![]()
गोपालगंज की गंडक नदी के उफान से तटीय और दियारा इलाकों में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। सदर, बैकुंठपुर, कुचायकोट, मांझा, बरौली और सिधवलिया प्रखंडों की 20 से अधिक पंचायतें आंशिक या पूर्ण रूप से प्रभावित हैं। दियारा और निचले इलाकों के 30 से अधिक गांव पानी से घिरे हैं। करीब 25 हजार की आबादी जलजमाव, आवागमन बाधित होने और विस्थापन की समस्या से जूझ रही है। घर डूबे, तटबंधों पर शरण लेने को मजबूर ग्रामीण सदर प्रखंड के मेहंदिया, जागीरी टोला, खाप मकसूदपुर समेत कई गांवों में घरों में पानी घुस गया है। लोगों के अनाज, कपड़े, बच्चों की किताब-कॉपी और घरेलू सामान पानी में डूबकर खराब हो गए हैं। कई परिवार भीगे सामान को लेकर ऊंचे स्थानों और तटबंधों पर शरण लेने को मजबूर हैं। सदर प्रखंड के 10 गांवों में ही 1200 से अधिक परिवार सीधे प्रभावित बताए जा रहे हैं। जमींदारी बांध टूटा, शीतलपुर-पकहा में तेजी से फैला पानी बैकुंठपुर के शीतलपुर और पकहा के बीच गंडक के उफान से एक जमींदारी बांध टूट गया है। इसके बाद शीतलपुर और आसपास के इलाकों में पानी तेजी से फैल रहा है। मुख्य सारण तटबंध पर मुंजा मटियारी के पास पानी का भारी दबाव बना हुआ है। कई स्थानों पर रैट होल और सीपेज की सूचना के बाद जल संसाधन विभाग की टीमें बालू की बोरियां डालकर मरम्मत में जुटी हैं। 200 से अधिक जवान तटबंधों की निगरानी में सारण तटबंध और छड़की की सुरक्षा के लिए 150 से 200 से अधिक होमगार्ड जवानों और चौकीदारों को संवेदनशील स्थानों पर तैनात किया गया है। जवान रात में पेट्रोलिंग के साथ 24 घंटे निगरानी कर रहे हैं। जल संसाधन विभाग के कनीय और सहायक अभियंता भी पैदल और बाइक से तटबंधों का निरीक्षण कर रहे हैं। मंगलपुर पुल और पताहरा छड़की के आसपास कटावरोधी कार्यों पर भी नजर रखी जा रही है। नावों से राहत-बचाव, तटबंधों पर पहुंचाए जा रहे लोग बाढ़ प्रभावित गांवों में आवागमन के लिए नावें चलाई जा रही हैं। SDRF और स्थानीय पुलिस की नावें राहत और बचाव कार्य में लगाई गई हैं। एसडीएम और अंचलाधिकारी दियारा इलाकों में माइकिंग कर लोगों से सुरक्षित स्थानों और तटबंधों पर जाने की अपील कर रहे हैं। तटबंधों पर शरण लेने वाले परिवारों के लिए प्रशासन की ओर से सूखा राशन और अन्य जरूरी व्यवस्थाएं की जा रही हैं। दूषित पानी और पशु चारे का संकट बाढ़ के कारण नल-जल योजना और चापाकल जलमग्न हो गए हैं। इससे ग्रामीणों के सामने शुद्ध पेयजल का संकट खड़ा हो गया है। खेतों और निचले इलाकों का हरा चारा डूब जाने से मवेशियों के लिए भी चारे की समस्या गंभीर हो गई है। ग्रामीण प्रशासन से सूखा राशन, पॉलिथीन शीट, पशु चारा और राहत शिविर की व्यवस्था की मांग कर रहे हैं। सड़कें डूबीं, आठ स्कूलों में पढ़ाई बंद कई गांवों को जिला मुख्यालय से जोड़ने वाली सड़कें दो से तीन फीट पानी में डूब गई हैं। मांझा प्रखंड की निमुइया, गौसिया और भैसही पंचायतों के आठ सरकारी स्कूलों में पानी प्रवेश करने के कारण ताला लग गया है। बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो, इसके लिए इन विद्यालयों को सुरक्षित पंचायतों के नजदीकी स्कूलों से टैग किया गया है। जलमग्न प्राथमिक विद्यालय निमुइया के भवन का उपयोग ग्रामीण मवेशियों और परिवारों के लिए अस्थायी शरण स्थल के रूप में भी कर रहे हैं। बराज से डिस्चार्ज घटा, एक-दो दिन में सुधार की उम्मीद हालांकि राहत की बात यह है कि वाल्मीकिनगर बराज से गंडक नदी में छोड़े जा रहे पानी का डिस्चार्ज स्तर कम हुआ है। इससे प्रशासन और ग्रामीणों को अगले एक-दो दिनों में स्थिति में सुधार की उम्मीद है। पानी घटने पर प्रभावित परिवारों के अपने घरों को लौटने की संभावना है। तटबंध में रिसाव दिखे तो इस नंबर पर दें सूचना जल संसाधन विभाग ने लोगों से तटबंध पर किसी भी तरह के रिसाव या कटाव की सूचना तत्काल देने की अपील की है। इसके लिए टोल-फ्री हेल्पलाइन 1800-3456-145 जारी की गई है।
गंडक का कहर- '30 से ज्यादा गांव पानी से घिरे':25 हजार लोग प्रभावित; 8 स्कूलों में ताला; तटबंधों पर 200 जवानों की निगरानी
