकर प्रशिक्षण दिया जाए। उनके पारंपरिक ज्ञान और कौशल को आधुनिक तकनीक और रोजगार के अवसरों से जोड़ा जाए। प्रशिक्षण कार्यक्रमों में स्थानीय कला, हस्तशिल्प, कृषि आधारित गतिविधियों, तकनीकी कार्यों और उभरते रोजगार क्षेत्रों को प्राथमिकता देने का निर्देश दिया गया।

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