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पश्चिम चंपारण के सागर पोखरा परिसर में सोमवार को जिला मत्स्य-जीवी संघ ने प्रेस वार्ता कर बिहार जलकर प्रबंधन अधिनियम, 2006 के संशोधित प्रावधानों का विरोध किया। संघ ने इन बदलावों को पारंपरिक मछुआरों के हितों के खिलाफ बताते हुए वापस लेने की मांग की। प्रेस वार्ता की अध्यक्षता प्रो. शिवशंकर निषाद ने की। मछुआरों की आजीविका पर असर की आशंका संघ के प्रतिनिधियों ने कहा कि जलकर प्रबंधन नियमों में बदलाव से पारंपरिक मछुआरों और उनकी समितियों पर सीधा असर पड़ेगा। जीविका और स्वयं सहायता समूहों को मत्स्य समूहों से जोड़ने की व्यवस्था से मछुआरों के पारंपरिक रोजगार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। पुरानी बंदोबस्ती व्यवस्था बहाल करने की मांग संघ ने सरकार से जलकर बंदोबस्ती की पुरानी व्यवस्था बहाल करने की मांग की। प्रतिनिधियों का कहना था कि मत्स्य पालन से जुड़ी सरकारी योजनाओं का लाभ ठेकेदारों के बजाय वास्तविक मछुआरों और उनकी समितियों को मिलना चाहिए, ताकि पारंपरिक मछुआरा समुदाय की आजीविका सुरक्षित रह सके। सरकार से बातचीत करने की अपील संघ ने सरकार से संशोधित प्रावधानों पर दोबारा विचार करने और मछुआरा समुदाय के प्रतिनिधियों से बातचीत करने की अपील की। संगठन का कहना है कि नियमों में बदलाव करते समय पारंपरिक मछुआरों के हितों और उनकी आजीविका को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। मांगें नहीं मानीं तो पटना में धरना संघ ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं हुई, तो पूरे बिहार में विरोध-प्रदर्शन किया जाएगा। इसके साथ ही पटना में धरना देने की भी घोषणा की गई। संघ ने सरकार से विवादित प्रावधानों को वापस लेकर मछुआरा समुदाय के हित में निर्णय लेने की मांग की है।
मछुआरा संघ बोला-'पुरानी बंदोबस्ती व्यवस्था बहाल हो':जलकर प्रबंधन अधिनियम के संशोधित प्रावधानों के खिलाफ उतरा मत्स्य-जीवी संघ
