नालंदा में ग्राहकों की पहली पसंद 'मेड इन इंडिया' उत्पाद:होली पर गदा, तलवार और बेलन पिचकारी की डिमांड; बाजार में 90% से ज्यादा लोकल सामान

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रंगों के महापर्व होली को लेकर नालंदा जिला मुख्यालय बिहारशरीफ पूरी तरह से सराबोर हो चुका है। शहर के चौक-चौराहों से लेकर गली-मोहल्लों तक अबीर-गुलाल और पिचकारियों की दुकानें सज गई हैं। इस बार बाजार में सबसे बड़ा बदलाव ‘स्वदेशी’ का दिख रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने की अपील का असर अब धरातल पर साफ नजर आ रहा है। कभी चाइनीज पिचकारियों के कब्जे में रहने वाले बिहारशरीफ के बाजार में इस साल 90 प्रतिशत से अधिक सामान लोकल है, जबकि चीन की हिस्सेदारी सिमटकर मात्र 10 प्रतिशत रह गई है। बाजार में गदा से लेकर स्प्राइट तक की पिचकारी इस बार बच्चों के आकर्षण के लिए बाजार में पिचकारियों के अनोखे डिजाइन उतारे गए हैं। बाजार में गदा, तलवार, और गुलाल गन की भारी डिमांड है। बच्चों के बीच पिट्ठू पिचकारी (बैग वाली) का क्रेज सबसे ज्यादा है। इसके अलावा, कोल्ड ड्रिंक के शौकीनों के लिए स्प्राइट और कोका कोला की बोतलनुमा पिचकारियां भी उपलब्ध हैं। गृहणियों के लिए रसोई से जुड़ी बेलन पिचकारी भी आकर्षण का केंद्र है। ‘गदा’ और ‘तलवार’ डिजाइन वाली पिचकारी व्यवसायी रोहित कुमार बताया कि इस बार लोग ऐसी पिचकारियां पसंद कर रहे हैं जिसे लेकर बच्चे खुद को थोड़ा अलग महसूस करें। यही कारण है कि ‘गदा’ और ‘तलवार’ डिजाइन वाले मॉडल ज्यादा बिक रहे हैं। हालांकि, मुखौटों (मास्क) के मामले में अब भी चीनी उत्पाद बाजार में बने हुए हैं, लेकिन मुख्य पिचकारी सेगमेंट से चाइनीज माल लगभग गायब है। 10 रुपए से लेकर 1000 रुपये तक के विकल्प बाजार में हर वर्ग की जेब का ख्याल रखा गया है। जहां साधारण मैनुअल पिचकारियां मात्र 10 रुपए से शुरू होकर 500 रुपए तक उपलब्ध है, वहीं तकनीक प्रेमी बच्चों के लिए बैटरी से चलने वाली (Automatic) पिचकारियां भी आई हैं। जिनकी कीमत 500 से 1000 रुपए के बीच है। मुखौटों की बात करें तो मोदी जी का मास्क युवाओं की पहली पसंद बना हुआ है, जबकि बच्चों के लिए बंदर और कार्टून पात्रों के मास्क 10 से 50 रुपए के थोक भाव पर मिल रहे हैं। होली मिलन समारोहो के लिए इस बार 4 से 6 किलोग्राम की बड़ी क्षमता वाली ‘टंकी पिचकारियां’ भी बाजार में उतारी गई हैं, जो सामूहिक उत्सवों के लिए काफी लोकप्रिय हो रही हैं। हाथरस का गुलाल और दिल्ली-कोलकाता का कलेक्शन बिहारशरीफ का यह बाजार न केवल जिले की जरूरतों को पूरा कर रहा है, बल्कि पड़ोसी जिलों जैसे शेखपुरा और नवादा के व्यापारी भी यहां से थोक खरीदारी कर रहे हैं। इस बार रंग और गुलाल की सबसे बड़ी खेप उत्तर प्रदेश के हाथरस से आई है, जो अपनी उच्च गुणवत्ता और खुशबू के लिए जाना जाता है। वहीं, पिचकारियों का बड़ा स्टॉक दिल्ली, कोलकाता और पटना सिटी से मंगवाया गया है। स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता को देखते हुए इस साल हर्बल गुलाल और नेचुरल कलर की मांग में जबरदस्त उछाल आया है। यह गुलाल 5 रुपए प्रति पैकेट से शुरू होकर 50 रुपए तक की रेंज में 8 से 10 अलग-अलग रंगों में उपलब्ध है। चीनी सामान से तौबा: ‘सब अब यहीं बन रहा है’ दुकानदारों का कहना है कि अब ग्राहकों की पहली पसंद ‘मेड इन इंडिया’ उत्पाद है। दुकानदार रोहित कुमार ने बताया कि चीन की पिचकारियां अब बंद के बराबर हैं। मोदी जी के आह्वान के बाद अब सब कुछ भारत में ही बन रहा है। क्वॉलिटी भी पहले से बेहतर है। हालांकि, व्यापारियों का यह भी मानना है कि बाजार में उत्साह तो है, लेकिन समय के साथ त्योहार मनाने के तौर-तरीकों में बदलाव आ रहा है। फिर भी, ‘होली मिलन’ जैसे कार्यक्रमों के बढ़ते चलन से व्यापार को नई ऑक्सीजन मिल रही है।

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