
Bhagalpur Biada Ghat Steamer Stuck: भागलपुर में गंगा नदी का जलस्तर तेजी से घटने के कारण जल परिवहन व्यवस्था पर बड़ा संकट खड़ा हो गया है. रविवार की दोपहर बियाडा घाट पर एक ऐसा वाकया हुआ जिससे नवगछिया जाने वाले सैकड़ों यात्रियों की सांसें अटक गईं. यात्रियों और करीब 200 बाइक सवारों से भरा एक स्टीमर पानी कम होने की वजह से किनारे की दलदली मिट्टी में बुरी तरह फंस गया और जेटी तक नहीं पहुंच सका.
चिलचिलाती धूप और नदी के बीचों-बीच फंसे यात्रियों का समय बीतने के साथ सब्र टूटने लगा. दोपहर तीन बजे रवाना होने वाला यह स्टीमर करीब 45 मिनट तक मिट्टी में फंसा रहा, जिसके बाद घाट पर घंटों तक अफरा-तफरी और खींचतान का माहौल बना रहा.
टिकट के पैसे कटे पर नहीं मिला रास्ता, जेटी तक नहीं पहुंच पाया टाइडल वेव्स
यह पूरी घटना बियाडा घाट के जेटी संख्या दो की है. जानकारी के अनुसार, नवगछिया की तरफ जाने वाले यात्रियों को नदी पार कराने के लिए टाइडल वेव्स नाम का बड़ा जहाज लगाया जाना था. जहाज के संचालकों ने यात्रा से पहले ही सभी यात्रियों और बाइक चालकों से टिकट के पैसे वसूल लिए थे.
लेकिन जैसे ही टाइडल वेव्स जहाज किनारे की ओर बढ़ा, गंगा का जलस्तर काफी कम होने के कारण वह तट के पास बिछी गाद और मिट्टी में जाकर फंस गया. पानी का स्तर इतना कम था कि जहाज रैंप तक पहुंच ही नहीं सका. इसके कारण न तो जहाज पर खड़ी गाड़ियों को उतारा जा सका और न ही घाट पर खड़े बाइक सवारों को जहाज पर चढ़ाने की कोई व्यवस्था बन पाई.
दूसरी कंपनी ने हाथ खींचने से बढ़ी मुसीबत, संचालकों के बीच जमकर खींचतान
जब टाइडल वेव्स जहाज पूरी तरह मिट्टी में धंस गया और निकलने में नाकाम रहा, तो स्थिति को संभालने के लिए यात्रियों को दूसरी निजी कंपनी के जहाज से भेजने की कोशिश शुरू की गई. लेकिन यहां संचालकों का व्यावसायिक विवाद आड़े आ गया और दोनों कंपनियों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई.
दूसरी कंपनी के संचालकों ने साफ इनकार करते हुए कहा कि जब यात्रियों से किराया पहली कंपनी ने वसूला है, तो उन्हें गंतव्य तक सुरक्षित पहुंचाने की पूरी नैतिक और कानूनी जिम्मेदारी भी उसी की है. इस आपसी खींचतान और नाकामी का खामियाजा घाट पर अपनी बाइकों के साथ खड़े सैकड़ों बेबस यात्रियों को भुगतना पड़ा, जो तेज धूप में फंसे अपनी बारी का इंतजार करते रहे.
प्रशासनिक अधिकारियों ने कराया हस्तक्षेप, जेटी नंबर तीन से रवाना हुए यात्री
घाट पर हंगामा और यात्रियों का गुस्सा बढ़ता देख स्थिति बेकाबू होने लगी. इसकी सूचना मिलते ही जिला नियंत्रण कक्ष और पास के अस्थायी पुलिस थाने के अधिकारी तुरंत मौके पर पहुंचे. प्रशासनिक अधिकारियों ने सख्त रवैया अपनाते हुए दोनों कंपनियों के संचालकों को फटकार लगाई और यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने का निर्देश दिया.
अधिकारियों के कड़े हस्तक्षेप के बाद किसी तरह पहली कंपनी के जहाज को मिट्टी से निकालकर जेटी संख्या तीन पर ले जाया गया. इसके बाद अफरा-तफरी के बीच दोपहर तीन बजे के बजाय करीब 3:45 बजे यात्रियों और गाड़ियों को चढ़ाकर नवगछिया के लिए रवाना किया जा सका. तब जाकर यात्रियों ने राहत की सांस ली.
जलस्तर में गिरावट बनी बड़ी चुनौती, आगे की स्थिति और व्यवस्था पर सवाल
गंगा के जलस्तर में हो रही लगातार गिरावट ने भागलपुर और नवगछिया के बीच चलने वाले जल परिवहन की पोल खोलकर रख दी है. भागलपुर शहर को नवगछिया और आसपास के ग्रामीण इलाकों से जोड़ने के लिए यह स्टीमर सेवा बेहद महत्वपूर्ण लाइफलाइन मानी जाती है. रोजाना सैकड़ों लोग नौकरी, व्यापार और निजी काम से इस पार से उस पार जाते हैं.
अगर समय रहते घाटों पर गाद हटाने और पानी के प्रवाह के अनुसार जेटी को सही गहराई में शिफ्ट करने का इंतजाम नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में यात्रियों की परेशानी और बढ़ सकती है. इस घटना ने जिला प्रशासन और जहाजों का संचालन करने वाली एजेंसियों की दूरदर्शिता और आपातकालीन तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
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