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उग्रवादी संगठन तृतीय सम्मेलन प्रस्तुति कमेटी (टीएसपीसी) सुप्रीमो ब्रजेश गंझू उर्फ गोपाल सिंह भोक्ता को यूपी एटीएस ने रविवार को वाराणसी में मुठभेड़ में मार गिराया। उस पर एनआईए ने पांच लाख और झारखंड पुलिस ने 25 लाख रुपए का इनाम घोषित कर रखा था। पिछले 20 साल से वह सुरक्षा एजेंसियों को चकमा देकर फरार चल रहा था। मुठभेड़ के दौरान उसका एक साथी फरार हो गया, जिसकी तलाश जारी है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक यूपी एटीएस को सूचना मिली थी कि ब्रजेश गंझू वेश बदलकर यूपी में दाखिल होने की फिराक में है। इसके बाद मिर्जापुर, सोनभद्र और वाराणसी सीमा पर निगरानी बढ़ा दी गई। रविवार को सूचना मिली की वह अपने साथ के साथ वाराणसी पहुंच चुका है और रामनगर थाना क्षेत्र के लंका मैदान की ओर बढ़ रहा है। एटीएस ने लंका मैदान की घेराबंदी की। इसी दौरान जीटी रोड की तरफ से एक बाइक पर दो संदिग्ध आते दिखे। रुकने का इशारा किया तो उन्होंने फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में गंझू को गोली लगी। पुलिस उसे लेकर तत्काल अस्पताल पहुंची, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। वह चतरा के लावालौंग थाना क्षेत्र के लुट्टू सोहावन गांव का रहने वाला था। उस पर हत्या, अपहरण, रंगदारी सहित 45 मामले दर्ज थे। ब्रजेश गंझू…14 साल की उम्र में नक्सली बना, राजनीति में भी थी धमक ब्रजेश गंझू 14 साल की उम्र में नक्सली संगठन के बाल दस्ते में शामिल हुआ था। 2004 में क्सलियों के खिलाफ समानांतर संगठन टीएसपीसी खड़ा किया। इस संगठन ने चतरा, रांची, हजारीबाग, रामगढ़, पलामू, लातेहार और बिहार के कुछ जिलों में गतिविधियां बढ़ाईं। वह टीएसपीसी का निर्विवाद सर्वोच्च कमांडर बन बैठा। जंगलों में भूमिगत होने से पहले उसने राजनीति में भी पैठ बनाई। 2010 में वह लावालौंग पंचायत के लुट्टू वार्ड से िनर्विरोध वार्ड पार्षद बना। इसके बाद लावालौंग पंचायत का निर्विरोध मुखिया चुना गया। इसके बाद 2015 में हुए पंचायत चुनाव में वह निर्विरोध पंचायत समिति सदस्य बना। ब्रजेश पर दर्ज कुल 45 केस में 18 लेवी व रंगदारी, 13 आर्म्स एक्ट व 5 हत्या के ब्रजेश के खिलाफ चतरा और आसपास के विभिन्न थानों में 45 केस दर्ज हैं। उसने रंगदारी, हथियारों की तस्करी और हत्या के जरिए अपना साम्राज्य खड़ा किया। उस पर दर्ज 45 केस में से 18 रंगदारी और जबरन वसूली के हैं। इनमें चतरा, टंडवा, पिपरवार व सिमरिया के वे मामले हैं, जिनमें कोयला खनन व परिवहन कंपनियों और ठेकेदारों को जान से मारने की धमकी देकर लेवी वसूली जाती थी। इसके अलावा 13 मामले आर्म्स एक्ट के और 5 मामले हत्या के हैं। अब 10 लाख का इनामी जोनल कमांडर आरिफ व 1 लाख का इनामी सुदेश ही बचे सुप्रीमो ब्रजेश के मारे जाने के साथ ही कभी चतरा-पलामू कोल बेल्ट में आतंक का पर्याय रहे उग्रवादी संगठन टीएसपीसी की कमर पूरी तरह टूट चुकी है। संगठन के शीर्ष व सक्रिय कैडरों के लगातार खात्मे और गिरफ्तारी के बाद अब इस गिरोह में केवल दो ही चेहरे बचे हैं। इनमें पलामू के मनातू निवासी 10 लाख का इनामी जोनल कमांडर आरिफ जी उर्फ शशिकांत और चतरा के लावालौंग निवासी 1 लाख का इनामी सक्रिय सदस्य सुदेश गंझू उर्फ गुरुदेव शामिल हैं। इन दोनों की भी घेराबंदी बढ़ा दी गई है। मगध और आम्रपाली कोल परियोजना में प्रति टन के हिसाब से वसूलता था लेवी ब्रजेश गंझू सिर्फ उग्रवादी संगठन का सरगना ही नहीं था, बल्कि झारखंड में फैले करोड़ों रुपए के संगठित टेरर फंडिंग और हथियारों की तस्करी के सिंडिकेट का एक बड़ा संचालक भी था। एनआईए को दो सबसे संवेदनशील केस (आरसी-06/2018 और आरसी-22/2018) में उसकी तलाश थी। टेरर फंडिंग और अवैध असलहों के इस घातक गठजोड़ के कारण ही एनआईए ने उस पर पांच लाख रुपए का इनाम घोषित कर रखा था। जांच एजेंसी के मुताबिक पहला मामला मगध-आम्रपाली कोल टेरर फंडिंग नेटवर्क (आरसी-06/2018) से जुड़ा है। यह मामला टंडवा थाने में वर्ष 2016 में दर्ज हुआ था। नक्सली फंडिंग के व्यापक दायरे को देखते हुए एनआईए ने 2018 में इस केस को टेकओवर किया था। जांच में पता चला कि मगध-आम्रपाली कोल परियोजनाओं में खनन, परिवहन और लिफ्टिंग से जुड़े ठेकेदारों, ट्रांसपोर्टरों व कोल कंपनियों के अधिकारियों से टीएसपीसी के उग्रवारी भारी लेवी वसूलते थे। ब्रजेश गंझू उगाही तंत्र का मास्टरमाइंड था। उसके इशारे में प्रति टन कोयले पर तय कमीशन वसूली जाती थी। एनआईए इस मामले में चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। -शेष पेज 8 पर
30 लाख के इनामी उग्रवादी का एनकाउंटर:TSPC सुप्रीमो ब्रजेश गंझू को यूपी एटीएस ने मार गिराया

