
Tarapur ITI Principal Complaint: मुंगेर जिले के तारापुर औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (ITI) में प्राचार्य और कार्यालय परिचारी के बीच विवाद का मामला विभागीय जांच के बाद निष्पादित कर दिया गया है. कार्यालय परिचारी विक्रम कुमार ने प्राचार्य शशि कुमार मंडल पर जूठे बर्तन धुलवाने, गाड़ी और शौचालय साफ कराने, एक लाख रुपये सेवा शुल्क मांगने और जातिसूचक गाली देने जैसे गंभीर आरोप लगाये थे. बिहार सरकार के युवा, रोजगार व कौशल विभाग की जांच में इन आरोपों के समर्थन में साक्ष्य नहीं मिले. हालांकि, जांच में यह भी पाया गया कि पर्याप्त कारण के बिना और संबंधित परिचारी का पक्ष लिये बगैर उनकी सेवा लौटाने की कार्रवाई मानवीय गरिमा के विरुद्ध थी. इस मामले में विभाग ने प्राचार्य को भविष्य में सचेत रहकर काम करने का निर्देश दिया है.
यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसमें एक ओर आउटसोर्सिंग पर कार्यरत कर्मचारी ने कार्यस्थल पर कथित दुर्व्यवहार और जातिसूचक टिप्पणी की शिकायत की, तो दूसरी ओर प्राचार्य ने कर्मचारी पर अनुशासनहीनता और ड्यूटी में लापरवाही के आरोप लगाये. विभागीय जांच में शिकायत के मुख्य आरोप प्रमाणित नहीं हुए, लेकिन कर्मचारी की सेवा वापस करने की कार्रवाई पर सवाल उठे.
परिचारी ने पोर्टल पर दर्ज करायी थी शिकायत, लगाये थे गंभीर आरोप
तारापुर ITI में उर्मिला इंटरनेशनल सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड के माध्यम से कार्यरत कार्यालय परिचारी विक्रम कुमार ने ई-कम्पलांयस डैशबोर्ड पोर्टल पर शिकायत दर्ज करायी थी. शिकायत का संदर्भ संख्या TS 2026000071 है. इसमें उन्होंने संस्थान के प्राचार्य शशि कुमार मंडल पर कई आरोप लगाये थे.
विक्रम कुमार के अनुसार, प्राचार्य उनसे एक लाख रुपये सेवा शुल्क की मांग करते थे. उन्होंने आरोप लगाया कि उनसे जूठे बर्तन धोने, गाड़ी साफ करने और शौचालय की सफाई करने को कहा जाता था. इसके अलावा इलेक्ट्रिशियन वर्कशॉप की ढलाई तोड़ने और दिन-रात दोनों समय ड्यूटी करने का दबाव बनाने का भी आरोप लगाया गया.
शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया था कि उन्होंने स्वयं के महादलित होने का उल्लेख करते हुए प्राचार्य से परेशान नहीं करने का अनुरोध किया था. इसके बावजूद प्राचार्य ने कथित तौर पर जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया और बिना पैसे दिये संस्थान में नहीं रहने देने की बात कही.
इन आरोपों की गंभीरता को देखते हुए बिहार सरकार के युवा, रोजगार व कौशल विभाग ने मामले पर संज्ञान लिया और प्राचार्य से जवाब मांगा.
प्राचार्य ने कहा- परिचारी करते थे गलत भाषा का इस्तेमाल, हॉस्टल में सो जाते थे
विभाग ने 25 अगस्त 2026 को प्राचार्य शशि कुमार मंडल से मामले में प्रतिवेदन मांगा था. प्राचार्य ने 27 अगस्त 2026 को अपना पक्ष विभाग को उपलब्ध कराया.
अपने जवाब में प्राचार्य ने शिकायतकर्ता के आरोपों को स्वीकार नहीं किया. उन्होंने कहा कि कार्यालय परिचारी विक्रम कुमार कक्षा और कर्मशाला में आकर अपने अधिकार क्षेत्र के विपरीत भाषा का इस्तेमाल करते थे.
प्राचार्य के अनुसार, संस्थान के कार्यालय आदेश के तहत 1 नवंबर 2025 को विक्रम कुमार को पूरे संस्थान परिसर की सुरक्षा के लिए रात्रि प्रहरी का कार्य सौंपा गया था. उन्होंने आरोप लगाया कि परिचारी अक्सर ड्यूटी के दौरान स्टाफ हॉस्टल में सो जाते थे और बिना अनुमति दूसरे कर्मियों के कमरे खोलकर वहां सोते थे.
