
कोलकाता: राज्य मानवाधिकार आयोग (एचआरसी) ने विधायक कुणाल घोष पर हुए बार-बार हमलों के मामले में पुलिस की भूमिका पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की है. आयोग के अध्यक्ष, पूर्व न्यायमूर्ति आईपी मुखर्जी ने बुधवार को सुनवाई के दौरान आयोग के आदेश के बावजूद संबंधित पुलिस स्टेशन के प्रभारी अधिकारियों (ओसी) के उपस्थित न होने पर घोर आक्रोश जताया है.
अधिकारियों को भेजें दस्तावेज
अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि प्रशासनिक स्तर पर ऐसा रवैया लोकतंत्र के लिए बिल्कुल भी अनुकूल नहीं है. आयोग को आदेश दिया गया है कि वह इस पूरे मामले की तत्काल जांच करे और आयोग के आदेश की एक प्रति राज्य प्रशासन के उच्च अधिकारियों – मुख्य सचिव और गृह सचिव को भेजें.
पुलिस कर्मियों को भी गया था आयोग का समन
बेलेघाटा विधायक कुणाल घोष पर बार-बार हुए हमलों के मद्देनजर, मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष ने बुधवार की सुनवाई में सभी पक्षों को शारीरिक रूप से उपस्थित रहने का आदेश दिया था. विधायक कुणाल घोष निर्देशानुसार समय पर उपस्थित हुए, उनके साथ परिषद के पूर्व महापौर वैश्वानर चटर्जी भी थे.
अनुपस्थित पुलिस अधिकारी
बेलेघाटा और कालीघाट के दो पुलिस थानों के प्रभारी अधिकारियों में से कोई भी सुनवाई में उपस्थित नहीं हुआ. हालांकि दोनों पुलिस थानों के कार्यवाहक अधिकारियों ने अनुपस्थिति का कारण बताते हुए ईमेल भेजे, लेकिन आयोग ने इस पर नाराजगी व्यक्त की, क्योंकि ईमेल में बिल्कुल वही बातें लिखी थीं.
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साजिश की आशंका, जांच पर संदेह
अध्यक्ष ने आयोग के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद पुलिस की अनुपस्थिति को दुर्भाग्यपूर्ण बताया और साथ ही टिप्पणी की कि इसके पीछे किसी बड़ी साजिश के संकेत हो सकते हैं. इसके साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि यदि स्थानीय पुलिस ने ठीक से जांच नहीं की, तो निष्पक्ष जांच के लिए आयोग आवश्यकता पड़ने पर किसी अन्य राज्य की पुलिस से भी जांच कराने की पहल करेगा.
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