भास्कर न्यूज | इटखोरी इटखोरी प्रखंड के करनी चौक पर मां दुर्गा की आराधना की 59 वर्षों पुरानी परंपरा जारी है। वर्ष 1967 में शुरू हुई दुर्गा पूजा अब भव्य आयोजन बन चुकी है। इस वर्ष सार्वजनिक दुर्गा पूजा समिति ने यहां भव्य पंडाल बनवाया है। पंडाल में आकर्षक विद्युत सज्जा की गई है। नवमी और विजयादशमी के मेले में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने की उम्मीद है। मेले के लिए पर्याप्त जमीन उपलब्ध है।करनी की दुर्गा पूजा का इतिहास संघर्ष, सहयोग, आस्था से जुड़ा है। वर्ष 1966 में अकाल के बाद ग्रामीणों में सामूहिक पूजा की भावना जगी। वर्ष 1967 में पूर्व मुखिया भुवनेश्वर सिंह, सेवानिवृत्त शिक्षक जयकृष्ण प्रसाद, ग्रामीणों की पहल पर पूजा शुरू हुई। भुवनेश्वर सिंह के मुताबिक उस समय पक्का मंडप नहीं था। ग्रामीणों ने मिट्टी की दीवार खड़ी की। खजूर के पेड़ की लकड़ियों से ढांचा बनाया। खपरे की छत डालकर मंडप तैयार किया। इसी मंडप में मां दुर्गा समेत अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमाएं स्थापित की गईं। पूजा-अर्चना शुरू हुई। ग्रामीणों ने आठ आना और चार आना के हिसाब से चंदा जुटाया। 500 रुपये में पूजा संपन्न हुई। प्रसाद बांटा गया।समय के साथ पूजा का स्वरूप बदला। अस्थायी मंडप अब भव्य ढलाई वाले भवन में बदल चुका है। पूजा का बजट अब चार लाख रुपये से अधिक है। करनी पंचायत के साथ आसपास के 12 गांवों के ग्रामीण भी आर्थिक सहयोग दे रहे हैं। आयोजन आस्था के साथ सामाजिक एकता का प्रतीक बन गया है।षष्ठी से नवमी तक शाम में बच्चियों का डांडिया नृत्य होगा। विजयादशमी पर मेला लगेगा। मेले में रामगढ़ से आए कलाकार धार्मिक झांकी पेश करेंगे। भजन संध्या होगी। इस वर्ष किसी कारणवश नाटक का मंचन नहीं होगा।पूजा को सफल बनाने में अध्यक्ष यशवंत सिंह, उपाध्यक्ष लौकेश कुमार दास, सचिव सीताराम दांगी, कोषाध्यक्ष हरेंद्र कुमार, उपकोषाध्यक्ष उमेश दांगी, उपसचिव जगदीश राणा, युवा शक्ति, समस्त ग्रामीण जुटे हैं।
