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राज्य सरकार ने कोर्ट में सौंपी सीलबंद रिपोर्ट, आज भी सुनवाई रांची झारखंड हाईकोर्ट में जेएसएससी सीजीएल, जेपीएससी 11वीं से 13वीं, फूड इंस्पेक्टर, सीडीपीओ नियुक्ति परीक्षाओं को रद्द करने के राज्य सरकार के आदेश को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई हुई। जस्टिस दीपक रोशन की अदालत में करीब 3 घंटे तक लंबी सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से परीक्षा से संबंधित सीलबंद रिपोर्ट सौंपी गई। सरकार की ओर से वरीय अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा और महाधिवक्ता ने परीक्षा रद्द करने के फैसले को सही ठहराया। उन्होंने कहा कि परीक्षा में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी हुई है। सीआईडी के अनुसंधान में इसकी पुष्टि भी हो रही है। इस मामले में अब तक 28 से अधिक लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है, यह संख्या बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि जांच में परीक्षा में अनियमितता के साथ वित्तीय लेनदेन के तथ्य भी सामने आए हैं। मामले की जांच अभी जारी है। ऐसे में दोषी और निर्दोष अभ्यर्थियों को अलग-अलग करना संभव नहीं है। परीक्षा की पूरी प्रक्रिया प्रभावित हुई है, इसलिए इसे रद्द करना जरूरी है। इस पर अदालत ने साफ किया कि परीक्षा में अनियमितता के आरोप के आधार पर सभी सफल अभ्यर्थियों को एक नजर से गलत नहीं ठहराया जा सकता।
जानिए…कोर्ट रूम में किसने क्या दी दलील याचिकाकर्ताओं का दावा: सेंटर से पेपर लीक के प्रमाण नहीं प्रार्थियों की ओर से वरीय अधिवक्ता इन्द्रजीत सिन्हा ने कहा कि सरकार द्वारा परीक्षा को रद्द करना सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना है। हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट पहले ही निर्देश दे चुका है कि दोषी और निर्दोष में फर्क किया जाए और नियुक्ति का मामला आपराधिक मुकदमे के परिणाम से जुड़ा रहेगा। ऐसे में पूरी परीक्षा रद्द करना उचित नहीं है। अभी तक जांच पूरी नहीं हुई है और आरोप पत्र भी दाखिल नहीं हुआ है। फिर पूरी धांधली का निष्कर्ष कैसे निकाला गया? वहीं, अधिवक्ता राजीव रंजन ने कहा कि किसी परीक्षा केंद्र से प्रश्नपत्र लीक होने का प्रमाण नहीं मिला है। यह पेपर लीक नहीं, बल्कि संभावित प्रश्नों को रटाने का मामला है।
कोर्ट ने कहा: लगता है सरकार ने दबाव में आकर परीक्षा रद्द की राज्य सरकार ने 18 अगस्त की देर रात टीडीपीएल से जुड़ी परीक्षाओं समेत अन्य परीक्षाओं को रद्द करने की घोषणा की थी। साथ ही वर्ष 2014 से हुई नियुक्ति परीक्षाओं में संभावित अनियमितता की भी जांच कराने का निर्णय लिया गया। इसके बाद कार्मिक प्रशासनिक विभाग ने अधिसूचना जारी कर 22 परीक्षाएं रद्द कर दी थीं। 6 की प्रक्रिया स्थगित और 17 परीक्षाओं को जांच के दायरे में रखा है। सरकार की इस दलील पर अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसा लगता है कि सरकार ने दबाव में आकर परीक्षाओं को रद्द कर दिया। 2700 सफल अभ्यर्थियों के साथ न्याय जरूरी अदालत ने कहा कि जिन अभ्यर्थियों ने मेरिट के आधार पर सफलता हासिल की है, उनके साथ भी न्याय होना जरूरी है। करीब ढाई साल से मामले का अनुसंधान चल रहा है। राज्य को लंबे समय तक अधिकारियों के बिना नहीं छोड़ा जा सकता। करीब 2700 सफल अभ्यर्थियों के साथ न्याय जरूरी है। जो अभ्यर्थी मेरिट से नियुक्त होकर आए हैं, उन्हें इस तरह नुकसान नहीं होने दिया जा सकता। अदालत ने मामले की सुनवाई जारी रखते हुए गुरुवार को सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी। सुनवाई के दौरान प्रार्थियों की ओर से वरीय अधिवक्ता इन्द्रजीत सिन्हा, राजीव रंजन, अमृतांश वत्स सहित अन्य ने पक्ष रखा।
राज्य सरकार ने कोर्ट में सौंपी सीलबंद रिपोर्ट:सीजीएल में गड़बड़ी हुई, 28 से ज्यादा गिरफ्तारी, इसलिए परीक्षा रद्द: सरकार