प्राचार्य ने यह भी बताया कि कार्य में लापरवाही और संस्थान के कर्मियों की शिकायतों के आधार पर 2 दिसंबर 2025 को पत्र जारी कर विक्रम कुमार को उनकी आउटसोर्सिंग एजेंसी उर्मिला इंटरनेशनल सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड, पटना में वापस उपस्थित होने के लिए कहा गया था. उनके अनुसार, मुंगेर के श्रम अधीक्षक के निर्देश पर विक्रम कुमार वर्तमान में फिर तारापुर ITI में कार्यरत हैं.
जांच में जातिसूचक टिप्पणी और पैसे मांगने के आरोपों का साक्ष्य नहीं मिला
शिकायत और प्राचार्य के जवाब के आधार पर विभाग ने मामले की जांच उपनिदेशक प्रशिक्षण, भागलपुर से करायी. उपनिदेशक ने 16 सितंबर 2026 को जांच रिपोर्ट विभाग को सौंप दी.
जांच रिपोर्ट में कहा गया कि परिचारी से उनके निर्धारित कार्य के अलावा दूसरे काम कराने, जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करने और सेवा शुल्क के रूप में एक लाख रुपये मांगने से संबंधित आरोपों के समर्थन में साक्ष्य नहीं मिले. इसी आधार पर जांच समिति ने प्राचार्य को इन आरोपों से मुक्त किये जाने की अनुशंसा की.
इसका अर्थ यह है कि विभागीय जांच में शिकायतकर्ता के प्रमुख आरोप प्रमाणित नहीं हुए. हालांकि, जांच का एक दूसरा पहलू भी सामने आया, जिसमें परिचारी की सेवा वापस करने की प्रक्रिया पर आपत्ति दर्ज की गयी.
एक रात हॉस्टल में सोने पर सेवा लौटाना मानवीय गरिमा के विरुद्ध
जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि परिचारी के एक रात स्टाफ हॉस्टल में सो जाने और कक्षा संचालन के दौरान बीच क्लास में खड़े हो जाने की बात सामने आयी थी. इसके बावजूद उनका पक्ष प्राप्त किये बिना और पर्याप्त कारण के अभाव में आउटसोर्सिंग पर कार्यरत कर्मचारी की सेवा वापस कर दी गयी.
समिति ने इस कार्रवाई को मानवीय गरिमा के विरुद्ध माना और प्राचार्य के इस कदम को मनमाना बताया. यानी शिकायत के मुख्य आरोपों का साक्ष्य नहीं मिलने के बावजूद जांच में यह सवाल बना रहा कि कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई करते समय निर्धारित प्रक्रिया और उसके पक्ष को उचित महत्व दिया गया था या नहीं.
इस पहलू ने मामले को केवल प्राचार्य और परिचारी के बीच विवाद तक सीमित नहीं रखा, बल्कि कार्यस्थल पर आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के साथ व्यवहार और उनके विरुद्ध कार्रवाई की प्रक्रिया पर भी ध्यान खींचा.
Tarapur ITI Principal Complaint: संयुक्त सचिव के आदेश से मामला निष्पादित, प्राचार्य को किया गया सचेत
जांच रिपोर्ट के आधार पर युवा, रोजगार व कौशल विभाग ने मामले का निष्पादन कर दिया है. विभाग के संयुक्त सचिव आशुतोष कुमार ने इस संबंध में आदेश जारी किया. आदेश में प्राचार्य शशि कुमार मंडल को भविष्य में सचेत रहकर कार्य करने का निर्देश दिया गया है.
इस मामले में प्राचार्य के विरुद्ध लगाये गये जूठे बर्तन धुलवाने, जातिसूचक टिप्पणी करने और सेवा शुल्क मांगने जैसे आरोप जांच में प्रमाणित नहीं हुए. वहीं, पर्याप्त कारण और कर्मचारी का पक्ष लिये बिना उसकी सेवा वापस करने की कार्रवाई को जांच समिति ने अनुचित माना.
विभागीय आदेश के बाद फिलहाल यह मामला निष्पादित हो गया है. इस प्रकरण से यह सवाल भी सामने आता है कि संस्थानों में आउटसोर्सिंग पर कार्यरत कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करते समय उनकी बात सुनने और उचित प्रक्रिया अपनाने की जिम्मेदारी कितनी महत्वपूर्ण है.
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