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महापर्व में घर आने और उसके बाद लौटने वालों के लिए नियमित ट्रेनों में सीट पाना मुश्किल महापर्व छठ पर घर आने और उसके बाद काम पर लौटने वाले प्रवासियों के लिए ट्रेनों में सीट पाना नामुमकिन-सा हो गया है। रेलवे आरक्षण प्रणाली पर टिकट माफियाओं का कब्जा इस कदर हावी है कि अब तत्काल ही नहीं, 60 दिन पहले खुलने वाली नियमित बुकिंग भी आम मुसाफिरों की पहुंच से बाहर हो चुकी है। मंगलवार सुबह जैसे ही छठ बाद वापसी (21 नवंबर) के लिए बुकिंग विंडो खुली, महज 120 सेकंड के भीतर बिहार से दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और पुणे जाने वाली तमाम ट्रेनों की सीटें खत्म हो गईं और सीधे ‘नो रूम’ (रिग्रेट) हो गया। आम यात्री जब तक आईआरसीटीसी की स्क्रीन पर कैप्चा कोड भरते, तब तक सैकड़ों सीटें स्क्रीन से गायब हो चुकी थीं। हालत यह है कि पटना सहित पूरे बिहार से दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, पुणे, सिकंदराबाद, अहमदाबाद और चेन्नई जाने वाली किसी भी नियमित ट्रेन में कन्फर्म तो दूर, वेटिंग टिकट तक उपलब्ध नहीं है। अब तत्काल ही नहीं, 60 दिन पहले खुलने वाली नियमित बुकिंग भी आम मुसाफिरों की पहुंच से बाहर
जानबूझकर सर्वर स्लो करने का आरोप
पूर्व मध्य रेलवे के कॉमर्शियल विभाग के एक अधिकारी ने नाम उजागर नहीं करने की शर्त पर चौंकाने वाला खुलासा किया। बताया कि लगता है प्रोफेशनल एजेंटों को जानबूझकर सुपरफास्ट एक्सेस और स्पेशल सॉफ्टवेयर उपलब्ध कराया गया है। जबकि रेलवे के आधिकारिक पीआरएस काउंटरों का सर्वर जानबूझकर सुस्त कर दिया जाता है। 10 साल में बदले हालात : पटना जंक्शन पर 28 से घटकर 9 काउंटर रह गए
काउंटर टिकट प्रणाली को किस तरह पंगु बनाया गया है, इसका गवाह खुद पटना जंक्शन का आरक्षण केंद्र है। एक वरिष्ठ रेल अधिकारी के अनुसार, एक दशक पहले तक व्यवस्था ऐसी थी कि लाइन में खड़े सामान्य यात्री को सुबह काउंटर खुलते ही कंफर्म टिकट मिल जाता था। तब 28 काउंटर थे। अब महज 9 काउंटर बचे हैं। इस बार स्पेशल ट्रेनें 3000 से अधिक फेरे लगाएंगी
दीपावली-छठ को लेकर दबाव की वजह से ऐसी स्थिति है। सभी राज्यों में बिहार के लोग रहते हैं और दीपावली-छठ में आते हैं। टिकट विंडो ओपन होने से पहले ही ताक में रहते हैं और जैसे ही विंडो खुलता है, सारे टिकट बुक हो जाते हैं। एक टिकट कटने के लिए स्टैंडर्ड टाइम 40 सेकेंड का है। लेकिन, जो अब तक टिकट नहीं ले पाए हैं, उनके लिए फिलहाल 3000 फेरे स्पेशल ट्रेने चलाने की घोषणा हो चुकी है। जरूरत पड़ने पर यह संख्या और बढ़ाई जाएगी।-सरस्वती चंद्र, सीपीआरओ, पूर्व मध्य रेल
छठ के बाद वापसी:बुकिंग विंडो खुलते ही 120 सेकंड में फुल हो गईं ट्रेनें
