होली के दिन PMCH में सबसे ज्यादा पहुंचे घायल:अस्पतालों में एक्सट्रा बेड रिजर्व थे, इमरजेंसी के लिए स्पेशल डॉक्टरों की टीम बनी थी

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होली के दिन पटना की सड़कों पर हुए सड़क हादसों के कारण शहर के अस्पतालों में भारी भीड़ देखी गई। इन दुर्घटनाओं में कई लोग घायल हुए, जिन्हें विभिन्न सरकारी अस्पतालों में भर्ती कराया गया। पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (PMCH) में सबसे ज्यादा 25 घायलों का इलाज किया गया, जबकि गार्डिनर अस्पताल में 12 और इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (IGIMS) में 9 घायलों का उपचार हुआ। स्वास्थ्य विभाग ने होली के दौरान सड़क दुर्घटनाओं, रंग-गुलाल से एलर्जी और झगड़े-हंगामे की आशंका को देखते हुए पहले से ही हाई अलर्ट जारी किया था। अस्पतालों में एक्सट्रा बेड आरक्षित रखे गए थे और आपातकालीन सेवाओं को मजबूत किया गया था। ज्यादातर मरीज के हाथ-पैर और सिर में चोट PMCH के आपातकालीन वार्ड में डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की टीम लगातार मरीजों के इलाज में व्यस्त रही। यहां सड़क हादसों के सबसे अधिक मरीज पहुंचे, जिनमें कई को सिर-हाथ और पैर में गंभीर चोटें आई थीं। IGIMS की आपातकालीन इकाई में भी डॉक्टरों की विशेष टीम तैनात थी। यहां दुर्घटनाओं के अलावा रंगों से एलर्जी और आंखों में जलन की शिकायत वाले मरीज भी पहुंचे। अस्पताल प्रशासन ने आवश्यक दवाओं और उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित की थी। गार्डिनर अस्पताल में भी आपातकालीन सेवाएं पूरी तरह सक्रिय रहीं, जहां अधिकांश मरीज बाइक दुर्घटनाओं में घायल हुए थे।

इमरजेंसी के लिए डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ तैनात किए गए थे PMCH के अधीक्षक डॉ. राजीव कुमार सिंह ने बताया, ‘होली के मद्देनजर अस्पताल को पूरी तरह अलर्ट पर रखा गया था। आपातकालीन सेवाओं में अतिरिक्त डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ को तैनात किया गया था, ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, सभी मेडिकल कॉलेज अस्पतालों और जिला अस्पतालों में 24 घंटे आपातकालीन सेवाएं सक्रिय रहीं और आवश्यकता पड़ने पर सर्जरी टीम को भी तैयार रखा गया था।’
एम्बुलेंस सेवा भी रही सतर्क

स्वास्थ्य विभाग ने एम्बुलेंस सेवा को भी अलर्ट मोड में रखा था। सड़कों पर एंबुलेंस की तैनाती की गई थी, ताकि हादसे के तुरंत बाद घायलों को अस्पताल पहुंचाया जा सके।
सिविल सर्जन डॉ. योगेन्द्र प्रसाद मंडल ने बताया कि होली के दौरान किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए राजधानी की स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह मुस्तैद रही। हुड़दंग, सड़क दुर्घटनाओं या रंग-गुलाल से होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं को देखते हुए डॉक्टरों की टीम चौबीसों घंटे अलर्ट रही।

पहले से की गई थी व्यापक तैयारी

होली से पहले ही अस्पतालों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए थे। ब्लड बैंक में पर्याप्त मात्रा में रक्त की उलब्धता थी। साथ ही ट्रॉमा और इमरजेंसी वार्ड में अतिरिक्त बेड आरक्षित रखे गए थे।
त्योहार के दिन भले ही शहर में रंग और उत्साह का माहौल रहा, लेकिन अस्पतालों में दिनभर आपाधापी का माहौल देखने को मिला। राहत की बात यह रही कि अधिकांश घायलों की स्थिति खतरे से बाहर बताई गईं।

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