पटना में भूकंप आपदा से निपटने का अभ्यास,:सात प्रमुख स्थानों पर मॉक ड्रिल, मलबे से निकाले गए घायल

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पटना में भूकंप जैसी आपात स्थिति से निपटने की तैयारियों को परखने के लिए आज जिला प्रशासन की ओर से बड़े स्तर पर मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। यह अभ्यास राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA), बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और आपदा प्रबंधन विभाग, बिहार सरकार के दिशा-निर्देशों के तहत किया गया। इसका मकसद यह देखना था कि अगर सच में भूकंप आए तो प्रशासन, सुरक्षा बल और आम लोग मिलकर कितनी जल्दी और कितनी सही तरीके से हालात को संभाल सकते हैं। इससे पहले कल पटना समाहरणालय में भूकंप पर आधारित टेबल टॉप एक्सरसाइज किया गया था, जिसमें अधिकारियों ने कागज पर आपदा की स्थिति बनाकर अपनी रणनीति और तैयारियों की समीक्षा की। आज उसी अभ्यास को ज़मीन पर उतारते हुए मॉक ड्रिल कराई गई। सात जगहों पर हुआ अभ्यास आज के मॉक ड्रिल के लिए पटना के सात प्रमुख स्थानों को चुना गया था। इनमे पटना समाहरणालय, जेडी वीमेंस कॉलेज और उसका छात्रावास, बिस्कोमान भवन, सिटी सेंटर मॉल, जेपी सेतु, गांधी मैदान और आईजीआईएमएस शामिल थे। इन सभी जगहों पर भूकंप के बाद की स्थिति का वास्तविक जैसा दृश्य बनाया गया। कहीं इमारत को नुकसान दिखाया गया, कहीं आग लगने का सीन रचा गया, तो कहीं लोगों के मलबे में फंसे होने और घायल होने का अभ्यास कराया गया। सभी विभागों ने मिलकर किया काम इस मॉक ड्रिल में स्थानीय लोग, आपदा मित्र, सिविल डिफेंस, एनसीसी, भारतीय सेना, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, रैपिड एक्शन फोर्स, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग, नगर निगम, पीएचईडी, बिजली विभाग, अग्निशमन सेवा और बीएसएनएल समेत सभी संबंधित विभागों ने हिस्सा लिया। हर सिमुलेशन स्थल पर वरीय नोडल अधिकारी और प्रभारी अधिकारी तैनात किए गए थे, ताकि राहत और बचाव कार्य सही ढंग से हो सके। घायल लोगों को सुरक्षित निकालने, प्राथमिक इलाज देने, आग बुझाने, संचार व्यवस्था बहाल करने और भीड़ को नियंत्रित करने का अभ्यास किया गया। पूरा माहौल बिल्कुल असली आपदा जैसा बनाया गया ताकि किसी भी तरह की कमी सामने आ सके। पटना भूकंप के लिहाज़ से संवेदनशील पटना के जिलाधिकारी ने कहा कि पटना भूकंप के लिहाज से संवेदनशील इलाका है और यह सिस्मिक जोन-4 में आता है। ऐसे में किसी भी समय आपदा की स्थिति बन सकती है। इसलिए पहले से तैयारी करना बहुत जरूरी है। मॉक ड्रिल और टेबल टॉप एक्सरसाइज का मुख्य उद्देश्य यही है कि आपात स्थिति में जिले की तैयारी, त्वरित प्रतिक्रिया और सभी विभागों के बीच तालमेल की जांच की जा सके। जिलाधिकारी ने कहा कि इन अभ्यासों से यह समझने में मदद मिलती है कि कौन सा विभाग क्या भूमिका निभाएगा और किस तरह आम लोगों की जान-माल की रक्षा की जाएगी। राज्य सरकार के निर्देश के अनुसार समय-समय पर ऐसे प्रशिक्षण कार्यशालाएं, मॉक ड्रिल और जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। लोगों को किया जा रहा जागरूक जिला प्रशासन की ओर से भूकंप के समय क्या करें और क्या न करें (Do’s and Don’ts) का बड़े पैमाने पर प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। लोगों को सिखाया जा रहा है कि भूकंप आने पर घबराएं नहीं, सुरक्षित जगह पर जाएं और अफवाहों से बचें। साथ ही सामुदायिक स्तर पर आपदा से लड़ने की क्षमता बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है ताकि नुकसान को कम से कम किया जा सके।
जिला प्रशासन ने साफ कहा कि घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन सतर्क रहना बेहद जरूरी है। ऐसे अभ्यासों से ही यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि किसी असली आपदा की स्थिति में समय पर और सही तरीके से मदद पहुंचाई जा सके।

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