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बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही कार्रवाई में निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने एक ऐसे प्रशासनिक जोड़े के ठिकानों पर करारा प्रहार किया है। जिन्होंने आय से अधिक अकूत संपत्ति अर्जित किया। पटना के आपूर्ति अपर समाहर्ता (ADM Supply) रवींद्र कुमार दिवाकर और उनकी पत्नी दानापुर की सब रजिस्ट्रार कुमारी स्वीटी के पटना-बेगूसराय स्थित ठिकानों पर जब निगरानी की टीम ने एक साथ छापेमारी की, तो बड़ा खुलासा हुआ है। कोर्ट से सर्च वारंट प्राप्त करने के बाद शुरू हुई इस कार्रवाई में नोटों के बंडल, कीमती गहने, लग्जरी घड़ियां और करोड़ों की जमीन-जायदाद के दस्तावेज बरामद किए गए हैं। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने इस मामले में दोनों अधिकारियों के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज करते हुए निगरानी थाना कांड संख्या 113/26 के तहत प्राथमिकी दर्ज की थी। पटना से 70 लाख कैश बरामद शुरुआती जांच में विजिलेंस ने 1 करोड़ 6 लाख 85 हजार 900 रुपए की आय से अधिक संपत्ति का आकलन किया था। लेकिन दोनों अधिकारियों के ठिकानों पर सर्च ऑपरेशन शुरू हुआ, तो बरामद हुई संपत्तियों और नकदी ने इस आंकड़े को कहीं पीछे छोड़ दिया। छापेमारी के दौरान केवल पटना वाले आवास से लगभग 70 लाख रुपए नकद बरामद हुए, जबकि बेगूसराय स्थित ठिकाने से भी करीब 9 लाख रुपए कैश मिलने की पुष्टि हुई है। नकदी के इस अंबार के अलावा अधिकारियों के घर से 48 महंगी ब्रांडेड घड़ियां मिली हैं, जिनकी कीमत करीब 6 लाख रुपए आंकी गई है। जांच में सबसे बड़ा खुलासा दोनों पति-पत्नी द्वारा अपने और अपने परिजनों के नाम से खरीदी गई अचल संपत्तियों को लेकर हुआ है। निगरानी द्वारा जब्त किए गए दस्तावेजों के अनुसार इस दंपत्ति ने चेक अवधि के दौरान 2 करोड़ 92 लाख 85 हजार 900 रुपए की अचल संपत्ति अर्जित की है। जमीन और फ्लैट की खरीद में रणनीतिक निवेश दिखाया गया है। हाल ही में 3 फरवरी 2026 को दानापुर स्थित कश्यप ग्रीन होम्स के ब्लॉक ए में दो प्रीमियम फ्लैट एक ही दिन खरीदे गए थे। फ्लैट संख्या 402 को पत्नी कुमारी स्वीटी के नाम से 49 लाख 34 हजार रुपये में खरीदा गया (सेल डीड- 950)। जबकि ठीक उसके बगल का फ्लैट संख्या 401 स्वयं रवींद्र कुमार दिवाकर के नाम से 45 लाख 68 हजार 50 रुपये में खरीदा गया (सेल डीड- 949)। पटना में छापेमारी से जुड़ी तस्वीरें देखिए… फुलवारीशरीफ में कीमती जमीन खरीदी मात्र एक दिन में लगभग 95 लाख रुपए के फ्लैट खरीदकर इस दंपत्ति ने अपनी अथाह काली कमाई का नमूना पेश किया। पटना के फुलवारी शरीफ में जमीन के कई कीमती टुकड़ों की खरीद की गई। 18 दिसंबर 2021 को फुलवारी शरीफ में 3.9 डिसमिल के दो अलग-अलग भूखंड खरीदे गए। इनमें से पहला टुकड़ा कुमारी स्वीटी के नाम पर 51 लाख 73 हजार 50 रुपए (डीड- 15891) में और दूसरा टुकड़ा रवींद्र कुमार दिवाकर के नाम पर इतने ही मूल्य 51 लाख 73 हजार 50 रुपए (डीड- 15890) में पंजीकृत कराया गया। 31 अगस्त 2022 को फुलवारी शरीफ में ही 3.9 डिसमिल का एक और भूखंड रवींद्र कुमार दिवाकर के 75 वर्षीय पिता लखन लाल पासवान के नाम पर 44 लाख 19 हजार 50 रुपए में खरीदा गया, जिसका खाता और खेसरा पूर्व की जमीनों के समान ही है। कमाई को सुरक्षित करने के लिए बेगूसराय और बलिया में भी संपत्तियां बनाई गई। 