
Election Symbol Dispute: कलकत्ता हाइकोर्ट के न्यायाधीश कृष्ण राव ने सोमवार को एक बार फिर उपचुनाव के लिए इंडियन सेक्युलर फ्रंट (आईएसएफ) को ‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न नहीं देने में निर्वाचन आयोग (ईसीआई) की भूमिका पर नाराजगी जाहिर की. हाईकोर्ट ने सुनवाई के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया. जस्टिस कृष्ण राव ने कहा कि अगर चुनाव आयोग पक्षपातपूर्ण तरीके से काम करता है, तो अदालत के पास करने को क्या बचता है? आयोग का निर्णय निष्पक्ष होना चाहिए. अगर यह चुनाव चिह्न किसी को भी आवंटित नहीं किया जाता, तो कोई विवाद नहीं होता. एक स्वतंत्र सिंबल ठीक है, लेकिन आपने इसे किसी अन्य को क्यों आवंटित किया? आपने वह चुनाव चिह्न, जिसे एक पार्टी ने विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए इस्तेमाल किया था, दूसरी पार्टी को क्यों दे दिया?
एक पार्टी को 2 बार से ज्यादा ‘फ्री सिंबल’ नहीं : ECI
कोर्ट में चुनाव आयोग ने जवाब दिया कि किसी राजनीतिक पार्टी को एक ही ‘फ्री सिंबल’ 2 बार से ज्यादा आवंटित नहीं किया जा सकता. कोई चुनाव चिह्न किसी की संपत्ति नहीं है. जहां कोई कानूनी अधिकार नहीं है, वहां दावा कैसे किया जा सकता है? सुनवाई के दौरान, चुनाव आयोग के वकील जिष्णु चौधरी ने कहा कि आयोग ने विधानसभा चुनाव से पहले 23 फरवरी को एक पत्र के जरिये आईएसएफ को इसकी जानकारी दी थी.
ISF को 2 बार मिल चुका है ‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न
आईएसएफ ने 26 फरवरी को ‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न के लिए आवेदन किया था. उन्हें 10 मार्च को विधानसभा चुनाव के लिए यह चुनाव चिह्न आवंटित कर दिया गया. 7 सितंबर को उपचुनाव की घोषणा हुई. उपचुनाव में सिंबल उतने जरूरी नहीं होते, जितने विधानसभा चुनाव में होते हैं.
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आयोग को भविष्य की जटिलताओं को ध्यान में रखकर फैसले लेने चाहिए : जस्टिस राव
चुनाव आयोग के वकील की दलील सुनने के बाद जस्टिस कृष्ण राव ने कहा कि चुनाव आयोग को भविष्य की जटिलताओं को ध्यान में रखकर फैसले लेने चाहिए. आयोग को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि इसका बोझ अदालत पर न पड़े. आयोग के वकील ने कहा कि 18 सितंबर 2026 को यह सिंबल डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस (Democratic Trinamool Congress) को आवंटित किया गया था, क्योंकि इस सिंबल पर किसी का अधिकार नहीं है, इसलिए इसे उसी पार्टी को आवंटित किया गया.
कोर्ट ने पूछा- किस प्रावधान के तहत अन्य पार्टी को आवंटित हुआ सिंबल?
इस पर जस्टिस राव ने कहा कि कानून के किस प्रावधान के तहत यह सिंबल आईएसएफ की बजाय किसी अन्य पार्टी को आवंटित किया गया? अगर दो पार्टियां एक ही सिंबल के लिए आवेदन करती हैं, तो यह उनमें से किसी एक को कैसे आवंटित किया जाता है? जस्टिस राव ने कहा- अगर चुनाव आयोग पक्षपातपूर्ण तरीके से काम करता है, तो अदालत क्या कर सकती है? आयोग का निर्णय निष्पक्ष होना चाहिए. आप एक संवैधानिक प्राधिकारी हैं. आपको सभी प्रश्नों के उत्तर देने के लिए तैयार रहना चाहिए.
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आलमारी चुनाव चिह्न के साथ प्रचार कर रहा आईएसएफ : आयोग
चुनाव आयोग के वकील ने कहा कि आईएसएफ आलमारी चुनाव चिह्न का इस्तेमाल करके प्रचार कर रहा है. यह मामला चुनाव प्रक्रिया को रोकने के इरादे से दायर किया गया है. जब इस दावे का कोई कानूनी अधिकार ही नहीं है, तो मामला कैसे दायर किया जा सकता है? सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया.
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