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मोतिहारी शहर की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर किए जा रहे दावों के विपरीत, जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। शहर में लोगों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए लगाए गए सीसीटीवी कैमरे, जिन्हें सुरक्षा की ‘तीसरी आंख’ माना जाता है, वे महीनों से नहीं बल्कि वर्षों से खराब पड़े हैं। इस ओर न तो पुलिस प्रशासन और न ही नगर प्रशासन का ध्यान है। इस स्थिति की पड़ताल के लिए जब हमारी टीम कचहरी चौक पहुंची, तो वहां लगा सीसीटीवी कैमरा पूरी तरह से बंद मिला। आसपास मौजूद लोगों ने बताया कि यह कैमरा काफी लंबे समय से खराब है। हालांकि, कुछ दूरी पर एक अन्य कैमरा चालू हालत में दिखा, लेकिन वह पूरे इलाके की निगरानी के लिए पर्याप्त नहीं है। मरम्मत या रखरखाव के लिए कोई ठोस पहल नहीं उगल पांडे कॉलेज और छमदमड़ी इलाके का जायजा लेने पर भी कमोबेश यही स्थिति देखने को मिली। कई स्थानों पर कैमरे धूल फांकते हुए बंद पड़े हैं, जिससे सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि इन कैमरों की मरम्मत या रखरखाव के लिए कोई ठोस पहल नहीं की जा रही है। प्रोफेसर की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी पूर्व में उगल पांडे कॉलेज के पास ही एक प्रोफेसर की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उस समय भी इलाके में लगे सीसीटीवी खराब थे, जिसके कारण अपराधियों की पहचान करने में पुलिस को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा था। इस घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई सवाल उठे थे। इस संबंध में नगर आयुक्त से बात करने पर उन्होंने बताया कि जहां-जहां कैमरे खराब हुए हैं, वहां नए कैमरे लगाने की प्रक्रिया चल रही है। इसके बावजूद, शहर के कई अहम स्थानों पर बंद पड़े कैमरे सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलते नजर आ रहे हैं। ऐसे में, यदि कोई बड़ी घटना होती है, तो उसकी जांच कैसे होगी, यह एक बड़ा सवाल बना हुआ है।