10 जुलाई 2020 को बलिया में 20 डिसमिल जमीन 23 लाख 77 हजार 900 रुपये (डीड- 1234) में रवींद्र के नाम पर खरीदी गई थी। वहीं बेगूसराय में पिता लखन लाल पासवान द्वारा 19 जुलाई 2017 को 26 लाख 40 हजार 800 रुपए में खरीदी गई 4 डिसमिल जमीन को 15 जनवरी 2024 को डीड नंबर- 370 के माध्यम से रवींद्र कुमार दिवाकर के नाम पर गिफ्ट के रूप में स्थानांतरित करा दिया गया था। बेगूसराय में रेड से जुड़ी तस्वीरें… शिक्षक से प्रशासनिक करियर का सफर रवींद्र कुमार दिवाकर का प्रशासनिक करियर किसी फिल्मी पटकथा की तरह रहा है। पत्रकारिता करते हुए साल 2000 में शिक्षक के रूप में अपनी सेवा शुरू करने वाले रवींद्र ने सरकारी व्यवस्था की बारीकियों को समझा और फिर प्रशासनिक सेवा में प्रवेश किया। साल 2009 में वह सारण में जिला जनसंपर्क अधिकारी (DPRO) बने। इसके बाद 2010 से 2011 के दौरान वह कटिहार में अनुमंडलीय उप समाहर्ता (SDC) रहे। 2014 में दरभंगा में SDC के पद पर तैनात रहे, जिसके बाद 2018 में सहरसा में लोक शिकायत निवारण अधिकारी (PGRO) की जिम्मेदारी संभाली। 2020 में समस्तीपुर में अनुमंडल पदाधिकारी (SDM) बनने के बाद उनकी प्रशासनिक धमक और बढ़ी। 2023 में गयाजी और 2024 में पटना में SDC के पद पर कार्य करने के बाद अक्टूबर 2025 में उन्हें पटना का एडीएम सप्लाई (ADM Supply) जैसा महत्वपूर्ण पद सौंपा गया। पत्रकार, शिक्षक से लेकर एडीएम तक के इस सफर में जैसे-जैसे पद का दायरा बढ़ता गया, वैसे-वैसे कमाई भी फैलता चला गया। पत्नी की पहली पोस्टिंग 2013 में हुई थी रवींद्र कुमार दिवाकर की पत्नी कुमारी स्वीटी भी प्रशासनिक व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रही हैं। 2013 बैच की सब-रजिस्ट्रार कुमारी स्वीटी की पहली तैनाती 2013 से 2017 तक तेघड़ा में रही। इसके बाद 2017 से 2021 तक वह हवेली खड़गपुर में तैनात रहीं। साल 2021 से 2024 के दौरान सकरा में सब-रजिस्ट्रार रहने के बाद 2024 में उनकी तैनाती पटना के बेहद महत्वपूर्ण और व्यावसायिक रूप से कीमती इलाके दानापुर में अवर निबंधक के रूप में हुई। रजिस्ट्री कार्यालय में सब-रजिस्ट्रार का पद सीधे तौर पर जमीनों की खरीद-बिक्री और उसके मूल्यांकन से जुड़ा होता है। जांच एजेंसी को अंदेशा है कि पत्नी के सब-रजिस्ट्रार होने के कारण जमीनों के इस बड़े खेल को अंजाम देना और संपत्तियों को ठिकाने लगाना इनके लिए बेहद आसान हो गया था। रेड के दौरान अधिकारियों को कई बैंक के पासबुक, फिक्स्ड डिपॉजिट के कागजात, शेयर बाजार एवं म्यूचुअल फंड में निवेश के दस्तावेज और सोने-चांदी के आभूषण मिले हैं। अब बैंक लॉकरों का पता लगाया जा रहा है, जिन्हें खंगालने के बाद संपत्ति का दायरा और भी बढ़ सकता है। बिहार में किसी एडीएम और सब-रजिस्ट्रार दंपत्ति पर विजिलेंस का यह अब तक का सबसे बड़ा एक्शन माना जा रहा है, जिसने राज्य के प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। इधर, बेगूसराय जिला मुख्यालय के पोखरिया में जहां रविंद्र कुमार दिवाकर का पैतृक आवास है, वहां आसपास के रहने वाले लोगों के बीच भी तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। है।
ADM पति और सब-रजिस्ट्रार पत्नी के घर कुबेर का खजाना:पटना से बेगूसराय तक विजिलेंस की रेड; 79 लाख कैश और 3 करोड़ की अचल संपत्ति का खुलासा
