
दीपावली और छठ पूजा पर अपने गांव-घर लौटने का सपना देख रहे लाखों प्रवासियों के लिए एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आई है. अगर आप भी दिल्ली-एनसीआर, मुंबई या देश के अन्य प्रमुख शहरों से भागलपुर, बांका या पूरे अंग प्रदेश लौटने की योजना बना रहे हैं, तो रेलवे की यह स्थिति आपकी परेशानी बढ़ा सकती है. अभी दुर्गा पूजा की शुरुआत भी नहीं हुई है, लेकिन ट्रेनों में दीपावली और छठ पूजा के लिए टिकटों को लेकर हाहाकार मच चुका है.
स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि 3 अक्टूबर से लेकर 13 नवंबर तक आनंद विहार टर्मिनल से भागलपुर आने वाली लगभग सभी प्रमुख ट्रेनों में वेटिंग टिकट मिलना भी बंद हो गया है और रेलवे की ओर से 'नो रूम' का स्टेटस दिख रहा है. यानी अब आप वेटिंग टिकट भी काउंटर या ऑनलाइन बुक नहीं कर सकते हैं. आइए जानते हैं कि इस टिकट संकट के पीछे की वजह क्या है, आम लोगों पर इसका क्या असर पड़ रहा है और छठ के बाद वापसी की राह कितनी मुश्किल नजर आ रही है.
विक्रमशिला, गरीब रथ और अंग एक्सप्रेस में 'No Room', प्रवासियों की बढ़ीं मुश्किलें
बिहार के बाहर रहकर अपनी मेहनत-मजदूरी और नौकरी करने वाले लोगों के लिए छठ पूजा केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि अपनी मिट्टी से जुड़ने की अटूट भावना है. हर प्रवासी छठ पूजा में अपने घर हर हाल में पहुंचना चाहता है. लेकिन हर बार की तरह इस बार भी टिकटों की भारी किल्लत ने उनकी राह रोक दी है. आनंद विहार से भागलपुर आने वाली डाउन विक्रमशिला एक्सप्रेस इस रूट की सबसे महत्वपूर्ण ट्रेन मानी जाती है, जिसमें साल भर भीड़ रहती है. लेकिन 3 अक्टूबर से लेकर 13 नवंबर तक इस ट्रेन में स्लीपर से लेकर एसी बोगियों तक में 'नो रूम' की स्थिति बन गई है.
इसके अलावा गरीब रथ एक्सप्रेस, दादर एक्सप्रेस और अंग एक्सप्रेस जैसी प्रमुख ट्रेनों में भी 3 अक्टूबर से 13 नवंबर तक सीटें पूरी तरह से फुल हो चुकी हैं. सितंबर महीने में जब लोगों ने एडवांस बुकिंग कराई थी तो कम से कम वेटिंग टिकट मिल रहा था, लेकिन अब वेटिंग टिकट का भी जुगाड़ होना नामुमकिन हो चुका है.
छठ के बाद लौटने की राह भी कठिन, 17 नवंबर से 20 दिनों तक ट्रेनों में कंफर्म सीट नहीं
मुसीबत केवल घर आने तक सीमित नहीं है, बल्कि त्योहार मनाकर वापस अपने कर्मक्षेत्र पर लौटने की राह भी उतनी ही दुश्वारियों से भरी है. छठ पूजा संपन्न होने के बाद जो लोग फिर से अपने काम पर लौटने की तैयारी में हैं, उन्हें जाने के समय भी कंफर्म टिकट नहीं मिल पा रहा है. भागलपुर से खुलने वाली विक्रमशिला एक्सप्रेस, गरीब रथ, अंग एक्सप्रेस और तेजस राजधानी एक्सप्रेस जैसी महत्वपूर्ण ट्रेनों में 17 नवंबर से लेकर अगले 20 दिनों तक कंफर्म सीटें उपलब्ध नहीं हैं.
इन ट्रेनों में वापसी के लिए भी वेटिंग टिकटों की भारी मारामारी चल रही है. आलम यह है कि पूरे नवंबर महीने में यात्रियों के इस भारी दबाव के कारण रेलवे का हेडक्वार्टर (HO) कोटा भी बेअसर साबित हो जाता है और आम रेल यात्रियों की सिफारिशें भी धरी की धरी रह जाती हैं.
तत्काल टिकट के नाम पर ब्रोकरों की चांदी, एक टिकट पर दो हजार रुपये से अधिक की अवैध वसूली
ट्रेनों में रेगुलर सीटों का कोटा पूरी तरह से खत्म होने के बाद अब आम यात्रियों की आखिरी आस केवल 'तत्काल टिकट' पर टिकी हुई है. लेकिन इस मजबूरी का सीधा फायदा टिकट दलाल और ब्रोकर उठा रहे हैं. दीपावली और छठ में घर आने वाले लाचार प्रवासियों को कंफर्म सीट दिलाने का झांसा देकर दलाल एक-एक तत्काल टिकट पर दो हजार रुपये से भी अधिक का अतिरिक्त कमीशन वसूल रहे हैं.
जैसे दीपावली और छठ की तारीखें और करीब आती जाएंगी, दलालों का यह रेट और ज्यादा बढ़ने की आशंका है. मजबूरी में लोग अपनी गाढ़ी कमाई दलालों की जेब में डालने को विवश हो रहे हैं, जबकि रेलवे का दावा और दलाली रोकने की योजनाएं जमीनी स्तर पर ध्वस्त नजर आ रही हैं.
प्रशासनिक जवाबदेही और आगे का रास्ता, पूजा स्पेशल ट्रेनों के ऐलान का इंतजार
हर साल त्योहारों के दौरान दिल्ली-भागलपुर रूट पर होने वाली इस भारी भीड़ का अंदाजा रेल प्रशासन को पहले से होता है, फिर भी समय रहते अतिरिक्त ट्रेनों की व्यवस्था न होना प्रशासनिक ढिलाई को दर्शाता है. भागलपुर और आसपास के क्षेत्रों के यात्रियों की मांग है कि पूर्व रेलवे और रेलवे बोर्ड तत्काल संज्ञान लेते हुए आनंद विहार और दिल्ली मार्ग पर कई जोड़ी पूजा स्पेशल और छठ स्पेशल ट्रेनें चलाए. जब तक पर्याप्त संख्या में विशेष ट्रेनों का परिचालन शुरू नहीं किया जाता और तत्काल टिकटों की कालाबाजारी पर नकेल नहीं कसी जाती, तब तक प्रवासियों की यह पीड़ा कम नहीं होगी. फिलहाल लाखों प्रवासी इसी उम्मीद में हैं कि रेलवे जल्द ही नई स्पेशल ट्रेनों की घोषणा करे ताकि वे अपने परिजनों के साथ त्योहार की खुशियां बांट सकें.
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