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नवमी के हवन में आखिरी आहुति की तैयारी होती है तो नारियल भी रखा जाता है. घरों में अक्सर कहा जाता है कि इसकी पूर्णाहुति दिए बिना नवरात्रि की पूजा पूरी नहीं होती. लेकिन नारियल न मिले या उसे अर्पित करना भूल जाएं, तो क्या नौ दिनों का व्रत और पूजन निष्फल हो जाता है?
सिर्फ नारियल न चढ़ने से पूरी नवरात्रि पूजा को अधूरा या निष्फल कहना सही नहीं है. पूर्णाहुति हवन का समापन विधान है और उसमें नारियल एक प्रचलित सामग्री है. हवन पद्धति में पूर्णाहुति के लिए नारियल के साथ सुपारी का विकल्प भी दिया गया है. यानी नारियल को हर पूजा पद्धति की एकमात्र अनिवार्य सामग्री मान लेना ठीक नहीं होगा.
पूर्णाहुति का अर्थ क्या है?
पहले एक बात समझ लें, पूर्णाहुति हवन समाप्त होने के बाद किया जाने वाला अलग अनुष्ठान नहीं, बल्कि उसके समापन का हिस्सा है. निर्धारित आहुतियों के बाद यह अंतिम विशेष अर्पण किया जाता है.
नवरात्रि की साधना के संदर्भ में इसे अपने जप, पूजन और संकल्प को देवी के चरणों में अर्पित करने के भाव से समझा जाता है. नवरात्रि साधना में भी अनुष्ठान के अंतिम दिन हवन के माध्यम से पूर्णाहुति का विधान बताया गया है. हालांकि इसे सभी परिवारों की दुर्गा पूजा की एक जैसी विधि नहीं मानना चाहिए.
नारियल ही क्यों चढ़ाया जाता है?
पूर्णाहुति में नारियल अर्पित करना फल समर्पण की प्रचलित परंपरा है. इसके लिए नारियल और सुपारी का उपयोग आम है, लेकिन कुछ पद्धतियों में सूखे मेवे या अन्य फल भी प्रयुक्त हो सकते हैं. इससे स्पष्ट होता है कि पूर्णाहुति का विधान केवल एक वस्तु तक सीमित नहीं है.
नारियल चढ़ाने को अपने अहंकार और बुरी प्रवृत्तियों के समर्पण से भी जोड़कर समझाया जाता है.
नारियल नहीं है तो क्या करें?
यदि आपके घर की पूजा पद्धति में नारियल की पूर्णाहुति दी जाती है, तो उसकी तैयारी पहले कर लें. उपलब्ध न होने पर हवन कराने वाले पुरोहित से उसी पद्धति में मान्य विकल्प पूछें.
यहां फर्क समझना जरूरी है, नारियल का न होना और पूर्णाहुति का समापन विधान छोड़ देना, दो अलग बातें हैं. सामग्री बदलने की अनुमति आपकी अपनाई हुई पूजा पद्धति पर निर्भर करेगी.
क्या बिना हवन के भी नवरात्रि पूजा अधूरी है?
सामान्य घरेलू पूजन और विधिवत संकल्प लेकर किए जा रहे विशेष अनुष्ठान को एक ही नियम से नहीं परखा जा सकता. यदि आपने किसी निश्चित अनुष्ठान का संकल्प लिया है, जिसमें हवन और पूर्णाहुति शामिल हैं, तो उसका समापन उसी विधि के अनुसार कराएं.
लेकिन सामान्य घरेलू पूजा में केवल नारियल न चढ़ पाने के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना कि देवी नाराज हो गईं या नौ दिनों की पूजा व्यर्थ हो गई, ऐसा नहीं है.
पूर्णाहुति देना भूल गए हों तो?
पूजा दोबारा शुरू करने या किसी अनिष्ट की आशंका मान लेने के बजाय पुरोहित को बताएं कि कौन-सा चरण छूटा है. वे आपके संकल्प और पूजा पद्धति के अनुसार आगे की विधि बता सकते हैं.
नवमी के हवन में नारियल अर्पित करने की परंपरा का सम्मान करें, लेकिन उसे भय का कारण न बनाएं. पूर्णाहुति का महत्व अनुष्ठान के विधिपूर्वक समापन में है; नारियल की अनिवार्यता हर परंपरा में एक जैसी नहीं है.
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