भास्कर न्यूज| चाईबासा ईश्वर चंद्र विद्यासागर जयंती के मौके पर 30 सितंबर को कोलकाता के गड़िया में नाट्य दल ने विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम किया। नाट्य संध्या में कथावाचक और रंगकर्मी दिनकर शर्मा ने एडगर एलन पो की रचना ‘दिल की आवाज’ की एकल नाट्य प्रस्तुति दी। प्रस्तुति ने दर्शकों को बांधे रखा। कहानी का ताना-बाना गंभीर रहा। दिनकर शर्मा ने आंगिक भाषा का प्रभाव दिखाया। संवाद अदायगी सधी रही। अभिनय जीवंत रहा। पूरी कहानी उन्होंने अकेले मंच पर निभाई। कोई सह-कलाकार नहीं था। यही आयोजन का मुख्य आकर्षण बना। कार्यक्रम के अंत में अन्य मुख नाट्य दल ने दिनकर शर्मा की सराहना की। दर्शकों ने भी तारीफ की। दर्शकों ने कहा कि तकनीकी दौर में रंगमंच और दर्शकों का जुड़ाव चुनौतियों में है। ऐसे प्रयोग सीख देते हैं। प्रेरणा देते हैं। अकेले मंच संभालकर गंभीर नाट्य प्रस्तुति को जीवंत करना एक मिसाल है। आयोजकों ने कहा कि ऐसे साहसिक और रचनात्मक प्रयास युवा रंगकर्मियों को प्रेरित करेंगे। रंगमंच समृद्ध होगा। रंगमंच जीवित रहेगा। समापन पर दिनकर शर्मा ने आमंत्रण, मंच और आयोजन के लिए अन्य मुख नाट्य दल का आभार जताया।
