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गोपालगंज के कुचायकोट प्रखंड का नवका टोला गांव स्थित पीतांबरा पीठ बगलामुखी मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। यहां मां बगलामुखी की पूजा-अर्चना और विशेष अनुष्ठानों के लिए गोपालगंज समेत आसपास के जिलों और दूसरे राज्यों से भी श्रद्धालु पहुंचते हैं। मंदिर की स्थापना मां बगलामुखी के साधक और पीठाधीश्वर महर्षि शिवानंद परमहंस जी महाराज ने की थी। मान्यता है कि इस पीठ की स्थापना के पीछे मां बगलामुखी की दिव्य प्रेरणा जुड़ी हुई है। नवरात्र के दौरान मंदिर परिसर में विशेष पूजा, हवन और मंत्रोच्चार होते हैं। 1963 से मां बगलामुखी की साधना कर रहे महर्षि पीठ से जुड़ी मान्यताओं के अनुसार, महर्षि शिवानंद परमहंस जी महाराज ने वर्ष 1963 में मां बगलामुखी की साधना शुरू की थी। उन्हें अंतःप्रेरणा मिलने के बाद असम के कामाख्या स्थित नीलांचल पर्वत जाने की बात बताई जाती है, जहां उन्होंने मां की आराधना की। साधना के दौरान मां के दर्शन होने और पीठ की स्थापना का निर्देश मिलने की मान्यता भी प्रचलित है। इसके बाद उन्होंने नवका टोला में इस पीठ की स्थापना की। आज यह मंदिर मां बगलामुखी के उपासकों के लिए विशेष धार्मिक महत्व रखता है। यहां आने वाले श्रद्धालु पूजा-अर्चना कर परिवार की सुख-शांति और जीवन की बाधाओं से मुक्ति की कामना करते हैं। पीले रंग की वस्तुओं से होती है मां की पूजा मां बगलामुखी को पीतांबरा देवी भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं में पीले रंग को मां की पूजा का प्रमुख हिस्सा माना गया है। इसी वजह से पीतांबरा पीठ में पूजा के दौरान पीले वस्त्र, पीले फूल और हल्दी की माला का विशेष रूप से उपयोग किया जाता है। श्रद्धालु मां को पीली वस्तुएं अर्पित कर विधि-विधान से आराधना करते हैं। मंदिर में शारदीय और चैत्र नवरात्र के दौरान विशेष अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं। इन अवसरों पर हवन, पाठ और मंत्रोच्चार के लिए श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ जाती है। मंदिर परिसर में धार्मिक गतिविधियों के कारण पूरे वातावरण में भक्ति का माहौल रहता है। मुकदमों में विजय और बाधा मुक्ति के लिए कराते हैं अनुष्ठान मां बगलामुखी की उपासना को लेकर श्रद्धालुओं के बीच कई धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं। मान्यता है कि मां की आराधना से शत्रुओं पर विजय, विवादों में सफलता और जीवन की कठिनाइयों से मुक्ति मिलती है। इसी विश्वास के साथ कई श्रद्धालु कोर्ट-कचहरी से जुड़े मामलों और दूसरी परेशानियों के समाधान की कामना लेकर यहां पहुंचते हैं। पीठ में बगलामुखी पाठ और स्तंभन पूजा जैसे विशेष अनुष्ठान भी कराए जाने की बात कही जाती है। श्रद्धालु अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए मां के दरबार में पूजा-अर्चना करते हैं। हालांकि, इन अनुष्ठानों के परिणाम धार्मिक आस्था और मान्यताओं से जुड़े हैं। दोनों नवरात्रों में उमड़ते हैं श्रद्धालु पीतांबरा पीठ में साल के दोनों प्रमुख नवरात्रों के दौरान विशेष धार्मिक आयोजन होते हैं। इन दिनों मंदिर में पूजा-पाठ, हवन और वैदिक मंत्रोच्चार का क्रम चलता है। मां के दर्शन और अनुष्ठान में शामिल होने के लिए स्थानीय श्रद्धालुओं के साथ दूर-दराज के क्षेत्रों से भी लोग पहुंचते हैं। गोपालगंज के नवका टोला स्थित यह मंदिर धार्मिक आस्था, साधना और परंपरा का केंद्र बना हुआ है। महर्षि शिवानंद परमहंस जी महाराज से जुड़ी साधना की परंपरा और मां बगलामुखी के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था ने इस पीठ को क्षेत्र में विशिष्ट पहचान दिलाई है।
बगलामुखी मंदिर में पूरी होती हैं हर मनोकामनाएं:गोपालगंज के नवका टोला में है सिद्ध पीठ, 1963 से साधना कर रहे महर्षि शिवानंद परमहंस
