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भास्कर न्यूज|गुमला गुमला को भविष्य में नगर निगम के रूप में अपग्रेड करने के लिए नगर परिषद की कमेटी ने अपना सर्वे पूरा कर लिया है। एई मनीष कुमार की अध्यक्षता वाली कमेटी द्वारा तैयार की गई यह सर्वे रिपोर्ट अब उन इलाकों की तकदीर बदलेगी, जो आने वाले समय में शहर का मुख्य हिस्सा बनेंगे। यह कवायद 2027 में होने वाले राष्ट्रीय परिसीमन को ध्यान में रखकर की जा रही है। शहरी क्षेत्र का पुनर्गठन किया जाएगा। गुमला को बड़े शहरों की कतार में खड़ा किया जा सकेगा। सर्वे की शुरुआत वार्ड नंबर एक के अंतर्गत चर्च के सीमांकन से की गई। इसके बाद चंडाली और खटवा नदी के आसपास के इलाके को समेटते हुए सिसई रोड स्थित बम्हनी को शामिल किया गया। बाइपास के रास्ते अरमई को शहरी क्षेत्र में शामिल करने का प्रस्ताव तैयार हुआ। फिर बाइपास से सटे सिलम, तेलगांव डैम, सारू के इलाकों को दायरे में लिया गया। अंत में पुन: वार्ड संख्या एक के चर्च तक पहुंचकर सर्वे पूरा किया गया। अब सर्वे रिपोर्ट को 28 अक्टूबर को होने वाली नगर परिषद बोर्ड की बैठक में अनुमोदन के लिए रखा जाएगा। जनप्रतिनिधियों की सहमति से जैसे ही यह प्रस्ताव पास होगा, इसे उपायुक्त को सौंप दिया जाएगा। उपायुक्त के माध्यम से यह रिपोर्ट राज्य सरकार और परिसीमन आयोग को भेजी जाएगी। नप बोर्ड बैठक में सर्वे रिपोर्ट पेश की जाएगी। सदस्य इस पर चर्चा करेंगे। प्रस्ताव पास किया जाएगा। तब प्रस्ताव और सर्वे रिपोर्ट उपायुक्त को सौंपे जाएंगे। प्रशासन रिपोर्ट की प्रशासनिक और तकनीकी जांच करेगा। फिर उपायुक्त स्तर से स्क्रूटनी होगी। अनापत्ति मिलने के बाद इस फाइल को अंतिम मंजूरी के लिए विभाग को भेजा जाएगा। सरकार इस प्रस्ताव की समीक्षा करेगी। इसके बाद सरकार प्रारंभिक अधिसूचना जारी करेगी। इसके तहत आम जनता से दावे और आपत्तियां मांगे जाएंगे। प्राप्त आपत्तियों की सुनवाई होगी। आपत्तियां तार्किक नहीं पाई गईं या जनहित में उन्हें खारिज कर दिया गया, तो राज्यपाल की मंजूरी के बाद सरकार अंतिम अधिसूचना जारी करेगी। इसे राज्य के राजपत्र में प्रकाशित किया जाएगा। इसके साथ ही वे गांव आधिकारिक तौर पर शहरी क्षेत्र का हिस्सा बन जाएंगे। एई मनीष कुमार ने बताया कि योजना का उद्देश्य ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों को नगर क्षेत्र में शामिल करना है। नगर निगम का दर्जा पाने के लिए मानकों के अनुसार आबादी का डेढ़ लाख से अधिक होना अनिवार्य है। इस सर्वे के धरातल पर उतरते ही गुमला न सिर्फ नगर निगम बनेगा, बल्कि शामिल होने वाले गांवों के नागरिकों को शुद्ध पेयजल, बेहतर ड्रेनेज सिस्टम, जगमगाती स्ट्रीट लाइटें, चकाचक पक्की सड़कों जैसी उच्च स्तरीय शहरी सुविधाएं मिलेंगी। योजना को भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है। शहर का दायरा बढ़ने पर नए समाहरणालय, बाइपास, बायोडायवर्सिटी पार्क आदि शहर का हिस्सा होंगे। नए शहरी क्षेत्रों में पानी की सुचारू आपूर्ति के लिए तेलगांव डैम को पेयजल सोर्स के रूप में शामिल किया गया है। इससे भविष्य में शहर को पानी की किल्लत से नहीं जूझना पड़ेगा।
गुमला बनेगा नगर निगम… बम्हनी, सिलम और चंडाली समेत कई इलाके शामिल होंगे
