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तीन प्रखंडों के 5 हजार घरों में नहीं पहुंचा पानी, टंकी बनी, पाइप बिछी पर नल सूखे


जिले के ठेठईटांगर, कोलेबिरा और कुरडेग प्रखंड में नल-जल योजनाओं पर करोड़ों रुपए खर्च होने और पाइपलाइन व टंकी जैसी आधारभूत संरचना तैयार होने के बावजूद ग्रामीणों को नियमित पेयजल नहीं मिल पा रहा है। कहीं योजना शुरू ही नहीं हुई, कहीं वर्षों से फिल्टर प्लांट बंद है तो कहीं जलमीनार का निर्माण अधूरा पड़ा है। इससे पांच हजार से ज्यादा परिवारों के घरों तक नल पहुंचने के बावजूद पानी नहीं पहुंच सका है। ठेठईटांगर और जोराम पंचायत में जल जीवन मिशन के तहत पानी टंकी और पाइपलाइन का काम होने के बाद भी नियमित जलापूर्ति शुरू नहीं हो सकी है। करीब दो हजार परिवारों को योजना का लाभ मिलना था। कई स्थानों पर पाइपलाइन में लीकेज के कारण पानी घरों तक पहुंचने के बजाय सड़क और गलियों में बह रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों पहले बनी संरचना के बावजूद उन्हें अब भी वैकल्पिक जलस्रोतों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। कोलेबिरा प्रखंड मुख्यालय पंचायत में कोलेबिरा डैम से पानी लेकर पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के कार्यालय में फिल्टर करने के बाद सप्लाई देने की व्यवस्था बनाई गई थी। लेकिन फिल्टर प्लांट कई वर्षों से बंद है। फिल्टरिंग नहीं होने से योजना के अनुसार लोगों को पानी नहीं मिल पा रहा है। एसएस प्लस टू हाईस्कूल में बोरिंग से बनी दूसरी व्यवस्था से करीब 30 प्रतिशत आबादी को पानी मिल रहा है, लेकिन इसके लिए भी लोगों को काफी मशक्कत करनी पड़ती है। ग्रामीणों का आरोप है कि विभागीय अभियंताओं की नियमित अनुपस्थिति के कारण शिकायतों का समाधान नहीं हो पाता। करीब एक हजार परिवार अब भी अपने घर तक स्वच्छ पेयजल के इंतजार में हैं। कुरडेग में चार साल से अधूरी जलमीनार कुरडेग प्रखंड मुख्यालय के स्थित आठ बस्तियों की लगभग 10 हजार आबादी को घर-घर नल से पानी उपलब्ध कराने के लिए वर्ष 2022 में बड़ी जलमीनार की योजना शुरू की गई थी। मुख्य पाइपलाइन गांवों तक पहुंच चुकी है और घरों में नल भी लगाए जा चुके हैं, लेकिन जलमीनार का निर्माण अब तक पूरा नहीं हुआ। कुरडेग, परकला, झिरकामुंडा, सरफमुंडा, छाताकाहू, खालीजोर, लबडेरा और बड़कीबिऊरा समेत गांवों के डेढ़ हजार परिवार योजना पूरी होने का इंतजार कर रहे हैं। संरचना बनी, जलापूर्ति की व्यवस्था नहीं तीनों प्रखंडों की स्थिति में एक समानता यह है कि पेयजल योजना का ढांचा तैयार होने के बाद भी नियमित संचालन नहीं हो पा रहा है। कहीं लीकेज है, कहीं फिल्टर बंद है और कहीं टंकी अधूरी है। ग्रामीणों की मांग है कि विभाग तकनीकी खामियों को दूर कर लंबित कार्य पूरा करे और योजनाओं को नियमित रूप से चालू कर घरों तक पानी पहुंचाए।

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