Arvind Kejriwal:’अरविंद की कोई गलती नहीं’,अन्ना हजारे का बड़ा बयान, लोगों ने पूछा-अर्जुन को कर दिया माफ? | Delhi Liquor Scam case: What Anna Hazare said on court relief to Arvind Kejriwal? People asked – did you forgive Your Arjun? Video

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oi-Ankur Sharma

Arvind Kejriwal: सोशल एक्टिविस्ट अन्ना हजारे ने शुक्रवार को कहा कि ‘एक्साइज पॉलिसी केस में दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (AAP) के चीफ अरविंद केजरीवाल को बरी करने के कोर्ट के फैसले का सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमारा देश अपने ज्यूडिशियल और सिक्योरिटी सिस्टम की ताकत पर चलता है।’

‘अलग-अलग पार्टियों, जातियों, धर्मों और समुदायों वाला इतना बड़ा देश होने के बावजूद, यह ज्यूडिशियरी की वजह से आसानी से चलता है। इसके बिना, अफरा-तफरी और अशांति होगी। अब जब कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया है कि अरविंद केजरीवाल की कोई गलती नहीं है, तो इसे मानना ​​चाहिए।’

Arvind Kejriwal-anna hazare

आपको बता दें कि कोर्ट ने राजनीतिक रूप से सेंसिटिव एक्साइज पॉलिसी केस में अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और 21 अन्य को बरी कर दिया, यह देखते हुए कि CBI पॉलिसी के पीछे कोई बड़ी साज़िश या क्रिमिनल इरादा” साबित करने में नाकाम रही है। इस केस में जिन लोगों को बरी किया गया, उनमें तेलंगाना जागृति की प्रेसिडेंट के कविता भी थीं, जिन्हें भी राहत दी गई।

Arvind Kejriwal कहलाते थे ‘अन्ना का अर्जुन’

अन्ना हजारे के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर दोनों को लेकर बातें होने लग गई है, दरअसल अन्ना हजारे के लोकपाल आंदोलन से ही अरविंद केजरीवाल को पूरे देश में लोकप्रियता हासिल हुई थी, वो आम आदमी के नायक बन गए थे और लोगों ने उन्हें ‘अन्ना का अर्जुन’ कहना शुरू कर दिया था लेकिन केजरीवाल ने जब आम आदमी पार्टी बनाकर राजनीति में कदम रखा तो केजरीवाल और अन्ना के रिश्ते में दूरियां पैदा हो गई थीं।

लोकपाल आंदोलन से जुड़ा था Arvind Kejriwal और Anna Hazare का साथ

साल 2011 में दिल्ली के रामलीला मैदान में हुए ऐतिहासिक जनलोकपाल आंदोलन ने पूरे देश का ध्यान खींचा था । इस आंदोलन का नेतृत्व समाजसेवी अन्ना हजारे कर रहे थे। उनका उद्देश्य था – एक सशक्त लोकपाल कानून लागू कराना, जिससे उच्च स्तर के भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाया जा सके। इस आंदोलन में अरविंद केजरीवाल प्रमुख रणनीतिकार और आयोजकों में से एक थे। केजरीवाल, जो पहले भारतीय राजस्व सेवा (IRS) में अधिकारी रह चुके थे, ने आंदोलन को संगठित रूप देने और मीडिया तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अन्ना हजारे की सादगी और नैतिक छवि के साथ केजरीवाल की रणनीति ने आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर लोकप्रिय बना दिया था।

Arvind Kejriwal और Anna Hazare क्यों हुए थे अलग?

जनलोकपाल आंदोलन के बाद सबसे बड़ा सवाल था-क्या इस आंदोलन को राजनीतिक रूप दिया जाए?

  • अन्ना हजारे का मत: वे राजनीति से दूरी बनाए रखना चाहते थे। उनका मानना था कि सामाजिक आंदोलन को राजनीतिक दल में बदलना उसकी नैतिक ताकत को कम कर सकता है।
  • अरविंद केजरीवाल का मत: उनका मानना था कि व्यवस्था में बदलाव लाने के लिए राजनीति में प्रवेश करना जरूरी है।

बस यहीं से दोनों के रास्ते अलग हो गए। अन्ना हजारे ने स्पष्ट कहा कि वे किसी राजनीतिक दल का समर्थन नहीं करेंगे और न ही चुनाव लड़ेंगे। इसके बाद कई बार सार्वजनिक मंच पर अन्ना केजरीवाल से सहमत नहीं दिखे लेकिन दोनों ने एक-दूसरे का सम्मान बनाए रखा। केजरीवाल राजनीति के सफर पर काफी आगे बढ़ गए लेकिन अन्ना आज भी भ्रष्टाचार के खिलाफ सादगी औऱ अंहिसा के साथ अपनी लड़ाई लड़ रहे हैं।

VIDEO | As the Rouse Avenue Court discharges former Delhi CM Arvind Kejriwal and his deputy Manish Sisodia in the excise policy case, social activist Anna Hazare says, “Our country runs on the strength of its judicial and security systems. Despite being such a large nation with… pic.twitter.com/xpBCMf7s7m

— Press Trust of India (@PTI_News) February 27, 2026 “>

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