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कहीं मां के चरणों में सिंदूर चढ़ाती महिलाएं, तो कहीं एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर खुशहाली की कामना करतीं सुहागिनें। ढोल की थाप और मां के जयकारों के बीच जब विदाई की घड़ी आई, तो कई श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं। भागलपुर में विजयादशमी पर मां दुर्गा की विदाई का ऐसा ही भावुक नजारा दिखा। जिन पंडालों में कुछ दिन पहले तक उत्सव और उल्लास था, वहां अब मां को विदा करने की उदासी थी। हर किसी की जुबां पर एक ही प्रार्थना थी- हे मां, अगले बरस फिर आना और अपने भक्तों पर कृपा बनाए रखना। रेशमी नगरी भागलपुर में दुर्गा पूजा के दौरान कई दिनों तक भक्ति और उत्साह का माहौल रहा। मंदिरों और पूजा पंडालों में दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। ढाक की गूंज, शंखनाद और मां के जयकारों से पूरा माहौल भक्तिमय बना रहा। विजयादशमी पर प्रतिमाओं के विसर्जन के साथ उत्सव का समापन हुआ। सिंदूर खेला में दिखी बंगाली संस्कृति की खूबसूरती बंगाली परंपरा के अनुसार मां दुर्गा की विदाई से पहले सिंदूर खेला की रस्म निभाई गई। महिलाओं ने मां के चरणों में सिंदूर अर्पित किया और आरती उतारकर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। इसके बाद एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर खुशहाली और अखंड सौभाग्य की प्रार्थना की। लाल सिंदूर से सजे चेहरे और पारंपरिक परिधानों में सजी महिलाओं ने इस रस्म को खास बना दिया। रस्म के दौरान चेहरे पर खुशी थी, लेकिन मां की विदाई का ख्याल आते ही आंखें नम हो गईं। महिलाओं ने मां से अगले साल फिर आने और परिवार पर अपनी कृपा बनाए रखने की प्रार्थना की। दुर्गाबाड़ी और कालीबाड़ी की प्रतिमाएं दीपनगर घाट पहुंचीं भागलपुर के दुर्गाबाड़ी और कालीबाड़ी में बंगाली रीति-रिवाजों के साथ मां दुर्गा की प्रतिमाओं का विसर्जन दीपनगर घाट पर किया गया। श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना और आरती के बाद मां को विदाई दी। घाट की ओर बढ़ते श्रद्धालु जयकारे लगाते रहे। इस दौरान लोगों ने परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और खुशहाली की कामना की। मां की प्रतिमा विसर्जन के लिए आगे बढ़ी, तो श्रद्धालु देर तक उसे निहारते रहे। किसी ने हाथ जोड़कर प्रणाम किया, तो किसी ने मन ही मन अपनी मनोकामना मां के चरणों में रखी। नाथनगर में भी परंपरागत तरीके से विसर्जन नाथनगर में भी विजयादशमी पर मां दुर्गा की प्रतिमाओं का विसर्जन पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ किया गया। महाशय ड्योढ़ी की प्रतिमा का विसर्जन बंगाली टोला घाट पर और सुजानपुर दुर्गा मंदिर की प्रतिमा का विसर्जन चंपा नदी घाट पर हुआ। वहीं, गोपीनाथ घोष लेन, लखीकांत आचार्य लेन और चमरू साह लेन की प्रतिमाओं का विसर्जन मखदूम शाह दरगाह घाट पर किया गया। विभिन्न घाटों पर श्रद्धालुओं ने मां को अंतिम प्रणाम कर सुख-समृद्धि और शांति की कामना की। प्रतिमाओं की विदाई के साथ पूजा महोत्सव का समापन हुआ, लेकिन भक्तों के मन में मां के प्रति श्रद्धा और विश्वास बना रहा। प्रतिमा का विसर्जन, आस्था का नहीं मां दुर्गा की विदाई का पल श्रद्धा के साथ भावुकता से भी भरा रहा। भक्तों ने मां से परिवार की खुशहाली, बच्चों के उज्ज्वल भविष्य और समाज में शांति व भाईचारा बनाए रखने की प्रार्थना की। प्रतिमाएं जल में विसर्जित हुईं, लेकिन भक्तों के मन में मां के आशीर्वाद का विश्वास कायम रहा। विजयादशमी का पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश देकर विदा हुआ। अब भक्तों को अगले साल मां के आगमन का इंतजार रहेगा।
भागलपुर में विजयादशमी पर सिंदूर खेला:जयकारों के बीच मां दुर्गा को दी विदाई, भक्तों ने कहा-अगले बरस फिर आना मां!
